9 मार्च से शुरू हो रहे हमारे ऑल-इन-वन ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स के साथ अपनी ज्यूडिशियरी की तैयारी को मजबूत बनाएं | यह कोर्स अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों माध्यमों में उपलब्ध है।   |   आज ही हमारे ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन लें और अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएँ | हिंदी माध्यम बैच: 9 मार्च, सुबह 8 बजे   |   आज ही एडमिशन लें बिहार APO (प्रिलिम्स + मेन्स) कोर्स में और अपने सपनों को दे नई दिशा | ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में उपलब्ध | 12 जनवरी 2026  से कक्षाएँ आरंभ   |   एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / एडिटोरियल

वाणिज्यिक विधि

आवश्यक वस्तु अधिनियम और भारत का प्राकृतिक गैस संकट

    «
 13-Mar-2026

स्रोत:द हिंदू 

परिचय 

केंद्र सरकार नेआवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गतप्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 जारी किया। 

  • उद्देश्य:वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के बीच प्राकृतिक गैस के उत्पादनआपूर्ति और वितरण को विनियमित करना। 
  • ये व्यवधान अमेरिका-इजराइल गठबंधन और ईरान के बीच चल रहे पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न हुए हैं। 
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा मार्च, 2026 को इस आदेश की अधिसूचना जारी की गई थी। 
  • इस संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से LNG शिपमेंट को प्रभावित किया हैजिसके चलते आपूर्तिकर्ताओं ने अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ दिया है। 

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 क्या है? 

  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को महत्त्वपूर्ण वस्तुओं के उत्पादनआपूर्तिवितरण और व्यापार को विनियमित करने की अनुमति देता है जिससे उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और जमाखोरी या कीमतों में अचानक वृद्धि को रोका जा सके। 
  • यह विधि युद्धप्राकृतिक आपदाओं या कीमतों में तीव्र वृद्धि के दौरान स्टॉक सीमा अधिरोपित करनेआपूर्ति निर्देशित करने या वितरण को नियंत्रित करने की शक्तियां प्रदान करता है। 
  • इसकी उत्पत्ति द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत रक्षा अधिनियम के अधीन 1939 में हुई थीवर्तमान अधिनियम 1955 में लागू हुआ। 
  • एसोसिएशन ऑफ नेचुरल गैस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामलेमें उच्चतम न्यायालय के निर्णय मेंकहा गया कि प्राकृतिक गैस और LNG पेट्रोलियम उत्पादों के दायरे में आते हैंजिससे अधिनियम के अधीन विनियमन संभव हो पाता है। 

किस कारण से यह आदेश जारी किया गया? 

  • होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा पारगमन मार्ग है। 
  • क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण LNG की आपूर्ति बाधित हुई हैभारत के LNG आयात का लगभग एक तिहाई हिस्सा प्रभावित हुआ है। 
  • आपूर्तिकर्ताओं ने अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देते हुए भारतीय खरीदारों को की जाने वाली आपूर्ति को कम करना शुरू कर दिया। 
  • केंद्र सरकार ने उपलब्ध गैस को अर्थव्यवस्था के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजने का निदेश देकर जवाब दिया। 

चार-स्तरीय प्राथमिकता ढाँचा 

  • प्राथमिकता क्षेत्र I — ​​घरेलू पाइपलाइन से आने वाली प्राकृतिक गैसपरिवहन के लिये CNG, LPG उत्पादन और पाइपलाइन कंप्रेसर ईंधन; पिछले छह महीनों की औसत खपत के100% पर बनाए रखा जाना है। 
  • प्राथमिकता क्षेत्र II — उर्वरक संयंत्रऔसत खपत का 70%प्राप्त करना ; इकाइयों को पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ को अनुपालन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। 
  • प्राथमिकता क्षेत्र III — राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े चाय उद्योग और विनिर्माण उपभोक्ताइन्हेंऔसत खपत का80% प्राप्त होगा। 
  • प्राथमिकता क्षेत्र IV — शहरी गैस वितरण नेटवर्क के अंतर्गत औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताइन्हेंऔसत खपत का80% प्राप्त होगा। 
  • प्राथमिकता के आधार पर आवंटन के लिये धन जुटाने के लियेपरिचालन व्यवहार्यता के अधीनतेल रिफाइनरियोंको गैस की आपूर्ति कोपिछले छह महीनों के औसत के लगभग65%तक कम कर दिया जाएगा । 

गैस संचय तंत्र 

  • गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित की जाने वाली गैस के लिये एक संयुक्त मूल्य निर्धारित किया जाएगा। 
  • प्राप्तकर्ता संस्थाओं को संयुक्त मूल्य स्वीकार करना होगा और वे मुकदमेबाजी के माध्यम से अप्रत्याशित घटना से प्रतिरक्षा के लिये दी गई आपूर्तियों को चुनौती नहीं दे सकतीं। 
  • यह आदेश मौजूदा गैस बिक्री करारों और अन्य वाणिज्यिक व्यवस्थाओं को रद्द करता है। 
  • जिन संस्थाओं को तत्काल अनुपालन करने का निदेश दिया गया है उनमें शामिल हैं: ONGC, रिलायंस इंडस्ट्रीजऑयल इंडिया लिमिटेडवेदांतागैस विपणनकर्ता, LNG टर्मिनल संचालक और शहरी गैस वितरक। 
  • प्राप्तकर्ता संस्थाओं द्वारा डायवर्ट की गई गैस का पुनर्विक्रयसख्त वर्जित है। 

LPG के लिये अतिरिक्त उपाय 

  • सभी सार्वजनिक और निजी शोधकों को निदेश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन के सभी उत्पादन को विशेष रूप से LPG उत्पादन की ओर निर्देशित करें। 
  • इस निदेश के अधीन उत्पादित LPG की आपूर्ति केवल तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों - इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL को ही की जानी चाहिये 
  • जमाखोरी रोकने के लिये LPG की बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतराल अधिरोपित किया गया है। 
  • आयातित LPG को आवश्यक गैर-घरेलू क्षेत्रों के लिये प्राथमिकता दी जाएगी। 

निष्कर्ष 

आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) का आह्वान यह संकेत देता है कि भू-राजनीतिक आपात स्थितियों के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सामान्य बाजार व्यवस्थाओं से अधिक महत्त्वपूर्ण है। यह आदेश वाणिज्यिक संविदाओं को दरकिनार करते हुए राष्ट्रीय हित में एक कठोर प्राथमिकता क्रम अधिरोपित करता है। भारत की प्राकृतिक गैस की खपत 2023-24 में 187 मिलियन सेमी प्रति दिन से बढ़कर 2030 तक 297 मिलियन सेमी प्रति दिन होने का अनुमान हैजिससे आपूर्ति में अचानक आई कमी एक दीर्घकालिक चिंता का विषय बन जाती है। यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर निर्भरता कम करने के लिये घरेलू उत्पादन में तेजी लाने और आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।