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सिविल कानून

वक्फ संशोधन विधेयक, 2025

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 03-Apr-2025

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 14 घंटे की बहस के बाद पारित हुआ

“वक्फ विधेयक लोकसभा में पारित: सरकार ने पारदर्शिता का उदाहरण दिया, विपक्ष ने कहा आस्था के आधार पर विभाजनकारी प्रयास है।”

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों?

लोकसभा में गहन चर्चा के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक पारित हो गया। प्रस्तावित संशोधनों की जाँच के लिये विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया।

  • JPC ने विधेयक को स्वीकार कर लिया तथा अंततः विधेयक लोकसभा में पारित हो गया।

वक्फ (संशोधन) विधेयक का विधायी इतिहास क्या है?

  • वक्फ की परिभाषा: वक्फ मुस्लिम विधि के अंतर्गत पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिये संपत्ति का स्थायी समर्पण है।
  • विधेयक का परिचय: वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024, 8 अगस्त, 2023 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया।
  • प्रस्तावित संशोधन: विधेयक ने वक्फ अधिनियम, 1995 (2013 में संशोधित) में लगभग 40 संशोधनों का सुझाव दिया, जो वक्फ प्रशासन के आधुनिकीकरण, मुकदमेबाजी को कम करने और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार पर केंद्रित थे।
  • JPC को प्रेषण: चर्चा एवं आलोचना के बाद, विधेयक को आगे की जाँच के लिये संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया, जिसने इसे कुछ संशोधनों के साथ स्वीकार कर लिया।
  • सरकार का स्पष्टीकरण: सरकार ने स्पष्ट किया कि संशोधनों का उद्देश्य मुस्लिम कल्याण के लिये वक्फ संपत्तियों का प्रभावी प्रबंधन और राजस्व का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है। इसने यह भी आश्वासन दिया कि उपयोगकर्त्ता द्वारा वक्फ के संबंध में प्रावधान प्रकृति में भावी है। 

  • अमित शाह का आश्वासन: गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया कि मुसलमानों के धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। 
  • विपक्ष की आलोचना: विपक्ष ने दावा किया कि विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन करता है तथा सरकार पर धर्म के आधार पर लोगों को विभाजित करने का आरोप लगाया। 
  • JPC के कार्यप्रणाली पर चिंता: डॉ. मोहम्मद जावेद सहित कुछ सदस्यों ने JPC प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि समिति ने 25 बार बैठक की, लेकिन विधेयक के खंड दर खंड पर चर्चा नहीं की। 
  • सीमित सार्वजनिक भागीदारी: डॉ. मोहम्मद जावेद और अरविंद गणपत सावंत ने आरोप लगाया कि हालाँकि 300 संगठनों और 3,000 व्यक्तियों को इनपुट देने के लिये आमंत्रित किया गया था, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को बोलने के लिये केवल 10 से 15 सेकंड का समय मिला।

विधेयक की कुछ प्रमुख आलोचनाएँ क्या हैं?

तथ्य 

प्रस्तावित बिल 

JPC की अनुशंसा 

सरकार की प्रतिक्रया

5 वर्षों तक इस्लाम का पालन करने का प्रमाण

केवल वह व्यक्ति जो कम से कम पाँच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो, वक्फ घोषित कर सकता है।

इसमें संशोधन करके इसमें "कोई भी व्यक्ति जो यह दर्शाता या प्रदर्शित करता है कि वह कम से कम 5 वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा है" को भी शामिल किया जाना चाहिये।

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उपयोगकर्त्ता द्वारा वक्फ

उपयोगकर्त्ता द्वारा वक्फ से संबंधित प्रावधान को निरसित कर दिया गया है।

इसमें एक प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि यह चूक भावी रूप से लागू होगी तथा केवल तभी लागू होगी जब संपत्ति विवादित न हो या सरकारी स्वामित्व वाली न हो।

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह संशोधन भावी है तथा विधेयक से पहले के उपयोगकर्त्ताओं द्वारा वक्फ पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सरकारी संपत्ति पर वक्फ का दोषपूर्ण दावा

धारा 3C के अनुसार, वक्फ के रूप में 'पहचानी गई' या 'घोषित' सरकारी संपत्ति वक्फ नहीं मानी जाएगी। विवादों का निर्णय कलेक्टर करेंगे।

'कलेक्टर' के स्थान पर 'नामित अधिकारी' रखना तथा राज्य सरकार को जाँच के लिये अधिकारी नियुक्त करने देना।

सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया और प्रावधान में संशोधन कर दिया, जिससे उच्च पदस्थ अधिकारी को इस प्रक्रिया को संभालने की अनुमति मिल गई।

गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना

केंद्रीय वक्फ परिषद, औकाफ बोर्ड और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव।

समावेशिता को बढ़ावा देने के लिये पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की अनुशंसा की गई है।

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वक्फ अधिकरण का गठन

अधिकरण का निर्णय अंतिम नहीं है; 2 वर्षों के अंदर अपील की जा सकती है।

उच्च न्यायालय में सीधे अपील करने का सुझाव दिया गया है, अधिकरण की संरचना को संशोधित कर तीन सदस्यों का कर दिया गया है, जिसमें से एक मुस्लिम विधियों का जानकार होगा। विवाद समाधान के लिये समयसीमा को हटाने की भी अनुशंसा की गई है।

सरकार ने अनुशंसा स्वीकार कर ली; बेहतर कार्यकुशलता के लिये अधिकरण में तीन सदस्य होंगे।