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आपराधिक कानून

डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों की रोकथाम, प्रतिकर और शिकायत निवारण के लिये दिशा-निर्देश

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 05-Aug-2026

डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले के संबंध में (स्वयं संज्ञान कार्यवाही) 

"पूर्व से स्थापित तंत्र को व्यापक स्तर पर अपनाए जानेशिकायतों के शीघ्र निस्तारण तथा निरंतर अनुवर्ती कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है।" 

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांतन्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना 

स्रोत: उच्चतम न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

भारत के उच्चतम न्यायालय की एक पीठजिसमेंभारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांतन्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनाशामिल थेने डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों से संबंधित स्वतः संज्ञान कार्यवाही मेंसाइबर कपट की इस उभरती श्रेणी से संबंधित रोकथामअन्वेषण और निवारण तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से कई निदेश जारी किये 

  • पीठ ने भारत के महान्यायवादी आर. वेंकटरमणीभारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता एन. एस. नप्पिनई की दलीलें सुनने के उपरांत ये निर्देश पारित किए। न्यायालय ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को बैंकों हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अपनानेशिकायत निवारण एवं धनराशि की पुनर्बहाली संबंधी तंत्र को क्रियान्वित करने का निदेश दिया। साथ हीन्यायालय ने अंतर-विभागीय समिति को साझा दायित्व तथा पीड़ित प्रतिकर के लिये एक समुचित रूपरेखा पर विचार एवं परीक्षण करने का निदेश भी दिया 

डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले की कार्यवाही की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • देश भर में साइबर-आधारित वित्तीय कपट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुएउच्चतम न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही के माध्यम से "डिजिटल गिरफ्तारी" घोटालों के मुद्दे पर नजर रख रहा है। 
  • न्यायालय ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा दायर एक स्थिति रिपोर्ट पर ध्यान दियाजिसमें दर्ज किया गया है कि 57 बैंकों और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी के साथकुल ₹18.05 करोड़ की राशि से जुड़े 36,290 मामलों में कपट से प्राप्त धन की बहाली पूरी हो चुकी है। 
  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने डिजिटल गिरफ्तारी के मामले और संबंधित मामले भी दर्ज किये थे, 67 प्रथम-स्तरीय बैंक खातों में संव्यवहार के माध्यम से पीड़ितों की पहचान की थी और 16 राज्यों में 93 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। 
  • एक अंतर-विभागीय समिति ने CBI से अलग से अनुरोध किया था कि वह साइबर कपट का अन्वेषण अपने हाथ में लेने के लिये मौजूदा मौद्रिक सीमा को कम करने की व्यवहार्यता की परीक्षा करेऔर उन मामलों को एक साथ समूहित करने पर विचार करे जिनमें एक ही संगठित नेटवर्क शामिल है और जहाँ संचयी कपट विहित सीमा से अधिक है। 
  • इस प्रगति को स्वीकार करते हुएपीठ ने पाया कि पहले से मौजूद तंत्रों को व्यापक रूप से अपनानेमामलों का तेजी से निपटारा करने और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई की आवश्यकता हैजिसके कारण न्यायालय को आगे संरचनात्मक निदेश जारी करने पड़े। 

न्यायालय के निदेश क्या थे 

  • RBI की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर:न्यायालय ने RBI को निदेश दिया कि वह साइबर कपट से जुड़े खातों पर अस्थायी रोक लगाने के लिये बैंकों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को निर्धारित करते हुए चार सप्ताह के भीतर औपचारिक रूप से एक SOP अपनाए और प्रसारित करे। SOP में शिकायत निवारण तंत्रधन बहाली मॉड्यूल और इन दोनों के संबंध में जन जागरूकता के उपाय शामिल होने चाहिये। न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को यह भी निदेश दिया कि वे बैंक खातों को फ्रीज करने से संबंधित मामलों को निपटाने वाले न्यायालयों और न्यायनिर्णय अधिकारियों के संज्ञान में इस शिकायत निवारण तंत्र को लाएं और पीड़ित व्यक्तियों को पहले इस तंत्र का लाभ उठाने के लिये प्रोत्साहित करें। 
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निदेश:न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह के भीतर राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र अधिसूचित और संचालित करने तथा गृह मंत्रालय (MHA) की आवश्यक सहायता के साथ सूचना एवं संचार आयोग (I4C) के परामर्श से e-Zero FIR तंत्र अपनाने का निदेश दिया। अधिकारियों को साइबर कपट से संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने के मामलों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करने का भी निदेश दिया गया। 
  • जन जागरूकता उपायों पर:अंतर-विभागीय समिति को सभी राज्योंकेंद्र शासित प्रदेशोंमंत्रालयों और सरकारी विभागों को साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों की रोकथामशिकायत निवारण और धन वसूली मॉड्यूलऔर कपट से प्राप्त धन की हिरासत और वसूली संबंधी गृह मंत्रालय के मानक परिचालन (SOP) को कवर करने वाले व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम चलाने के लिये परामर्श जारी करने का निदेश दिया गया था। समिति को डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों की रोकथामकपट से प्राप्त धन की वसूली में सुविधा प्रदान करनेअन्वेषण में सहायता करने और लागू विधियों का अनुपालन सुनिश्चित करने के उपायों पर बैंकों के साथ समन्वय करने का भी निदेश दिया गया था। 
  • पीड़ित प्रतिकर ढाँचा:पीड़ित सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता को पहचानते हुएन्यायालय ने अंतर-विभागीय समिति को डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों के पीड़ितों के लिये साझा दायित्व और पीड़ित प्रतिकर ढाँचा लागू करने के प्रस्ताव की जांच करने का निदेश दिया। देश भर की विधिक सेवा समितियों को डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों की रोकथामसाइबर अपराध जागरूकतासाइबर सुरक्षा और उपलब्ध वसूली तंत्रों पर जन जागरूकता अभियान चलाने का निदेश दिया गया। 
  • CBI अन्वेषण की सीमा पर:न्यायालय ने अंतर-विभागीय समिति को साइबर कपट के मामलों में CBI अन्वेषण के लिये मौजूदा मौद्रिक सीमा को कम करने के प्रस्ताव की परीक्षा करने और यह विचार करने का निदेश दिया कि क्या एक ही संगठित नेटवर्क से जुड़े मामलों को CBI हस्तक्षेप के लिये विहित सीमा को पूरा करने के लिये समूहीकृत किया जा सकता है। 
  • दूरसंचार आधारित निवारक उपायों पर:पीठ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT) और I4C को ऑडियो और वीडियो कॉल के लिये दूरसंचार सेवाओं पर समय-आधारित प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव की जांच करने और प्रस्ताव की व्यवहार्यताउपयोगिता और संभावित विकल्पों पर न्यायालय के समक्ष एक संक्षिप्त टिप्पणी प्रस्तुत करने का निदेश दिया। 
  • इस मामले पर सितंबर में आगे विचार किया जाएगा। 

डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले क्या हैं? 

बारे में:  

  • एक साइबर अपराध जिसमें स्कैमर विधि प्रवर्तन/नियामक अधिकारियों (RBI, CBI, ED) का रूप धारण करके पीड़ितों पर मिथ्या अपराधों का आरोप लगाते हैं और उनसे पैसे या व्यक्तिगत डेटा की उगाही करते हैं। 
  • एक सामान्य सी दिखने वाली कॉल (पार्सल/ KYC) से शुरू होकरमामला गंभीर आपराधिक आरोपों में तब्दील हो जाता है। महत्त्वपूर्ण नोट:भारतीय विधि के अधीन "डिजिटल गिरफ्तारी" की कोई विधिक मान्यता नहीं है। 

इसकी सफलता के कारण: 

  • यह भयतात्कालिकता और सत्ता की आड़ में किये गए धोखे का फायदा उठाता है 
  • कमजोर व्यक्तिगत साइबर सुरक्षा 
  • डीपफेकआवाज की क्लोनिंगनंबर स्पूफिंग 
  • पता न लगाए जा सकने वाले भुगतान के तरीके और सीमा पार नेटवर्क 
  • कलंक के कारण कम जागरूकता/रिपोर्टिंग 

कार्यप्रणाली (चरण): 

  • प्रारंभिक संपर्क (नकली आधिकारिक संचार) 
  • दहशत फैलाना (मिथ्या आपराधिक आरोप लगाना) 
  • डिजिटल सत्यापन (नकली दस्तावेज़/वीडियो कॉल) 
  • अलगाव और प्रपीड़न (पीड़ित को परिवार/अधिवक्ताओं से अलग कर दिया जाता हैउसे "डिजिटल अभिरक्षा" में रखा जाता है) 
  • भुगतान की मांग (UPI/क्रिप्टो/गिफ्ट कार्ड) 
  • गुमशुदगी और धन शोधन (फंड को बिचौलियों के खातों के माध्यम सेविदेशों में स्थानांतरित करना) 

सरकारी जवाबी कार्रवाई: 

  • I4C ने 1,700 से अधिक Skype ID और 59,000 से अधिक WhatsApp अकाउंट ब्लॉक किये 
  • सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग सिस्टम ने 9.94 लाख शिकायतों के माध्यम से ₹3,431 करोड़ की बचत की। 
  • 6,69,000 से अधिक सिम कार्ड और 1,32,000 से अधिक IMEIs ब्लॉक किये गए। 
  • CyTrain प्लेटफॉर्म ने 98,000 से अधिक पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया 
  • साइबर दोस्तसंचारसाथी के माध्यम से जागरूकता 

लागू विधिक उपबंध: 

उपबंध 

अपराध 

दण्ड 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 204 

लोक सेवक का प्रतिरूपण 

माह से वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना। 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318 

छल 

वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना। 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 336 / 336(3)) 

कूटरचना 

वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना। 

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 308 

उद्दापन  

10 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना। 

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 

पहचान की चोरी 

वर्ष तक का कारावास अथवा ₹1 लाख तक का जुर्मानाया दोनों। 

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66घ  

कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से प्रतिरूपण द्वारा छल 

वर्ष तक का कारावास तथा ₹1 लाख तक का जुर्माना। 

प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय: 

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 63 के अधीनइलेक्ट्रॉनिक समन तभी वैध है जब वह एन्क्रिप्टेड होन्यायालय द्वारा मुहरबंद हो और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित हो - व्हाट्सएप या अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से कोई गिरफ्तारी नोटिस नहीं भेजा जा सकता हैइस स्थिति की पुष्टि उच्चतम न्यायालय ने की है।