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सिविल कानून
कॉर्पोरेट की सामाजिक उत्तरदायित्त्व
«22-Apr-2026
परिचय
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व के लिये एक अनिवार्य ढाँचा स्थापित करती है, जिसके अधीन योग्य कंपनियों को अपने मुनाफे का एक भाग अनुसूची 7 के अधीन निर्दिष्ट सामाजिक रूप से लाभकारी क्रियाकलापों की ओर निर्देशित करना आवश्यक है।
- यह उपबंध उन सभी कंपनियों पर लागू होता है जिनकी कुल संपत्ति पाँच सौ करोड़ रुपए या उससे अधिक है, या जिनका कारोबार एक हजार करोड़ रुपए या उससे अधिक है, या जिनका पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान शुद्ध लाभ पाँच करोड़ रुपए या उससे अधिक रहा है।
- कंपनी अधिनियम के अधीन कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व एक स्वैच्छिक पहल नहीं अपितु दण्डात्मक परिणामों द्वारा समर्थित एक सांविधिक दायित्त्व है, जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक बनाता है जिन्होंने अनिवार्य कॉर्पोरेट सामाजिक व्यय के लिये विधि बनाई है।
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति का गठन (धारा 135(1) और (2))
- विहित सीमा को पूरा करने वाली प्रत्येक कंपनी को बोर्ड की एक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समिति का गठन करना होगा, जिसमें तीन या अधिक निदेशक शामिल होंगे, जिनमें से कम से कम एक स्वतंत्र निदेशक होना चाहिये।
- यद्यपि, जहाँ किसी कंपनी को धारा 149(4) के अधीन स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है, वहाँ उसकी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति में स्वतंत्र निदेशक की आवश्यकता के बिना दो या दो से अधिक निदेशक हो सकते हैं।
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति की संरचना का प्रकटन धारा 134(3) के अधीन तैयार की गई बोर्ड की रिपोर्ट में किया जाना चाहिये।
- जहां किसी वित्तीय वर्ष में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व व्यय दायित्त्व पचास लाख रुपए से अधिक नहीं होता है, वहाँ कंपनी को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति गठित करने की आवश्यकता नहीं होती है, और ऐसे मामलों में ऐसी समिति के कार्यों का निर्वहन सीधे निदेशक मंडल द्वारा किया जाएगा।
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति के कार्य (धारा 135(3))
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति को तीन मुख्य कार्य सौंपे गए हैं:
- नीति का निर्माण — इसे अनुसूची 7 में निर्दिष्ट क्षेत्रों या विषयों में किये जाने वाले क्रियाकलापों को दर्शाते हुए एक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व नीति तैयार करनी होगी और बोर्ड को उसकी सिफारिश करनी होगी।
- व्यय की सिफ़ारिश — इसमें ऐसे क्रियाकलापों पर किये जाने वाले व्यय की राशि की सिफ़ारिश करनी होगी।
- निगरानी — इसे समय-समय पर कंपनी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व नीति की निगरानी करनी चाहिये।
बोर्ड की भूमिका (धारा 135(4) और (5))
- प्रत्येक योग्य कंपनी के बोर्ड को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व नीति को अनुमोदित करना होगा और इसकी सामग्री को बोर्ड की रिपोर्ट में प्रकाशित करना होगा। नीति को कंपनी की वेबसाइट पर विहित रीति से भी प्रकाशित करना होगा।
- बोर्ड को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में, कंपनी अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व नीति के अनुपालन में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत खर्च करे । यदि किसी कंपनी ने निगमन के बाद से तीन वित्तीय वर्ष पूरे नहीं किये हैं, तो उपलब्ध पिछले वित्तीय वर्षों के लिये औसत की गणना की जाएगी।
- कंपनी को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व व्यय आवंटित करते समय स्थानीय क्षेत्रों और अपने परिचालन स्थल के आसपास के क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिये।
- इस धारा के प्रयोजनों के लिये, "शुद्ध लाभ" में ऐसी राशियाँ शामिल नहीं होंगी जो निर्धारित की जा सकती हैं, और इसकी गणना अधिनियम की धारा 198 के अनुसार की जाएगी।
अव्ययित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व राशि और आगे ले जाने योग्य राशि (धारा 135(5) और (6))
जहाँ कोई कंपनी किसी वित्तीय वर्ष में अपेक्षित राशि खर्च करने में विफल रहती है, तो बोर्ड को धारा 134(3)(ण) के अधीन अपनी रिपोर्ट में खर्च न करने के कारणों को निर्दिष्ट करना होगा।
- यदि अप्रयुक्त राशि किसी चालू परियोजना से संबंधित नहीं है , तो उसे वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह महीने के भीतर अनुसूची 7 में निर्दिष्ट निधि में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिये।
- यदि अप्रयुक्त राशि किसी चालू परियोजना से संबंधित है, तो कंपनी को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से तीस दिनों के भीतर ऐसी राशि को किसी भी अनुसूचित बैंक में खोले गए अप्रयुक्त कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व खाते नामक विशेष खाते में स्थानांतरित करना होगा। इस राशि को स्थानांतरण की तिथि से तीन वित्तीय वर्षों के भीतर खर्च किया जाना चाहिये; अन्यथा, इसे तीसरे वित्तीय वर्ष की समाप्ति से तीस दिनों के भीतर अनुसूची 7 निधि में स्थानांतरित करना होगा।
यदि कोई कंपनी निर्धारित आवश्यकता से अधिक राशि खर्च करती है, तो ऐसी अतिरिक्त राशि को आगामी वित्तीय वर्षों के लिये कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व खर्च दायित्त्व के विरुद्ध निर्धारित तरीके से समायोजित किया जा सकता है।
अनुपालन न करने पर शास्ति (धारा 135(7))
यदि कोई कंपनी उपधारा (5) या (6) के अधीन दायित्त्वों का पालन करने में व्यतिक्रम करती है:
- कंपनी पर अनुसूची 7 निधि या अप्रयुक्त कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व खाते में हस्तांतरित की जाने वाली राशि का दोगुना या एक करोड़ रुपए, जो भी कम हो, का जुर्माना लगाया जाएगा।
- दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक अधिकारी पर हस्तांतरित की जाने वाली राशि का दसवां हिस्सा या दो लाख रुपए, इनमें से जो भी कम हो, उतना जुर्माना लगाया जाएगा ।
निष्कर्ष
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्त्व (CSR) को परोपकारी विवेकाधिकार से एक बाध्यकारी विधिक दायित्त्व में परिवर्तित करती है, जिसे एक संरचित समिति तंत्र, अनिवार्य प्रकटीकरण मानदंडों और स्तरीय शास्ति व्यवस्था द्वारा सुदृढ़ किया गया है। अप्रयुक्त राशि और चल रही परियोजनाओं से संबंधित प्रावधान यह सुनिश्चित करते हैं कि कॉर्पोरेट सामाजिक व्यय उद्देश्यपूर्ण, जवाबदेह और अनुसूची 7 में सूचीबद्ध कल्याणकारी क्रियाकलापों की ओर निर्देशित हो।