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आपराधिक कानून

शराब पीकर गाड़ी चलाने का सबूत देने के लिये धारा 185, मोटर यान अधिनियम की सीमा को वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया जाना चाहिये

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 13-Jul-2026

अमर सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य 

"...यद्यपि चिकित्सा परीक्षा में याचिकाकर्त्ता की सांस में शराब की गंध दर्ज की गई हैलेकिन यह साबित करने के लिये कोई रक्त नमूना या कोई अन्य वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया गया कि शराब की सांद्रता मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 के अधीन विहित सांविधिक सीमा से अधिक थी।" 

न्यायमूर्ति आलोक महरा 

स्रोत: उत्तराखंड उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आलोक महरा नेअमर सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य (2026) के मामले में, आरोप विरचित करने के आदेश के विरुद्ध एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि केवल शराब की गंधबिना रक्त परीक्षण या ब्रेथलाइज़र रिपोर्ट केजो यह पुष्टि करती हो कि शराब की सांद्रता मोटर यान अधिनियम, 1988 के अधीन सांविधिक सीमा से अधिक हैनशे में गाड़ी चलाने को साबित नहीं कर सकती या भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 105 के अधीन आरोप को बरकरार नहीं रख सकती। 

अमर सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • पुनरीक्षणकर्ता श्री बद्रीनाथ जी से चमोली की ओर एक जीप चला रहा था। आरोप है कि वाहन पर से उसका नियंत्रण समाप्त हो जाने के कारण जीप दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गईजिससे अनेक यात्रियों को चोटें आईं तथा एक यात्री की मृत्यु हो गई 
  • दुर्घटना के बाद किये गए चिकित्सा परीक्षण के दौरानडॉक्टरों ने पीड़ित की सांस में शराब की गंध महसूस की। 
  • उसके रक्त में अल्कोहल की वास्तविक मात्रा अवधारित करने के लिये न तो ब्रेथलाइज़र परीक्षण किया गया और न ही रक्त परीक्षण। 
  • सेशन न्यायाधीश ने याचिकाकर्त्ता के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 105, 125(), 125(ख) और 281 के अधीन आरोप विरचित कियेजिसे याचिकाकर्त्ता ने आपराधिक पुनरीक्षण के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी। 
  • पुनरीक्षणवादी ने तर्क दिया कि मोटर यान अधिनियम की धारा 185 के अधीनकिसी व्यक्ति को शराब के प्रभाव में गाड़ी चलाने वाला तभी कहा जा सकता है जब रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर से अधिक होजैसा कि सांस विश्लेषक या अन्य निर्धारित वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से स्थापित किया गया हो। 
  • इसके अतिरिक्त यह तर्क दिया गया कि दुर्घटना वाहन के आगे के टायर के फटने के कारण हुई थीन कि उपेक्षापूर्णया नशे में गाड़ी चलाने के कारण। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • दुर्घटना के कारण के संबंध में:न्यायालय ने कहा कि तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट में दुर्घटना का कारण बाएं सामने वाले टायर का फटना बताया गया हैऔर प्रत्यक्षदर्शियों के कथनों से यह संकेत नहीं मिलता कि याचिकाकर्त्ता उपेक्षापूर्ण रूप सेगैरजिम्मेदाराना तरीके से या शराब के प्रभाव में गाड़ी चला रहा था। 
  • नशे के वैज्ञानिक प्रमाण के अभाव में:न्यायालय ने पाया कि यद्यपि चिकित्सा परीक्षा में शराब की गंध दर्ज की गई थीलेकिन यह स्थापित करने के लिये कोई वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया गया था कि शराब की सांद्रता मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 के अधीन सांविधिक सीमा से अधिक थी। 
  • भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के अधीन आरोप पर:यह मानते हुए कि अन्वेषण के दौरान एकत्र की गई सामग्री से प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के अधीन आरोप विरचित करने के लिये आवश्यक तत्त्व प्रकट नहीं होते हैंन्यायालय ने उस उपबंध के अधीन आरोप को अपास्त कर दिया। 
  • शेष आरोपों पर:न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 125(), 125(ख) और 281 के अधीन आरोप यथावत बने रहेंगे। 

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 क्या है? 

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 – किसी मत्त व्यक्ति द्वारा मादक द्रव्यों में होते हुए किसी व्यक्ति द्वारा मोटर यान चलाना: 

  • किसी व्यक्ति को शराब के प्रभाव में गाड़ी चलाने वाला तब माना जाता हैजब गाड़ी चलाते समय या गाड़ी चलाने का प्रयास करते समयसांस विश्लेषक या अन्य निर्धारित परीक्षण द्वारा पता लगाए गए रक्त में अल्कोहल की सांद्रता 30 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर रक्त से अधिक हो। 
  • यदि वाहन चलाते समय कोई व्यक्ति किसी दवा (चाहे वह चिकित्सकीय रूप से निर्धारित हो या नहीं) के प्रभाव में इस हद तक हो कि वह यान पर उचित नियंत्रण रखने में असमर्थ होतो उसे भी मत्तता की हालत में वाहन चलाने वाला माना जाएगा। 
  • प्रथम बार दोषसिद्ध पाए जाने पर दण्ड छह महीने तक का कारावास या दस हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। 
  • पश्चात्वर्ती अपराध के तीन वर्ष के भीतर दूसरी या उसके बाद के दण्ड परदो वर्ष तक का कारावास या पंद्रह हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।