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सांविधानिक विधि

पासपोर्ट होने से विदेश यात्रा का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता

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 21-Sep-2026

मोहम्मद आफताब बनाम भारत संघ और अन्य 

"केवल पासपोर्ट जारी होने से धारक को सीमाओं के पार मनमाने ढंग से आने-जाने का अधिकार नहीं मिल जाता... पुलिस या संबंधित अन्य अभियोजन एजेंसी के लिये यह हमेशा खुला रहता है कि वे पासपोर्ट धारक को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने के लिये न्यायालय में याचिका दायर करें जिससे उसे भारतीय तट छोड़ने से रोका जा सके।" 

न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ नेमोहम्मद आफताब बनाम भारत संघ और अन्य (2026) के मामलेमें यह अभिनिर्धारित किया कि पासपोर्ट अपने आप में लंबित आपराधिक मामलों का सामना कर रहे व्यक्ति के लिये विदेश में अप्रतिबंधित यात्रा की गारंटी नहीं देता है, और ऐसी यात्रा को विनियमित करने में पासपोर्ट प्राधिकरण और न्यायालयों की संबंधित भूमिकाओं को स्पष्ट किया। 

मोहम्मद आफताब बनाम भारत संघ और अन्य (2026) मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • याचिकाकर्त्ता के विरुद्ध दो आपराधिक मामले लंबित होने के कारण कथित तौर पर पासपोर्ट जारी करने के लिये उसका आवेदन रोक दिया गया था। 
  • उन्होंने पासपोर्ट जारी करने का निदेश देने के लिये इलाहाबाद उच्च न्यायालय का रुख किया। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • पासपोर्ट द्वारा विदेश यात्रा का स्वतः अधिकार प्रदान न करने के संबंध में: 
    न्यायालय ने टिप्पणी की कि मात्र पासपोर्ट जारी होने से ही सीमाओं के पार निर्बाध आवागमन संभव नहीं हो जाता, क्योंकि वास्तविक यात्रा के लिये मेजबान देश में वीजा आवेदन और आव्रजन प्रक्रियाओं का अनुपालन भी आवश्यक होता है। 
  • पासपोर्ट सरेंडर करने की मांग करने के लिये पुलिस/अभियोजन एजेंसियों की शक्ति पर: 
    न्यायालय ने माना कि यदि आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहा कोई पासपोर्ट धारक विदेश यात्रा करने का प्रयास करता है, तो पुलिस या अभियोजन एजेंसी के लिये यह खुला रहता है कि वे उचित न्यायालय में पासपोर्ट सरेंडर करने का निदेश मांगने के लिये याचिका दायर करें, जिससे उस व्यक्ति को भारतीय तट छोड़ने से रोका जा सके। 
  • न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता किस अवस्था में उत्पन्न होती है: 
    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अनुमति या प्रतिबंध हर मामले में स्वतः ही बाधा नहीं है - संबंधित न्यायालय शर्तों के अधीन यात्रा की अनुमति दे सकता है, और ऐसे विचार तभी उत्पन्न होते हैं जब व्यक्ति वास्तव में विदेश यात्रा करने का प्रयास करता है, न कि केवल पासपोर्ट जारी करने के चरण में। 
  • आपराधिक मामले के लंबित होने को पासपोर्ट देने से इंकार करने का आधार न मानने के संबंध में: 
    न्यायालय ने माना कि पासपोर्ट मूल रूप से एक सिविल दस्तावेज़ है, जिसके लिये एक नागरिक विधि के अधीन हकदार है, और पासपोर्ट अधिकारियों का यह अधिकार नहीं है कि वे केवल इसलिये पासपोर्ट देने से इंकार कर दें क्योंकि कोई आपराधिक मामला लंबित है - जब तक कि आवेदन में ऐसे मामले के लंबित होने की जानकारी को छुपाया न गया हो। 
  • महेश कुमार अग्रवाल बनाम भारत संघ के मामले पर विश्वास करते हुए: 
    उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय पर विश्वास करते हुए, न्यायालय ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ को याचिकाकर्त्ता के पासपोर्ट प्रदान करने के आवेदन पर विचार करने का निदेश देते हुए एक अंतरिम परमादेश जारी किया। 

पासपोर्ट से संबंधित सुसंगत विधिक उपबंध क्या हैं? 

बारे में: 

  • पासपोर्टसरकार द्वारा जारी किया गया एकआधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जो अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए किसी व्यक्ति की पहचान और राष्ट्रीयता को प्रमाणित करता है।

पासपोर्ट अधिनियम, 1967: 

  • पासपोर्ट अधिनियम भारत की संसद द्वारापासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों को जारी करने, भारत के नागरिकों और अन्य व्यक्तियों के भारत से प्रस्थान को विनियमित करने और इससे संबंधित या सहायक मामलों के लिये बनाया गया अधिनियम है। 
  • यह अधिनियमभारत के नागरिकोंऔर अन्य व्यक्तियों के भारत से प्रस्थान को विनियमित करता है और इससे संबंधित या सहायक मामलों के लिये भी लागू होता है। 
  • इस अधिनियम की धारा 6 में पासपोर्ट अस्वीकार करने के आधार बताए गए हैं। 

पासपोर्ट के प्रकार: 

पासपोर्ट और वीजा में अंतर: