आज ही एडमिशन लें बिहार APO (प्रिलिम्स + मेन्स) कोर्स में और अपने सपनों को दे नई दिशा | ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में उपलब्ध | 12 जनवरी 2026  से कक्षाएँ आरंभ   |   एडमिशन ओपन: UP APO प्रिलिम्स + मेंस कोर्स 2025, बैच 6th October से   |   ज्यूडिशियरी फाउंडेशन कोर्स (प्रयागराज)   |   अपनी सीट आज ही कन्फर्म करें - UP APO प्रिलिम्स कोर्स 2025, बैच 6th October से










होम / POSH अधिनियम

आपराधिक कानून

महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम के अधीन आंतरिक परिवाद समिति का गठन

    «
 07-Jan-2026

परिचय 

महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारणप्रतिषेध और प्रतितोषअधिनियम, 2013 का अध्याय कार्यस्थलों पर आंतरिक परिवाद समिति के गठन का प्रावधान करता है। 

  • धारा में आंतरिक परिवाद समिति के गठनसंरचनाकार्यकाल और सदस्यों को हटाने के संबंध में विस्तृत प्रावधान किये गए हैं। 

आंतरिक परिवाद समिति का गठन (धारा 4) 

  • धारा 4(1):प्रत्येक नियोक्ता को अपने कार्यस्थल पर लिखित आदेश के माध्यम से एक आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन करना होगा।  
  • धारा 4(1) (पूर्वानुमान):यदि कार्यस्थल में विभिन्न स्थानों पर या खंड या उप-खंड स्तर पर कार्यालय या प्रशासनिक इकाइयाँ हैंतो आंतरिक समिति का गठन ऐसी सभी प्रशासनिक यूनिटों या कार्यालयों में किया जाना चाहिये 
  • धारा 4(2):आंतरिक समिति में नियोक्ता द्वारा मनोनीत निम्नलिखित सदस्य सम्मिलित होंगे: 
  • (क) पीठासीन अधिकारी:कार्यस्थल पर ज्येष्ठ स्तर पर कार्यरत महिला होनी चाहिये 
  • प्रथम परंतुक:यदि कार्यस्थल पर ज्येष्ठ स्तर की महिला कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैतो पीठासीन अधिकारी को कार्यस्थल के अन्य कार्यालयों या प्रशासनिक यूनिटों में से नामित किया जाएगा।  
  • द्वितीय परंतुक:यदि अन्य कार्यालयों या प्रशासनिक यूनिटों में भी वरिष्ठ स्तर की महिला कर्मचारी का अभाव होतो पीठासीन अधिकारी को उसी नियोक्ता के किसी अन्य कार्यस्थल या किसी अन्य विभाग या संगठन से मनोनीत किया जाएगा। 
  • (ख) सदस्य:कर्मचारियों में से कम से कम दो सदस्यअधिमानतः वे जो महिलाओं के हित के प्रति प्रतिबद्ध हों या जिन्हें सामाजिक कार्य का अनुभव हो या विधिक ज्ञान हो। 
  • (ग) बाह्य सदस्य:गैर-सरकारी संगठनों या महिला अधिकारों के लिये प्रतिबद्ध संघों में से एक सदस्यया लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों से सुपरिचित व्यक्ति। 
  • परंतु:नामनिर्देशित कुल सदस्यों में से कम से कम आधे सदस्य महिलाएं होनी चाहिये 
  • धारा 4(3):पीठासीन अधिकारी और आंतरिक समिति के प्रत्येक सदस्य नियोक्ता द्वारा निर्दिष्ट नामांकन की तिथि से तीन वर्ष से अधिक की अवधि के लिये पद धारण नहीं करेंगे। 
  • धारा 4(4):गैर-सरकारी संगठनों या संघों से नियुक्त सदस्य को आंतरिक समिति की कार्यवाही आयोजित करने के लिये नियोक्ता द्वारा विहित फीस या भत्ते का संदाय किया जाएगा। 
  • धारा 4(5):पीठासीन अधिकारी या कोई भी सदस्य समिति से हटा दिया जाएगा यदि: 
  • (क)वे अधिनियम की धारा 16 के उपबंधों का उल्लंघन करते हैंया 
  • (ख)उन्हें किसी अपराध के लिये सिद्धदोष ठहराया गया हो या किसी विधि के अधीन उनके विरुद्ध किसी अपराध की जांच लंबित होया 
  • (ग)उन्हें किसी अनुशासनात्मक कार्यवाही में दोषी पाया गया हो या उनके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होया 
  • (घ)उन्होंने अपने पद का इस हद तक दुरुपयोग किया है कि उनका पद पर बने रहना जनहित के लिये हानिकारक है। 
  • किसी भी पद से हटाए जाने या आकस्मिक रिक्ति के कारण उत्पन्न किसी भी रिक्ति को इस धारा के उपबंधों के अनुसार नए नामनिर्देशन द्वारा भरा जाएगा।  

धारा के अंतर्गत प्रमुख आवश्यकताएँ 

आवश्यकता 

विवरण 

अतिरिक्त टिप्पणी 

आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन 

प्रत्येक नियोक्ता के लिए अनिवार्य 

इसका गठन लिखित आदेश द्वारा किया जाना आवश्यक है। 

एकाधिक स्थानों पर आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन 

सभी प्रशासनिक यूनिटों में अनिवार्य 

यदि कार्यालय विभिन्न स्थानों पर या खंड/उपखंड स्तर पर स्थित हों। 

पीठासीन अधिकारी 

कार्यस्थल की ज्येष्ठ स्तर की महिला 

यदि उपलब्ध न होतो अन्य कार्यालय/कार्यस्थल से नामित की जा सकती है।  

कर्मचारी सदस्य 

न्यूनतम दो सदस्य 

अधिमानतः वे जो महिला कल्याण के कार्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों अथवा सामाजिक कार्य/विधिक अनुभव रखते हों। 

बाह्य सदस्य 

किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) या संघ से एक सदस्य 

जिसे लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित मामलों का ज्ञान एवं अनुभव हो। 

लैंगिक संरचना 

समिति के कम से कम आधे सदस्य महिलाएं हों 

अनिवार्य आवश्यकता 

कार्यकाल 

नामांकन की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष 

निर्धारित अवधि से अधिक नहीं 

बाह्य सदस्य को देय फीस 

के रूप में विहित 

कार्यवाही में भाग लेने हेतु नियोक्ता द्वारा भुगतान किया जाएगा। 

पद से हटाए जाने के आधार 

धारा 16 का उल्लंघनदोषसिद्धिअनुशासनात्मक कार्यवाहीपद का दुरुपयोग 

रिक्ति को नवीन नामनिर्देशन द्वारा भरा जाएगा। 

 

निष्कर्ष 

धारा कार्यस्थलों पर लैंगिक उत्पीड़न के परिवादों के निवारण हेतु आंतरिक परिवाद समितियों के गठन के लिये एक व्यापक ढाँचा स्थापित करती है। इसके उपबंधों में ज्येष्ठ स्तर की महिलाओं को अध्यक्ष नियुक्त करनाकम से कम आधे सदस्यों का महिला होना अनिवार्य करके पर्याप्त लैंगिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और महिला मुद्दों में विशेषज्ञता रखने वाले बाहरी सदस्यों को शामिल करना सम्मिलित है। यह धारा सदस्यों की संरचनाकार्यकाल और निष्कासन संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देशों के माध्यम से संरचनात्मक अखंडता को बनाए रखते हुए कई स्थानों वाले कार्यस्थलों के लिये लचीलापन प्रदान करती है। ये नियम एक सुलभ और विश्वसनीय निवारण तंत्र का निर्माण करते हैं जो कार्यस्थल की कार्यप्रणाली के आंतरिक ज्ञान और बाहरी विशेषज्ञता एवं निष्पक्षता के बीच संतुलन स्थापित करता है।