आज ही एडमिशन लें बिहार APO (प्रिलिम्स + मेन्स) कोर्स में और अपने सपनों को दे नई दिशा | ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में उपलब्ध | 12 जनवरी 2026  से कक्षाएँ आरंभ   |   एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / करेंट अफेयर्स

सिविल कानून

लंबित वाद के दौरान अंतरिती का समावेश

    «    »
 14-Jan-2026

अलका श्रीरंग चव्हाण और अन्य बनाम हेमचंद्र राजाराम भोंसले और अन्य 

"वाद की लंबितता के दौरान किया गया कोई भी अंतरण संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 52 के अंतर्गत आता है और मुकदमे के परिणाम के अधीन रहता है।" 

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुयान 

स्रोत: उच्चतम न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

अलका श्रीरंग चव्हाण और अन्य बनाम हेमचंद्र राजाराम भोंसले और अन्य (2026)के मामले में न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस निर्णय को बरकरार रखा जिसके द्वारा लंबित वाद के दौरान अंतरिती द्वारा दायर अपील को निरस्त कर दिया गया था। उक्त अपील में अंतरिती ने सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की आदेश 21 नियम 97 के अंतर्गत विनिर्दिष्ट पालन की डिक्री के निष्पादन के विरुद्ध उसके आक्षेपों को नामंजूर किये जाने को चुनौती दी थी। 

अलका श्रीरंग चव्हाण और अन्य बनाम हेमचंद्र राजाराम भोंसले और अन्य (2026) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • यह विवाद मूल विक्रेता और क्रेता के बीच 1973 में हुए विक्रय करार से जुड़ा है। 
  • विक्रेता के व्यतिक्रम के पश्चात्, प्रत्यर्थी संख्या 1-मूल क्रेता द्वारा 1986 मेंविनिर्दिष्ट पालन के लिये एक वाद दायर किया गया था। 
  • वाद की डिक्री वर्ष 1990 में मूल क्रेता के पक्ष में पारित की गई 
  • वाद के लंबित रहने के दौराननिर्णीतऋणी-विक्रेता ने संपत्ति के कुछ अंशों को पर-पक्षकार को बेच दिया। 
  • वर्तमान अपीलकर्त्ताओं ने बाद में उन पर-पक्षकारों से स्वामित्व प्राप्त किया जिन्होंने वाद लंबित रहते हुए संपत्ति क्रय की थी 
  • इसके परिणामस्वरूप डिक्री के निष्पादन में बार-बार अवरोध उत्पन्न हुआ 
  • निष्पादन की कार्यवाही 1991 में आरंभ हुई और न्यायालय द्वारा अधिकृत विक्रय विलेख 1993 में निष्पादित किया गया। 
  • तथापिपश्चात्वर्ती अंतरितीयों द्वारा कब्जे को रोक दिया गया था। 
  • 2019 मेंअपीलकर्त्ताओं ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 97 के अधीन एक आवेदन दाखिल करके कब्जे की सुपुर्दगी में बाधा डाली। 
  • उनके आक्षेपों को निष्पादन न्यायालयप्रथम अपीलीय न्यायालय और बॉम्बे उच्च न्यायालय ने नामंजूर कर दिया। 
  • इसके परिणामस्वरूप इन नामंजूरी को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की गई। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • न्यायालय ने यह माना कि किसी वाद की लंबितता के दौरान किया गया अंतरणसंपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 52के अंतर्गत आता है और वाद के परिणाम के अधीन रहता है। 
  • चूँकि अपीलकर्त्ता ने विनिर्दिष्ट पालन में वाद की लंबितता के दौरान संपत्ति क्रय की थीइसलिये क्रेता के पक्ष में दिया गया निर्णय प्रभावी हुआ। 
  • अपीलकर्त्ता के पाससंपत्ति पर कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं बचा थासाथ ही सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 102 के अधीन निहित विनिर्दिष्ट रोक के कारण वह डिक्री के निष्पादन का विरोध भी नहीं कर सकता था। 
  • न्यायालय ने पाया कि संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम की धारा 52 में निहित मुकदमे की लंबितता का सिद्धांतपूरी तरह से लागू होता है। 
  • सभी न्यायालयों ने इस तथ्य की स्पष्ट पुष्टि की है कि अपीलकर्त्ताओं को वाद की लंबितता की पूरी जानकारी थी। 
  • न्यायालय ने कहा कि जागरूकता भी आवश्यक नहीं हैक्योंकि न्यायनिर्णय का दायरा इस बात तक सीमित है कि आपत्तिकर्ता लंबित वाद अंतरिती है या नहीं। 
  • यदि निर्णय सकारात्मक आता हैतो ऐसे अंतरिती कोनिष्पादन का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है। 
  • न्यायालय ने इस बात की पुष्टि की कि चूँकि अपीलकर्त्ताओं द्वारा वाद की लंबितता के दौरान संपत्ति क्रय की गई थीऔर मूल क्रेता के पक्ष में डिक्री पारित की गई थीइसलिये वे डिक्री के निष्पादन का विरोध करने के हकदार नहीं होंगे। 
  • न्यायालय ने टिप्पणी की कि चूँकि प्रत्यर्थी संख्या के पक्ष में डिक्री और अंतरण अंतिम रूप ले चुके हैंइसलिये लंबित वाद के अंतरिती को रास्ता देना होगा और वाद संपत्ति का वास्तविक भौतिक कब्जा प्रत्यर्थी संख्या को सौंपना होगा। 
  • उच्च न्यायालय ने यह माना था कि यदि पश्चात्वर्ती अंतरिती को वाद दायर करने से पहले संबंधित संपत्ति के संबंध में अधिकारस्वामित्व और हित प्राप्त हो जाता हैतो लाला दुर्गा प्रसाद मामले में निर्धारित विधि लागू होगी 
  • चूँकि वर्तमान मामले में अंतरण लंबित वाद के दौरान किया गया हैंइसलिये ऐसे संव्यवहार संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 52 के अंतर्गत आते हैं और इसलियेलाला दुर्गा प्रसाद मामले में निर्धारित विधि लागू नहीं होगी 
  • तदनुसारअपील खारिज कर दी गई। 

लंबित वाद अंतरिती (Transferee Pendente Lit) क्या है? 

  • लंबित वाद अंतरिती वह व्यक्ति होता है जो किसी संपत्ति से संबंधित वाद के लंबित रहने के दौरान उस संपत्ति को प्राप्त करता है। 
  • "pendente lite" शब्द का अर्थ है "वाद के लंबित रहने के दौरान"। 
  • इस प्रकार के अंतरण संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 52 द्वारा शासित होते हैंजिसमें वाद की लंबितता का सिद्धांत निहित है। 
  • इस सिद्धांत के अनुसारकिसी वाद के लंबित रहने के दौरान संपत्ति का कोई भी अंतरण उस वाद में पारित अंतिम डिक्री के अधीन होता है। 
  • लंबित वाद अंतरिती संपत्ति को उन सभी अधिकार और दायित्त्वों के अधीन प्राप्त करता हैजैसा कि लंबित वाद में अंततः निर्धारित किया जाए।    

सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 97 क्या है?             

सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 97 - कब्जे प्राप्ति में प्रतिरोध या बाधा: 

  • आदेश 21 नियम 97 में उस स्थिति में उपचार का उपबंध है जब किसी डिक्री के अधीन स्थावर संपत्ति का कब्जा प्राप्त करने में प्रतिरोध या अवरोध उत्पन्न किया जाता है 
  • उपनियम (1) डिक्री के धारक या क्रेता को न्यायालय में आवेदन दाखिल करने की अनुमति देता है यदि कोई व्यक्ति उन्हें स्थावर संपत्ति का कब्जा प्राप्त करने में प्रतिरोध करता है या बाधा डालता है। 
  • यह आवेदन स्थावर संपत्ति पर कब्जे के लिये डिक्रीदार या डिक्री के निष्पादन में बेची गई ऐसी संपत्ति के क्रेता द्वारा दायर किया जा सकता है। 
  • जब किसी व्यक्ति द्वारा कब्जा प्राप्त करने में वास्तविक प्रतिरोध या बाधा उत्पन्न होती हैतो यह उपचार उपलब्ध होता है। 
  • उपनियम (2) में यह अनिवार्य है कि ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर न्यायालय नियम में निहित उपबंधों के अधीन उसका अवधारण करेगा। 
  • यह उपबंध डिक्रीदार को डिक्री द्वारा प्रदत्त संपत्ति पर कब्जा लेने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिये न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग करने में सक्षम बनाता है। 
  • इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाद में सफल पक्षकार अपनी डिक्री का प्रभावी रूप से प्रवर्तन कर सके तथा संपत्ति का वास्तविक भौतिक कब्जा प्राप्त कर सके