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पर्यावरणीय विधि

पुणे नगर निगम बनाम सुस रोड बानेर विकास मंच और अन्य (2024)

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 05-Jan-2026

परिचय 

यह ऐतिहासिक निर्णय पुणे नगर निगम द्वारा एक रियायतग्राही (concessionaire) के सहयोग से स्थापित किये गए कचरा प्रसंस्करण संयंत्र की वैधता से संबंधित हैजहाँ राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे। 

  • उच्चतम न्यायालय ने 2024 में यह निर्णय दियाजिसमें अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना में पर्यावरणीय चिंताओं और व्यावहारिक लोकहित संबंधी विचारों के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्त्व पर बल दिया गया। 
  • इस मामले ने आवश्यक लोक सेवा सुविधाओं में पर्यावरणीय उल्लंघनों से निपटने के दौरान पर्यावरणीय अनुपालन को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों और उपायों के आनुपातिकता को स्पष्ट किया। 

तथ्य 

  • नगरपालिका की सीमा के विस्तार के बादपुणे नगर निगम ने एक विकास योजना तैयार की जिसमें एक स्थल को कचरा प्रसंस्करण संयंत्र (GPP) के उद्देश्य से आरक्षित किया गया था। 
  • विकास योजना की मंजूरी लंबित रहने के दौराननिर्धारित भूमि से लगभग सौ मीटर दूर एक स्थल पर आवासीय भवन के निर्माण के लिये अनुमति मांगी गई थी। 
  • विकास योजना को मंजूरी मिलने के बादअपीलकर्त्ता निगम और प्रत्यर्थी संख्या 7 (रियायतग्राही) ने निर्दिष्ट भूमि पर जैविक अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिये एक रियायत करार किया। 
  • इस करार का उद्देश्य एक ऐसी परिचालन अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा स्थापित करना था जहाँ निगम से प्राप्त पूर्व-पृथकगैर-संपीड़ित जैविक अपशिष्ट को पीसकर एक घोल बनाया जा सके। 
  • प्रत्यर्थी-रियायतग्राही ने राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से पर्यावरण मंजूरी मांगीजो प्रदान की गईऔर बाद में प्रत्यर्थी संख्या से ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण/निपटान संयंत्र स्थापित करने और संचालित करने के लिये प्राधिकरण प्राप्त किया।  
  • प्रत्यर्थी संख्या 1, जो नागरिकों के हितों की रक्षा के लिये स्थापित एक रजिस्ट्रीकृत न्यास हैने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष एक आवेदन दायर कर प्रत्यर्थी -रियायतग्राही को कचरा प्रसंस्करण संयंत्र (GPP) के संचालन से रोकने की मांग कीयह आरोप लगाते हुए कि इसे निर्धारित विधिक प्रक्रियाओं का पालन किये बिना स्थापित किया गया था।  
  • अधिकरण ने माना कि कचरा प्रसंस्करण संयंत्र (GPP) ने निवासियों के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन किया और यह सांविधिक मानदंडों के विरुद्ध थाइसलिये संयंत्र को बंद करने का निदेश दिया गया और सुझाव दिया गया कि उस स्थान का उपयोग जैव विविधता पार्क विकसित करने के लिये किया जाए। 

सम्मिलित विवाद्यक 

  • जिस भूखंड पर कचरा प्रसंस्करण संयंत्र (GPP) का निर्माण किया गया थावह मूल रूप से जैव विविधता पार्क के लिये आरक्षित था या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र के लिये? 
  • क्या राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त होते हुए भी कचरा प्रसंस्करण संयंत्र (GPP) को बंद करने का निदेश देकर त्रुटी की? 
  • शहर की अपशिष्ट प्रबंधन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुएक्या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र को बंद करना लोकहित में होगा या इसके लिये हानिकारक होगा? 
  • क्या आवश्यक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना को बंद किये बिना चिंताओं को दूर करने के लिये उचित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को लागू किया जा सकता है? 

न्यायालय की टिप्पणियां  

  • न्यायालय ने माना कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण का यह निष्कर्ष कि भूखंड प्रारंभ में जैव विविधता पार्क के लिये आरक्षित थात्रुटिपूर्ण और तथ्यात्मक रूप से गलत थाक्योंकि भूखंड स्थापना से ही क्या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र के लिये आरक्षित था। 
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जैव विविधता पार्क के लिये केवल उससे सटी हुई जमीन आरक्षित थीन कि वह स्थान जहाँ क्या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र का निर्माण किया गया था। 
  • न्यायालय ने पाया कि क्या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र को बंद करना लोकहित के लिये लाभकारी होने के बजाय हानिकारक होगाक्योंकि शहर के पश्चिमी भाग से जैविक कचरे को पूरे शहर को पार करते हुए पूर्वी भाग तक ले जाना होगा।  
  • न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि कचरे के इस प्रकार के परिवहन से निस्संदेह दुर्गंध और जनता को असुविधा होगीजिससे वर्तमान व्यवस्था की तुलना में अधिक पर्यावरणीय खतरे उत्पन्न होंगे।  
  • न्यायालय ने आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करते हुए पाया कि क्या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र को बंद करने का राष्ट्रीय हरित अधिकरण का निदेश असंगत थायह देखते हुए कि संयंत्र ने आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर ली थी और एक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य कर रहा था।  
  • न्यायालय ने उपचारात्मक उपायों को लागू करने का निदेश दियाजिसमें निगम और रियायतग्राही को यह चेतावनी देना शामिल है कि वे आस-पास की इमारतों में रहने वाले निवासियों को दुर्गंध के कारण होने वाली परेशानी से बचाने के लिये आवश्यक कदम उठाएं।  
  • न्यायालय ने पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिये क्या कचरा प्रसंस्करण संयंत्र के चारों ओर हरित आवरण बनाने हेतु सघन वृक्षारोपण का आदेश दिया। 
  • न्यायालय ने राज्य सरकार को जैव विविधता पार्क के लिये मियावाकी के जंगलों को उगाने पर विचार करने का निदेश दिया जिससे आसपास के क्षेत्रों को हरित क्षेत्र उपलब्ध कराया जा सके। 
  • न्यायालय ने आदेश दिया कि राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) कचरा प्रसंस्करण संयंत्र का हर छह महीने में पर्यावरण ऑडिट करे और ऑडिट रिपोर्ट में दिये गए सुझावों का कठोरता से पालन करे।   

निष्कर्ष 

  • यह ऐतिहासिक निर्णय इस बात को पुष्ट करता है कि पर्यावरणीय चिंताओं को व्यावहारिक लोकहित संबंधी विचारों के साथ संतुलित किया जाना चाहियेविशेष रूप से अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं जैसे आवश्यक बुनियादी ढाँचे के लिये 
  • उच्चतम न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बंद करने के आदेश को अपास्त कर दिया और पर्यावरण संबंधी सुरक्षा उपायों को बढ़ाते हुए कचरा प्रसंस्करण संयंत्र के निरंतर संचालन की अनुमति दे दी। 
  • इस निर्णय में निरंतर पर्यावरणीय निगरानी और सघन वृक्षारोपणगंध नियंत्रण और हरित क्षेत्रों के विकास जैसे सुरक्षात्मक उपायों को लागू करने का आदेश दिया गया है जिससे आवश्यक लोक सेवाओं को बनाए रखते हुए पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान किया जा सके।