होम / कंपनी अधिनियम
सिविल कानून
सार्वजनिक कंपनी का निजी कंपनी में रूपांतरण
«26-Mar-2026
परिचय
किसी सार्वजनिक कंपनी का निजी कंपनी में रूपांतरण कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत आने वाला एक महत्त्वपूर्ण कॉर्पोरेट पुनर्गठन कार्य है। इस प्रकार के रूपांतरण के लिये अधिनियम की धारा 13 और 14 के अनुसार कंपनी का ज्ञापन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में संशोधन आवश्यक हैं, जो क्रमशः कंपनी का ज्ञापन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में संशोधनों से संबंधित हैं। धारा 13, धारा 61 के साथ मिलकर, अंश पूँजी से संबंधित प्रावधानों में परिवर्तन की परिकल्पना करती है जिसके लिये केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है। अधिनियम की धारा 18 एक प्रकार की कंपनी को दूसरे प्रकार की कंपनी में परिवर्तित करने का मूल अधिकार प्रदान करती है।
- प्रक्रियात्मक ढाँचा विशेष रूप से कंपनी (निगमन) चतुर्थ संशोधन नियम, 2018 के नियम 41 में निर्धारित किया गया है, जो चरण-दर-चरण प्रक्रिया को निर्धारित करता है जिसका पालन किसी कंपनी को इस तरह के रूपांतरण को विधिक रूप से प्रभावी करने के लिये करना चाहिये।
सार्वजनिक कंपनी को निजी कंपनी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया
- बोर्ड की बैठक: यह प्रक्रिया विधिवत आयोजित बोर्ड की बैठक से शुरू होती है, जिसमें कंपनी को परिवर्तित करने के निर्णय पर विचार किया जाता है और उसे अनुमोदित किया जाता है। बोर्ड औपचारिक रूप से रूपांतरण प्रक्रिया शुरू करने का संकल्प लेता है, और ऐसी बैठक का विवरण विधिवत रूप से दर्ज और संरक्षित किया जाना चाहिये।
- प्रतिनिधि का अधिकार: कंपनी को रूपांतरण प्रक्रिया के दौरान अपनी ओर से कार्य करने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त करना होगा — आमतौर पर एक पेशेवर व्यक्ति जैसे कंपनी सचिव या वकील। क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष ऐसे प्रतिनिधित्व को अधिकृत करने वाले प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
- साधारण बैठक: रूपांतरण का निर्णय कंपनी की साधारण बैठक में शेयरधारकों के समक्ष रखा जाना चाहिये और उनकी स्वीकृति आवश्यक है। इस संबंध में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिये, जो सदस्यों की सामूहिक सहमति को दर्शाता हो।
- ई-फॉर्म दाखिल करना: प्रस्ताव पारित होने के बाद, आवश्यक ई-फॉर्म कंपनी रजिस्ट्रार के पास दाखिल करना अनिवार्य है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 117 के अधीन प्रस्तावों और करारों को विहित समय सीमा के भीतर दाखिल करना अनिवार्य है, और यह दायित्त्व रूपांतरण प्रस्ताव पर भी समान रूप से लागू होता है।
- क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष आवेदन: संकल्प पारित होने के 60 दिनों के भीतर रूपांतरण हेतु एक औपचारिक आवेदन तैयार करके क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिये। नियम 41 के अंतर्गत निर्दिष्ट सभी दस्तावेज़ और घोषणाएँ, जिनमें नियम 41(2) में उल्लिखित विवरण भी शामिल हैं, आवेदन के साथ संलग्न किये जाने चाहिये।
- लेनदारों और डिबेंचर धारकों की सूची: आवेदन के साथ कंपनी के लेनदारों और डिबेंचर धारकों की एक पूर्ण और सत्यापित सूची संलग्न होनी चाहिये, जिसमें देय राशि, बकाया दावे, देनदारियां और किसी भी अनिश्चित या आकस्मिक ऋण का विवरण शामिल हो।
- फॉर्म INC-25A: कंपनी को आवेदन के भाग के रूप में फॉर्म INC-25A जमा करना अनिवार्य है। यदि क्षेत्रीय निदेशक आवेदन जमा करने के बाद अतिरिक्त जानकारी या स्पष्टीकरण मांगते हैं, तो उसे ई-फॉर्म RD-GNL-5 के माध्यम से 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करना होगा। क्षेत्रीय निदेशक आवेदन जमा करने के 30 दिनों के भीतर उसे अस्वीकार कर सकते हैं, और आवेदन को दो बार से अधिक पुनः जमा करने की अनुमति नहीं है।
- मंजूरी का आदेश: यदि निर्धारित अवधि के भीतर स्वीकृति, अस्वीकृति या पुनः प्रस्तुत करने का कोई आदेश पारित नहीं किया जाता है और कोई आपत्ति प्राप्त होती है, तो क्षेत्रीय निदेशक को ऐसी आपत्ति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सुनवाई करनी होगी। यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि यदि किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कंपनी के विरुद्ध कोई मामला लंबित है, तो रूपांतरण का आदेश नहीं दिया जाएगा। स्वीकृति आदेश प्राप्त होने पर, कंपनी को इसे फॉर्म INC-28 में 15 दिनों के भीतर दाखिल करना होगा।
निष्कर्ष
किसी सार्वजनिक कंपनी का निजी कंपनी में रूपांतरण मात्र नाम परिवर्तन नहीं है, अपितु यह कंपनी के सांविधानिक दस्तावेज़ों , शासन दायित्वों और अनुपालन ढांचे का मौलिक पुनर्गठन है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 13, 14 और 18 तथा 2018 संशोधन नियमों के नियम 41 के अंतर्गत आने वाली इस प्रक्रिया में सांविधिक समयसीमा, दस्तावेज़ी आवश्यकताओं और नियामक अनुमोदनों का पूर्णतया पालन करना अनिवार्य है। सफल रूपांतरण से कंपनी को अधिनियम के अंतर्गत निजी कंपनी का दर्जा प्राप्त होने से मिलने वाले अपेक्षाकृत कम अनुपालन भार और परिचालन लचीलेपन का लाभ मिलता है।