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सिविल कानून

कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लाभांश की घोषणा एवं भुगतान

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 14-May-2026

परिचय 

लाभांश किसी कंपनी द्वारा अपने अंशधारकों को उनकी अंशदारी के अनुपात में वितरित लाभ का अंश होता है। कंपनी अधिनियम, 2013 के अधीनलाभांश की घोषणा और भुगतान धारा 123, 124 और 127 द्वारा नियंत्रित होता हैजो घोषणा के लिये अनुमत स्रोतोंदावा न किये गए लाभांशों के निपटान की प्रक्रिया और व्यतिक्रम के लिये दंडात्मक परिणामों को निर्धारित करती हैं। यह ढाँचा सुनिश्चित करता है कि लाभांश का भुगतान केवल वैध रूप से अर्जित लाभ से ही किया जाए और निदेशक जानबूझकर भुगतान न करने के लिये व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह हों। 

धारा 123 — लाभांश की घोषणा 

  • कोई कंपनी केवल निम्नलिखित स्रोतों से लाभांश घोषित या भुगतान कर सकती है: अनुसूची के अनुसार मूल्यह्रास का प्रावधान करने के बाद चालू वित्तीय वर्ष का लाभइसी प्रकार गणना किये गए पिछले वित्तीय वर्षों का अवितरित लाभउपरोक्त दोनोंया प्रत्याभूति के अधीन केंद्र या राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया गया धन। इस प्रयोजन के लिये लाभ की गणना से अवास्तविक लाभकाल्पनिक लाभपरिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन और उचित मूल्य समायोजन स्पष्ट रूप से बाहर रखे गए हैं। 
  • लाभांश घोषित करने से पहलेकोई कंपनी अपने लाभ का कोई भी अंश आरक्षित निधि में अंतरित कर सकती है - यह विवेकाधीन हैअनिवार्य नहीं। यदि कोई कंपनी चालू लाभ की अपर्याप्तता के कारण मुक्त आरक्षित निधि में स्थानांतरित संचित लाभ से लाभांश घोषित करने का प्रस्ताव करती हैतो उसे निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। मुक्त आरक्षित निधि के अलावा किसी अन्य आरक्षित निधि से लाभांश घोषित नहीं किया जा सकता है। इसके अतिरिक्तलाभांश घोषित करने से पहले पिछले वर्षों में अर्जित हानियों और पिछले वर्षों में प्रदान न किये गए मूल्यह्रास को चालू वर्ष के लाभ से समायोजित किया जाना चाहिये 
  • निदेशक मंडल वित्तीय वर्ष के दौरान या वित्तीय वर्ष की समाप्ति और वार्षिक आम बैठक (AGM) के बीचलाभ-हानि खाते में बचे अधिशेष या संबंधित अवधि के लाभ में सेअंतरिम लाभांशघोषित कर सकता है । यदि कंपनी को घोषणा से पहले की तिमाही तक चालू वित्तीय वर्ष में हानि हुई हैतो अंतरिम लाभांश की घोषणा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में घोषित लाभांश के औसत से अधिक दर पर नहीं की जा सकती है। 
  • लाभांश की राशि घोषणा केपाँच दिनोंके भीतर एक पृथक् अनुसूचित बैंक खाते में जमा की जानी चाहियेऔर इसका भुगतान केवल रजिस्ट्रीकृत अंशधारक को ही चेकवारंट या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जाना चाहिये 

धारा 124 — अवैतनिक लाभांश खाता 

  • यदि घोषित लाभांशघोषणा की तिथि सेतीस दिनों तक अवैतनिक या दावारहित रहता हैतो कंपनी को उस अवधि की समाप्ति केसात दिनोंके भीतर कुल अवैतनिक राशि को अनुसूचित बैंक में एक विशेष खाते में स्थानांतरित करना होगा जिसेअवैतनिक लाभांश खाताकहा जाता है । 
  • इस प्रकार के अंतरण के नब्बे दिनोंके भीतरकंपनी को प्रत्येक दावा न करने वाले अंशधारक के नामअंतिम ज्ञात पते और देय राशि का विवरण तैयार करके अपनी वेबसाइट और केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किसी अन्य वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा। धन का हकदार कोई भी व्यक्ति कंपनी से भुगतान के लिये आवेदन कर सकता है। 
  • यदि अवैतनिक लाभांश खाते में राशि अंतरित करने में व्यतिक्रम होता हैतो कंपनी को व्यतिक्रम की तारीख से 12% प्रति वर्ष की दरसे ब्याज का भुगतान करना होगाजो बकाया राशि के अनुपात में सदस्यों के लाभ के लिये एकत्रित होता है। 
  • अवैतनिक लाभांश खाते मेंसात वर्षोंतक बकाया या दावा न की गई राशिअर्जित ब्याज सहित, निवेशकशिक्षा एवं संरक्षण कोष (IEPF) में अंतरित कर दी जाती है। इसी प्रकारजिन अंशों पर निरंतर सात वर्षों या उससे अधिक समय तक लाभांश का भुगतान या दावा नहीं किया गया हैउन्हें भी IEPF में अंतरित कर दिया जाता है। दावेदार विहित प्रक्रिया के माध्यम से IEPF से ऐसे अंश वापस प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप सेयदि सात वर्षों की अवधि के दौरान एक बार भी लाभांश का भुगतान या दावा किया जाता हैतो शेयर IEPF में अंतरित नहीं किये जाते हैं। 
  • धारा 124 का अनुपालन न करने पर कंपनी पर 1 लाख रुपएका जुर्माना लगाया जा सकता हैऔर उल्लंघन जारी रहने परप्रतिदिन 500 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता हैजो अधिकतम 10 लाख रुपएतक हो सकता है। प्रत्येक दोषी अधिकारी पर 25,000 रुपए काजुर्माना लगाया जा सकता हैऔर उल्लंघन जारी रहने परप्रतिदिन 100 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता हैजो अधिकतम 2 लाख रुपएतक हो सकता है । 

धारा 127 — लाभांश वितरित करने में विफलता के लिये दण्ड 

  • यदि घोषित लाभांश का भुगतान घोषणा के तीस दिनोंके भीतर नहीं किया जाता है या वारंट जमा नहीं किया जाता हैतो इस व्यतिक्रम में जानबूझकर शामिल प्रत्येक निदेशक कोदो वर्ष तक के कारावासऔर व्यतिक्रम जारी रहने केप्रत्येक दिन के लिये कम से कम ₹1,000 के जुर्मानेसे दण्डित किया जाएगा। कंपनीव्यतिक्रम की अवधि के लिये 18% प्रति वर्ष की साधारण ब्याज दर का भुगतान करने के लिये भी उत्तरदायी होगी। 
  • यद्यपिनिम्नलिखित स्थितियों में कोई अपराध नहीं माना जाएगा: विधि के संचालन के कारण लाभांश का भुगतान नहीं किया जा सकाअंशधारक के स्वयं के भुगतान निर्देशों का पालन नहीं किया जा सका और इसकी सूचना उन्हें दे दी गई थीलाभांश प्राप्त करने के अधिकार के संबंध में कोई विवाद हैलाभांश को अंशधारक द्वारा कंपनी को देय राशि के विरुद्ध विधिक रूप से समायोजित किया गया थाया विफलता कंपनी की किसी व्यतिक्रम के कारण नहीं थी। 

प्रमुख समय-सीमाओं का संक्षिप्त विवरण 

प्रावधान 

समयसीमा / दर 

पृथक् बैंक खाते में जमा 

घोषणा की तिथि से दिनों के भीतर 

अवैतनिक लाभांश खाते में अंतरण 

30 दिन की अवधि समाप्त होने के दिनों के भीतर  

वेबसाइट पर विवरण प्रकाशित करना 

अंतरण के 90 दिनों के भीतर 

IEPF में राशि का अंतरण 

अवैतनिक लाभांश खाते में वर्ष बाद 

IEPF में अंशों (Shares) का अंतरण 

लगातार सात वर्षों तक लाभांश का दावा न किये जाने के बाद 

अंतरण में व्यतिक्रम होने पर ब्याज 

12% प्रतिवर्ष 

लाभांश का भुगतान न करने पर कंपनी द्वारा देय ब्याज 

18% प्रतिवर्ष (साधारण ब्याज) 

निदेशक हेतु दण्ड 

अधिकतम वर्ष का कारावास तथा ₹1,000 प्रतिदिन का जुर्माना  

निष्कर्ष 

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 123, 124 और 127 लाभांश वितरण को नियंत्रित करने वाला एक सुसंगत ढाँचा प्रदान करती हैं — जिसमें अनुमत स्रोतों और घोषणा की शर्तों से लेकरदावा न की गई राशियों की सुरक्षा और निदेशकों के लिये व्यक्तिगत आपराधिक दायित्त्व तक शामिल हैं। ये उपबंध स्पष्ट विधायी आशय को दर्शाते हैं: एक बार घोषित होने के बादलाभांश अंशधारकों के प्रति एक अटल दायित्त्व हैऔर किसी भी जानबूझकर किये गए व्यतिक्रम के गंभीर विधिक परिणाम होते हैं।