होम / करेंट अफेयर्स
आपराधिक कानून
प्रेम संबंधों में असहमति आधारित यौन संबंध का अपराधीकरण
«02-Apr-2026
|
हमीदुर इस्लाम उर्फ हमीदुर इस्लाम बनाम असम राज्य और अन्य "भले ही एक पुरुष और एक महिला रिश्ते में हों, लेकिन इससे पुरुष को लड़की के साथ बलात्संग करने का अधिकार नहीं मिल जाता। तथापि देश में वैवाहिक बलात्संग को अभी तक अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन विवाह से पहले के प्रेम संबंध में भी, महिला की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ बलपूर्वक शारीरिक संबंध बनाना एक आपराधिक कृत्य होगा।" न्यायमूर्ति प्रांजल दास |
स्रोत: गुवाहाटी उच्च न्यायालय
चर्चा में क्यों?
गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रांजल दास ने हामेदुर इस्लाम उर्फ हामिदुर इस्लाम बनाम असम राज्य और अन्य (2026) के मामले में यह निर्णय दिया कि पक्षकारों के बीच प्रेम संबंध का अस्तित्व बलात्संग के अपराध को कम नहीं करता है, और यहाँ तक कि विवाहपूर्व संबंध में भी, किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध कोई भी बलपूर्वक शारीरिक कृत्य एक आपराधिक अपराध है।
- न्यायालय ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिये अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करने से इंकार कर दिया, यह देखते हुए कि पीड़िता के कथनों से निरंतर यह पता चलता है कि बिना किसी सहमति के बलात्कार किया गया था, और इसमें शामिल अपराध गंभीर प्रकृति के थे - विशेष रूप से कथित घटना के समय पीड़िता की आयु को देखते हुए।
हमीदुर इस्लाम बनाम असम राज्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- याचिकाकर्त्ता ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक आपराधिक याचिका दायर कर भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 की धारा 4 के अधीन उसके विरुद्ध दायर आरोपपत्र से उत्पन्न आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।
- पीड़िता के पिता ने शुरू में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि अभियुक्त उनके घर में घुस गए, जब उनकी पुत्री अकेली थी तब उसके साथ बलात्संग किया और उसे घटना का प्रकटन न करने की धमकी दी।
- याचिकाकर्त्ताने तर्क दिया कि तब से इत्तिलाकर्त्ता (पिता) के साथ एक समझौता हो चुका था, कि पीड़िता बालिग हो चुकी थी, कि कथित घटना के समय दोनों पक्ष प्रेम संबंध में थे, और दोनों परिवारों ने उनके प्रस्तावित विवाह के लिये सहमति दे दी थी।
- इत्तिलाकर्त्ता ने न्यायालय के समक्ष एक शपथपत्र भी दाखिल किया जिसमें उसने कार्यवाही को रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
- अभियोजन पक्ष ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया कि पीड़िता के कथनों से निरंतर यह साबित होता है कि अभियुक्त बलात्संग करने में शामिल थे और अपराध गंभीर प्रकृति के थे।
- न्यायालय ने गौर किया कि कथित घटना के समय पीड़िता की आयु प्रथम दृष्टया लगभग 17 वर्ष थी, जिससे उस पर लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण के प्रावधान लागू होते हैं।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
- न्यायालय ने निर्णय दिया कि किसी पुरुष और महिला के बीच प्रेम संबंध का अस्तित्व किसी भी तरह से बलात्कार को जायज नहीं ठहराता। यहाँ तक कि विवाहपूर्व संबंध में भी, महिला की इच्छा के विरुद्ध कोई भी बलपूर्वक शारीरिक कृत्य विधिक आपराधिक अपराध है।
- न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यद्यपि भारत में वैवाहिक बलात्संग को अभी भी अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन यह विधिक स्थिति विवाहपूर्व संबंधों पर लागू नहीं होती है और ऐसे संबंधों के भीतर कोई भी गैर-सहमतिपूर्ण शारीरिक कृत्य लागू विधि के अधीन आपराधिक दायित्त्व को आकर्षित करता है।
- समझौते के प्रश्न पर, न्यायालय ने कहा कि यद्यपि सूचना देने वाले (पीड़िता के पिता) ने समझौता कर लिया था और अनापत्ति का शपथपत्र दाखिल कर दिया था, लेकिन पीड़िता ने स्वयं ऐसा कोई समझौता नहीं किया था, और उसकी राय और बयान कार्यवाही के लिये महत्त्वपूर्ण बने रहे।
- प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष और पुलिस अन्वेषण के दौरान अभिलिखित किये गए पीड़िता के कथनों की जांच करने पर, न्यायालय ने पाया कि उसने निरंतर बलात्संग किये जाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन अपनी ओर से किसी प्रकार की सहमति का संकेत नहीं दिया था - और यद्यपि उसने प्रेम संबंध को स्वीकार किया था, लेकिन उसके कथनों में ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे यह पता चले कि शारीरिक संबंध सहमति से था।
- न्यायालय ने माना कि, इसमें शामिल अपराधों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए और गंभीर अपराधों को रद्द करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार, आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिये अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करना उचित नहीं होगा।
- तदनुसार, याचिका खारिज कर दी गई।
भारतीय न्याय संहिता के अधीन बलात्कार के अपराध क्या हैं?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 = बलात्संग की परिभाषा
|
कार्य |
विवरण |
|
(क) |
किसी महिला की योनि, उसके मुंह, मूत्रमार्ग या गुदा में अपना लिंग किसी भी सीमा तक प्रवेश करता है या उससे ऐसा अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ कराता है। |
|
(ख) |
किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में ऐसी कोई वस्तु या शरीर का कोई भाग, जो लिंग न हो, किसी भी सीमा तक अनुप्रविष्ट करता है या उससे ऐसा अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ कराता है। |
|
(ग) |
किसी महिला के शरीर के किसी भाग का इस प्रकार हस्तसाधन करता है जिससे कि उस महिला की योनि, मूत्रमार्ग, गुदा या शरीर के किसी भाग में प्रवेशन कारित किया जा सके या उससे ऐसा अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ कराता है। |
|
(घ) |
किसी महिला की योनि, गुदा, मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है या उससे ऐसा अपने साथ या किसी अन्य व्यक्ति के साथ कराता है। |
उपरोक्त में से कोई भी कृत्य इन परिस्थितियों में किये जाने पर बलात्कार की श्रेणी में आता है:
|
परिस्थिति |
विवरण |
|
(i) |
उस महिला की इच्छा के विरुद्ध |
|
(ii) |
उस महिला की सम्मति के बिना |
|
(iii) |
उस महिला की सम्मति से. जब उसकी सम्मति उसे या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे वह हितबद्ध है, मृत्यु या उपहति के भय में डालकर अभिप्राप्त की गई है। |
|
(iv) |
उस महिला की सम्मति से, जब कि वह पुरुष यह जानता है कि वह उस महिला का पति नहीं है और उस महिला ने सम्मति इस कारण दी है कि वह यह विश्वास करती है कि वह ऐसा अन्य पुरुष है जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है। |
|
(v) |
उस महिला की सम्मति से, जब ऐसी सम्मति देने के समय, वह चित्त-विकृत्ति या मत्तता के कारण या उस पुरुष द्वारा व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से कोई संज्ञाशून्यकारी या अस्वास्थ्यकर पदार्थ दिए जाने के कारण, उस बात की, जिसके बारे में वह सम्मति देती है, प्रकृति और परिणामों को समझने में असमर्थ है। |
|
(vi) |
उस महिला की सम्मति से या उसके बिना, जब वह अठारह वर्ष से कम आयु की है। |
|
(vii) |
जब वह महिला सम्मति संसूचित करने में असमर्थ है। |
स्पष्टीकरण और अपवाद:
|
प्रकार |
विवरण |
|
स्पष्टीकरण 1 |
इस धारा के प्रयोजनों के लिये, 'योनि' के अंतर्गत वृहत् भगौष्ठ भी है। |
|
स्पष्टीकरण 2 |
सम्मति से कोई स्पष्ट स्वैच्छिक सहमति अभिप्रेत है, जब महिला शब्दों, संकेतों या किसी प्रकार की मौखिक या अमौखिक संसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट लैंगिक कृत्य में भाग लेने की इच्छा व्यक्त करती है। |
|
अपवाद 1 |
किसी चिकित्सीय प्रक्रिया या अंतःप्रवेशन से बलात्संग गठित नहीं होगा। |
|
अपवाद 2 |
किसी पुरुष का अपनी स्वयं की पत्नी के साथ मैथुन या लैंगिक कृत्य, यदि पत्नी अठारह वर्ष से कम आयु की न हो, बलात्संग नहीं है। |
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (1) = बलात्संग के अपराध के लिये दण्ड
- इस उपबंध में बलात्संग के अपराध के लिये दण्ड का उपबंध है, जो कठोर कारावास है, जो 10 वर्ष से कम नहीं होगा, किंतु आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (2) = विशिष्ट परिस्थितियों में बलात्संग के अपराध के लिये दण्ड
- इसमें विशिष्ट परिस्थितियों में बलात्संग के अपराध का उपबंध है।
- यहाँ दिया गया दण्ड कम से कम दस वर्ष का कठोर कारावास है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका अर्थ है उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिये कारावास, और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 = कतिपय मामलों में बलात्संग के लिये दण्ड (अवयस्कों के साथ)
|
उपधारा |
पीड़िता की आयु |
दण्ड |
जुर्माना |
अतिरिक्त उपबंध |
|
(1) |
बलात्संग की घटना में पीड़िता की आयु सोलह वर्ष से कम होनी चाहिये। |
कम से कम बीस वर्ष के कठोर कारावास का दण्ड, जिसे आजीवन कारावास (शेष प्राकृत जीवनकाल) तक बढ़ाया जा सकता है। |
जुर्माना के लिये दायी होगा |
1. पीड़ित के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिये जुर्माना न्यायोचित और युक्तियुक्त होना चाहिये। 2. लगाया गया कोई भी जुर्माना पीड़ित को अदा किया जाएगा। |
|
(2) |
बलात्संग की घटना में पीड़िता की आयु बारह वर्ष से कम होनी चाहिये। |
कम से कम बीस वर्ष की कठोर कारावास का दण्ड, जिसे आजीवन कारावास (शेष प्राकृत जीवनकाल) या मृत्युदण्ड तक बढ़ाया जा सकता है। |
जुर्माने सहित |
1. पीड़ित के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिये जुर्माना युक्तियुक्त और न्यायोचित होना चाहिये। 2. अधिरोपित किया गया कोई भी जुर्माना पीड़ित को अदा किया जाएगा। |
- धारा 66 = पीड़िता की मृत्यु या सतत् विकृतशील दशा कारित करने के लिये दण्ड
- कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है या इसके साथ
- धारा 70 = सामूहिक बलात्संग
|
उपधारा |
पीड़िता की श्रेणी |
विवरण |
दण्ड |
जुर्माना |
अतिरिक्त उपबंध |
|
(1) |
वयस्क महिला |
जहाँ किसी महिला के साथ एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, जो समूह बनाकर या समान आशय से कार्य करते हुए, बलात्संग किया जाता है |
कठोर कारावास, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम नहीं होगी, जो आजीवन कारावास (अर्थात् शेष प्राकृत जीवनकाल) तक विस्तारित हो सकती है |
जुर्माने सहित |
1. जुर्माना न्यायसंगत एवं युक्तियुक्त होगा, जिससे पीड़िता के चिकित्सा व्यय एवं पुनर्वास की पूर्ति हो सके। |
|
(2) |
अठारह वर्ष से कम आयु की महिला |
जहाँ अठारह वर्ष से कम आयु की महिला के साथ एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, जो समूह बनाकर या समान आशय से कार्य करते हुए, बलात्संग किया जाता है |
आजीवन कारावास (अर्थात् शेष प्राकृत जीवनकाल) या मृत्युदण्ड |
जुर्माने सहित |
1. जुर्माना न्यायसंगत एवं युक्तियुक्त होगा, जिससे पीड़िता के चिकित्सा व्यय एवं पुनर्वास की पूर्ति हो सके। |
.jpg)