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सिविल कानून
सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ
«23-Apr-2026
परिचय
भारत में सिविल वादों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख विधिक विधि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 है। धारा 2 में वह व्याख्यात्मक ढाँचा दिया गया है जिस पर संहिता के प्रत्येक प्रक्रियात्मक प्रावधान आधारित हैं। ये परिभाषाएँ निर्धारित करती हैं कि न्यायालय न्यायिक कृत्यों को कैसे वर्गीकृत करते हैं, पक्षकारों और उनके प्रतिनिधियों की पहचान कैसे की जाती है, और न्यायालयों के राज्यक्षेत्रीय और कार्यात्मक अधिकारिता को कैसे समझा जाता है।
- मूल विधि के विपरीत, जो अधिकार प्रदान करता है, सीपीसी उन अधिकारों को लागू करने की प्रक्रिया निर्धारित करती है। इसलिए धारा 2 में दी गई परिभाषाएँ केवल तकनीकी नहीं हैं — वे वह आधारशिला हैं जिससे प्रत्येक दीवानी विवाद को न्यायनिर्णय से पहले गुजरना पड़ता है।
परिभाषाओं का संक्षिप्त विवरण
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धारा |
शब्द |
परिभाषा |
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2(1) |
संहिता |
अंतर्गत नियम शामिल हैं। |
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2(2) |
डिक्री |
वाद में विवादग्रस्त समस्त या किसी भी विषय के संबंध में पक्षकारों के अधिकारों का अंतिम रूप से अवधारण करने वाली न्यायनिर्णयन की औपचारिक अभिव्यक्ति। यह प्रारंभिक, अंतिम अथवा आंशिक रूप से दोनों हो सकती है। इसमें वादपत्र को नामंजूर किया जाना तथा धारा 144 के अधीन प्रश्नों का अवधारण सम्मिलित है। किंतु इसमें वे न्यायनिर्णयन सम्मिलित नहीं हैं जो आदेश के रूप में अपील योग्य हों तथा न ही व्यतिक्रम के लिये खारिजी करने का कोई आदेश। |
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2(3) |
डिक्रीदार |
कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पक्ष में कोई डिक्री पारित की गई है या कोई निष्पादन योग्य आदेश किया गया है। |
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2(4) |
जिला |
आरंभिक अधिकारिता वाले प्रधान सिविल न्यायालय की (जिसे इसमें इसके पश्चात् "जिला न्यायालय" कहा गया है) अधिकारिता की स्थानीय सीमाएँ अभिप्रेत हैं और इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय की मामूली आरंभिक सिविल अधिकारिता की स्थानीय सीमाएँ आती हैं। |
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2(5) |
विदेशी न्यायालय |
ऐसा न्यायालय अभिप्रेत है जो भारत के बाहर स्थित है और केंद्रीय सरकार के प्राधिकार से न तो स्थापित किया गया है और न चालू रखा गया है। |
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2(6) |
विदेशी निर्णय |
किसी विदेशी न्यायालय का निर्णय अभिप्रेत है। |
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2(7) |
सरकारी प्लीडर |
ऐसा कोई अधिकारी आता है जो सरकारी प्लीडर पर इस संहिता द्वारा अभिव्यक्त रूप से अधिरोपित कृत्यों का या उनमें से किन्हीं का पालन करने के लिये राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है और ऐसा कोई प्लीडर भी आता है जो सरकारी प्लीडर के निदेशों के अधीन कार्य करता है। |
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2(7-क) |
उच्च न्यायालय |
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के सम्बन्ध में "उच्च न्यायालय" से कलकत्ता उच्च न्यायालय अभिप्रेत है। |
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2(8) |
न्यायाधीश |
सिविल न्यायालय का पीठासीन अधिकारी अभिप्रेत है। |
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2(9) |
निर्णय |
न्यायाधीश द्वारा डिक्री या आदेश के आधारों का कथन अभिप्रेत है। |
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2(10) |
निर्णीतऋणी |
वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके विरुद्ध कोई डिक्री पारित की गई है या निष्पादन-योग्य कोई आदेश किया गया है। |
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2(11) |
विधिक प्रतिनिधि |
वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो मृत व्यक्ति की संपदा का विधि की दृष्टि से प्रतिनिधित्व करता है और इसके अंतर्गत कोई ऐसा व्यक्ति आता है जो मृतक की संपदा में दखलंदाजी करता है और जहाँ कोई पक्षकार प्रतिनिधि रूप में वाद लाता है या जहाँ किसी पक्षकार पर प्रतिनिधि रूप में वाद लाया जाता है वहाँ वह व्यक्ति इसके अंतर्गत आता है जिसे वह संपदा उस पक्षकार के मरने पर न्यागत होती है जो इस प्रकार वाद लाया है या जिस पर इस प्रकार वाद लाया गया है। |
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2(12) |
अंत:कालीन लाभ |
ऐसे लाभों पर ब्याज सहित वे लाभ अभिप्रेत हैं जो ऐसी संपत्ति पर सदोष कब्जा रखने वाले व्यक्ति को उससे वस्तुतः प्राप्त हुए हों या जिन्हें वह मामूली तत्परता से उससे प्राप्त कर सकता था, किन्तु सदोष कब्जा रखने वाले व्यक्ति द्वारा की गई अभिवृद्धियों के कारण हुए लाभ इसके अंतर्गत नहीं आएंगे। |
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2(13) |
जंगम संपत्ति |
उगती फसलें आती हैं। |
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2(14) |
आदेश |
सिविल न्यायालय के किसी विनिश्चय की प्ररूपिक अभिव्यक्ति अभिप्रेत है जो डिक्री नहीं है। |
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2(15) |
प्लीडर |
न्यायालय में किसी अन्य व्यक्ति के लिये उपसंजात होने और अभिवचन करने का हकदार कोई व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत अधिवक्ता, वकील और किसी उच्च न्यायालय का अटर्नी आता है। |
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2(16) |
विहित |
नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है। |
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2(17) |
लोक अधिकारी |
इसमें हर न्यायाधीश; अखिल भारतीय सेवा का प्रत्येक सदस्य; सरकार के अधीन सेवायोजन के दौरान सैन्य, नौसैनिक या वायु हर आयुक्त आफिसर या राजपत्रित अधिकारी; प्रत्येक न्यायालय का वह अधिकारी जिसका कर्त्तव्य किसी मामले का अन्वेषण या रिपोर्ट करे, अभिलेख तैयार करना या संरक्षित रखना, अथवा न्यायिक प्रक्रिया का निष्पादन करना हो; प्रत्येक वह व्यक्ति जिसे किसी व्यक्ति को परिरोध करने या रखने के लिये सशक्त है; ऐसे सभी सरकारी अधिकारी जिनका दायित्त्व अपराधों निवारण, लोक स्वास्थ्य या सुरक्षा का संरक्षण, या सरकार की संपत्ति अथवा वित्तीय हितों का प्रबंधन करना हो; तथा प्रत्येक अधिकारी जो सरकार की सेवा में हो या सरकार के वेतन पर हो, अथवा लोक कर्त्तव्य के निर्वहन हेतु फीस या कमीशन द्वारा पारिश्रमिक प्राप्त करता हो। |
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2(18) |
नियम |
प्रथम अनुसूची में अंतर्विष्ट अथवा धारा 122 या धारा 125 के अधीन निर्मित नियम और प्ररूप अभिप्रेत हैं। |
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2(19) |
निगम-अंश |
इसके अंतर्गत स्टाक, डिबेंचर स्टाक, डिबेंचर या बंधपत्र आते हैं। |
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2(20) |
हस्ताक्षरित |
किसी निर्णय या डिक्री की दशा के सिवाय, इसमें स्टाम्पित आता है। |
निष्कर्ष
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2 के अंतर्गत दी गई परिभाषाएँ सिविल प्रक्रिया विधि की व्याख्यात्मक आधारशिला हैं। डिक्री की स्पष्ट रूपरेखा से लेकर अंत:कालीन लाभ की सूक्ष्म गणना तक, ये शब्द न्यायालयों की अधिकारिता के प्रयोग, पक्षकारों की कार्यवाही में भागीदारी और न्यायिक कृत्यों के वर्गीकरण एवं प्रवर्तन को नियंत्रित करते हैं। सिविल विधि के प्रश्नों को सटीकता और आत्मविश्वास के साथ समझने के इच्छुक किसी भी न्यायिक सेवा अभ्यर्थी के लिये इन परिभाषाओं का पूर्ण ज्ञान होना अनिवार्य है।