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सांविधानिक विधि

अनुकंपा नियुक्ति एक विरासत योग्य संपत्ति नहीं है

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 06-May-2026

रितेशवान बनाम मध्य प्रदेश राज्य 

"अनुकंपा नियुक्ति कोई पैतृक संपत्ति या उत्तराधिकार द्वारा अंतरित होने वाला अधिकार नहीं हैयह नियोक्ता द्वारा शोक संतप्त परिवार को अचानक आर्थिक तंगी से बचाने के लिये दी जाने वाली एक रियायत है। इसलियेअनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर कार्रवाई के लिये उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पर बल देना मनमाना और विधि के अधिकार के विरुद्ध है।" 

न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई 

स्रोत: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की एक एकल पीठजिसमें न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई शामिल थेनेरितेशवान बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2026) के मामलेमेंएक मृतक सरकारी कर्मचारी के पुत्र रितेशवान द्वारा दायर रिट याचिका को मंजूर कर लिया और अनुकंपा नियुक्ति आवेदन को संसाधित करने के लिये उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की राज्य की आवश्यकता को रद्द कर दिया। 

  • न्यायालय ने निर्णय दिया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई वंशानुगत संपत्ति या उत्तराधिकार द्वारा अंतरित होने वाला अधिकार नहीं हैऔर इस उद्देश्य के लिये उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की मांग करना मनमाना और विधि के अधिकार के विरुद्ध है। न्यायालय ने आगे कहा कि पात्रता का अवधारण कठोरता से लागू नीति के अनुसार किया जाना चाहियेजिसके अधीन विवाहित पुत्र को पुत्री पर स्पष्ट वरीयता प्राप्त है। 

रितेशवान बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • यह विवाद रमेशवान गोस्वामी की मृत्यु के बाद उत्पन्न हुआजिन्हें सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के कार्यालय में ड्राइवर के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी मृत्यु के बादउनके दो बच्चों – पुत्र रितेश्वर और पुत्री अनीता - ने पृथक् अनुकंपा नियुक्ति के लिये आवेदन किया। 
  • रितेशवान ने दिसंबर 2021 में अपना आवेदन दाखिल कियाजिसके बाद अनीता ने भी आवेदन किया। 
  • एक ही मृतक कर्मचारी के दो आश्रितों के बीच प्रतिद्वंद्वी दावों का सामना करते हुएराज्य ने दोनों पक्षकारों को नियुक्ति के लिये पात्रता अवधारित करने हेतु उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का निदेश दिया। 
  • इस निदेश से असंतुष्ट होकररितेशवान ने उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता को विधिक रूप से अस्थिर बताते हुएरिट याचिका के माध्यम से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • अनुकंपा नियुक्ति की प्रकृति पर:न्यायालय ने माना कि अनुकंपा नियुक्ति कोई संपत्ति अधिकार या उत्तराधिकार में मिलने वाली संपत्ति नहीं है जो मृतक के वारिसों में अंतरित हो सके। अपितुयह नियोक्ता द्वारा दी गई एक रियायत है जिसका विशिष्ट और सीमित उद्देश्य मृतक के परिवार को उसके मुखिया की मृत्यु के बाद अचानक वित्तीय संकट से बचाना है। 
  • उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की मांग पर:न्यायालय ने माना कि चूँकि अनुकंपा नियुक्ति को विरासत में मिलने वाली संपत्ति का दर्जा प्राप्त नहीं हैइसलिये राज्य के पास आवेदन की प्रक्रिया के लिये उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की मांग करने का कोई विधिक आधार नहीं है। ऐसी मांग मनमानी और विधि के अधिकार के बिना मानी गई। 
  • अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य पर:न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार को तत्काल अनुतोष प्रदान करना है। इसका उद्देश्य उत्तराधिकारियों के बीच उत्तराधिकार के दावों का निपटारा करना नहीं हैऔर इसे ऐसा नहीं माना जा सकता। 
  • पात्रता अवधारण पर:न्यायालय ने माना कि अनुकंपा नियुक्ति के लिये पात्रता का अवधारण लागू नीति के अनुसार ही किया जाना चाहिये - इस मामले में, 2014 की योजना के अनुसार। 2014 की योजना के अधीनपात्र आश्रितों का क्रम इस प्रकार है: जीवित पति/पत्नीपुत्र या अविवाहित पुत्रीविधवा या तलाकशुदा पुत्री या बहूऔर विवाहित पुत्री। 
  • वर्तमान मामले के गुण-दोष परन्यायालय ने 2014 की योजना को लागू करते हुए पाया कि अनीता विवाहित पुत्री थींजिससे वे विहित क्रम के अनुसार पात्र आश्रितों की सबसे निचली श्रेणी में आती थीं। मृतक के पुत्र होने के नाते रितेशवान उच्च श्रेणी में आते थे। न्यायालय ने तदनुसार यह माना कि पुत्र को सांविधिक प्राथमिकता प्राप्त है और उनका दावा विवाहित पुत्री के दावे से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है। उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया और अधिकारियों को रितेशवान के आवेदन पर पुनर्विचार करने का निदेश दिया गया। 

अनुकंपा नियुक्ति क्या होती है?  

  • अनुकंपा नियुक्ति एक ऐसा प्रावधान है जो सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाने या चिकित्सीय कारणों से सेवानिवृत्त होने पर उसके परिवार के सदस्यों (सामान्यत: पति/पत्नीपुत्र या पुत्री) को सरकारी सेवा में नौकरी देने की अनुमति देता है। 
  • यह शोक संतप्त परिवार को कमाने वाले सदस्य की मृत्यु से उत्पन्न वित्तीय संकट से निपटने में सहायता करने के लिये किया जाता है। 

अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित सिद्धांत क्या हैं? 

अनुकंपा नियुक्ति के लिये उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित 26 सिद्धांत निम्नलिखित हैं: 

  • अनुकंपा के आधार पर की गई नियुक्तियाँ लोक नियोजन में समता के नियमों का अपवाद हैं। 
  • उचित नियमों या निर्देशों के बिना ऐसी नियुक्तियाँ नहीं की जा सकतीं। 
  • ये नियुक्तियाँ सामान्यत: दो स्थितियों में दी जाती हैं: परिवार के कमाने वाले की मृत्यु या सेवा के दौरान उनकी चिकित्सकीय अक्षमता। 
  • अचानक वित्तीय संकट से जूझ रहे परिवारों की सहायता के लिये ये नियुक्तियाँ तत्काल की जानी चाहिये 
  • मानवीय आधार पर की जाने वाली नियुक्तियों के नियमों का कठोरता से निर्वचन किया जाना चाहिये क्योंकि वे अप्रत्यक्ष रूप से प्रवेश की अनुमति देते हैं। 
  • यह एक रियायत हैअधिकार नहींऔर सभी आवेदकों को निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा। 
  • कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की नियुक्तियों को विरासत के रूप में दावा नहीं कर सकता है। 
  • वंश के आधार पर नियुक्ति सांविधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध है और इसे कठोरता से इसके इच्छित उद्देश्य तक ही सीमित रखा जाना चाहिये 
  • ये नियुक्तियाँ कोई जन्मजात अधिकार नहीं हैं और इनके लिये परिवार की आर्थिक स्थिति पर विचार करना आवश्यक है। 
  • मृत्यु/असमर्थता के बाद तुरंत या उचित समय के भीतर आवेदन किया जाना चाहिये 
  • इसका उद्देश्य परिवार के किसी सदस्य को बिल्कुल वही पद देना नहीं हैबल्कि वित्तीय सहायता प्रदान करना है। 
  • आर्थिक आवश्यकता (गरीबी) विचार किये जाने की प्राथमिक शर्त है। 
  • सहानुभूतिपूर्ण मुलाकातों का उद्देश्य अंतहीन सहायता प्रदान करना नहीं है। 
  • वित्तीय संकट साबित करने के अलावापात्रता मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है। 
  • जब तक विशेष रूप से प्रावधान न किया जाएअवयस्कों के वयस्क होने के लिये रिक्तियाँ आरक्षित नहीं की जा सकतीं। 
  • पारिवारिक पेंशन या अंतिम अवधि के लाभ नियोजन सहायता का विकल्प नहीं हैं। 
  • मृत्यु/अक्षमता के वर्षों बाद की गई नियुक्तियाँ सांविधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं। 
  • जो आश्रित पहले से ही कार्यरत हैंउन्हें इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता है। 
  • परिवार की वित्तीय स्थिति का निर्धारण करते समय सेवानिवृत्ति लाभों पर विचार करना आवश्यक है। 
  • दुरुपयोग को रोकने के लिये परिवार की संपूर्ण वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन किया जाना चाहिये 
  • आवश्यकता का मूल्यांकन करते समय परिवार की आय के सभी स्रोतों पर विचार किया जाना चाहिये 
  • पारिवारिक लाभ योजना के अधीन मिलने वाले भुगतान किसी व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति के लिये अयोग्य नहीं ठहराते हैं। 
  • आय सीमा निर्धारित करने से निर्णय लेने में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है। 
  • न्यायालय केवल सहानुभूति के आधार पर नियुक्तियाँ नहीं दे सकते। 
  • न्यायालयों को नियमों का पालन करना होगा और वे कठिनाई के मामलों में अपवाद नहीं बना सकते। 
  • नियोक्ताओं को उनकी नीति के विरुद्ध नियुक्तियाँ करने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता है।