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आपराधिक कानून
परिसीमा काल का प्रारंभ उस तिथि से होगा जब अपराधी की पहचान ज्ञात हो जाती है
« »27-Feb-2026
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केरल राज्य बनाम मेसर्स पैनासिया बायोटेक लिमिटेड और अन्य "आपराधिक अभियोगों में परिसीमा काल उस तारीख से प्रारंभ होता है जब सभी अभियुक्त व्यक्तियों की पहचान सक्षम प्राधिकारी को ज्ञात हो जाती है, न कि प्रथम परिवाद की तारीख से।" न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और एस.वी.एन. भट्टी |
स्रोत: उच्चतम न्यायालय
चर्चा में क्यों?
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने केरल राज्य बनाम मेसर्स पैनासिया बायोटेक लिमिटेड और अन्य (2026) के मामले में यह निर्णय दिया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 469 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 515) के अधीन परिसीमा काल उस तारीख से प्रारंभ होता है जिस दिन सक्षम प्राधिकारी को अपराधी की पहचान प्रथम बार ज्ञात होती है - न कि प्रारंभिक परिवाद की तारीख से या अपराध के पहले संकेत की तारीख से।
- न्यायालय ने औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अधीन आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने वाले केरल उच्च न्यायालय के आदेश को अपास्त कर दिया।
केरल राज्य बनाम मेसर्स पैनासिया बायोटेक लिमिटेड (2026) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- जनवरी 2006 में, पैनासिया बायोटेक लिमिटेड द्वारा निर्मित एक टीके के लेबलिंग में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक परिवाद प्राप्त हुआ था।
- ड्रग्स इंस्पेक्टर ने कथित अपराध में सम्मिलित सभी व्यक्तियों की पहचान करने के लिये आपूर्ति श्रृंखला में जांच प्रारंभ की।
- यह अन्वेषण 18 अप्रैल, 2006 को पूर्ण हुआ, जिस तारीख को ड्रग्स इंस्पेक्टर को सभी अभियुक्तों की पहचान प्रथम बार पता चली।
- 20 जनवरी, 2009 को मजिस्ट्रेट के समक्ष एक औपचारिक परिवाद दर्ज किया गया, जिसके बाद संज्ञान लिया गया और 29 जनवरी, 2009 को समन जारी किये गए।
- केरल उच्च न्यायालय ने दो आधारों पर आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी: (i) कि परिवाद परिसीमा काल द्वारा वर्जित था, और (ii) कि मजिस्ट्रेट अपनी अधिकारिता से बाहर रहने वाले अभियुक्त व्यक्तियों को समन जारी करने से पहले धारा 202 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन जांच करने में असफल रहा था।
- केरल राज्य ने उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
- निर्णय लिखने वाले न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक परिवाद की तारीख या अपराध के प्रथम संकेत की तारीख से परिसीमा अवधि की गणना करने में त्रुटी की है।
- न्यायालय ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 469(1)(ग) पर विश्वास किया, जिसमें यह उपबंध है कि परिसीमा काल उस तारीख से प्रारंभ होता है जिस दिन अपराधी की पहचान पीड़ित व्यक्ति या सक्षम प्राधिकारी को ज्ञात होती है।
- न्यायालय ने पाया कि वितरण श्रृंखला का अन्वेषण पूर्ण होने के बाद ही 18 अप्रैल, 2006 को ड्रग्स इंस्पेक्टर को सभी अभियुक्तों की पहचान का पता चला।
- चूँकि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 27(घ) के अधीन अधिकतम दण्ड दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 468(2)(ग) के अधीन तीन वर्ष की परिसीमा काल को आकर्षित करती है, इसलिये परिसीमा काल केवल 17 अप्रैल, 2009 को समाप्त होगा।
- अतः 20 जनवरी, 2009 को दायर किये गए औपचारिक परिवाद को परिसीमा काल के भीतर माना गया, भले ही 18 अप्रैल, 2006 और 20 जनवरी, 2009 के बीच अत्यधिक विलंब हुआ हो।
- न्यायालय ने चेतावनी दी कि प्रारंभिक परिवाद की तारीख से परिसीमा को जोड़ना धारा 469(1)(ग) दण्ड प्रक्रिया संहिता के उद्देश्य को असफल कर देगा, जो विशेष रूप से नियामक और आर्थिक अपराधों के लिये है जहाँ अपराधी की पहचान केवल अन्वेषण के बाद ही सामने आ सकती है।
- धारा 202 दण्ड प्रक्रिया संहिता के विवाद्यक पर, न्यायालय ने माना कि लोक सेवकों द्वारा - आधिकारिक कर्त्तव्यों के निर्वहन में कार्य करते हुए - दायर किये गए परिवादों का एक अलग आधार हैं और उन्हें धारा 200 दण्ड प्रक्रिया संहिता के साथ पढ़ा जाना चाहिये, जो लोक सेवकों को संज्ञान के प्रक्रम में शपथ पर परीक्षा से छूट देती है।
- तदनुसार, अपील मंजूर कर ली गई और कार्यवाही को रद्द करने का उच्च न्यायालय का आदेश अपास्त कर दिया गया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 515 क्या है?
बारे में:
- यह धारा आपराधिक अभियोगों में परिसीमा काल के प्रारंभ से संबंधित है। पहले यह दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 469 के अंतर्गत आती थी।
- साधारण नियम के अनुसार, परिसीमा काल अपराध की तारीख से प्रारंभ होता है।
- जहाँ अपराध पीड़ित व्यक्ति या किसी पुलिस अधिकारी को ज्ञात नहीं था, वहाँ काल उस दिन से प्रारंभ होता है जिस दिन अपराध की जानकारी उन्हें प्राप्त होती है, इन दोनों में से जो भी पहले हो।
- जहाँ अपराधी की पहचान ज्ञात नहीं है, वहाँ यह काल उस दिन से प्रारंभ होता है जब अपराधी की पहचान पीड़ित व्यक्ति या अन्वेषण कर रहे पुलिस अधिकारी, दोनों में से जो भी पहले हो, को ज्ञात हो जाती है।
- परिसीमा काल की संगणना करते समय, जिस दिन से काल की संगणना की जानी है, उस दिन को सम्मिलित नहीं किया जाता है।
औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 क्या है?
- यह अधिनियम भारत में औषधियों और प्रसाधन सामग्रियों के आयात, निर्माण, वितरण तथा विक्रय को विनियमित करने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।
- इसने पूर्ववर्ती खतरनाक औषधि अधिनियम का स्थान लिया और इसका उद्देश्य जनता के लिये उपलब्ध औषधियों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।
- इस अधिनियम का प्रशासन एवं प्रवर्तन केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
- अधिनियम को विभिन्न अध्यायों में विभाजित किया गया है, जिनमें औषधियों, प्रसाधनों तथा आयुर्वेदिक, सिद्ध, एवं यूनानी औषधियों से संबंधित प्रावधान पृथक्- पृथक् रूप से विनियमित किये गए हैं।
- यह 1945 के औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम द्वारा समर्थित है, जो विस्तृत
प्रक्रियात्मक और तकनीकी आवश्यकताओं का प्रावधान करते हैं।
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