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सांविधानिक विधि

अध्यादेश के पारित होने से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है

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 19-May-2026

स्रोत:द हिंदू 

परिचय 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक अध्यादेश जारी कर उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर 37 तक बढ़ा दिया है। उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026, संविधान के अनुच्छेद 123 के अधीन राष्ट्रपति की शक्तियों के अनुसार जारी किया गया है। 

  • संसद के सत्र शुरू होने पर अध्यादेश को दोनों सदनों में रखा जाएगा और यदि संसद के पुन: सत्र शुरू होने के बाद छह सप्ताह बीत जाने पर इस पर कोई प्रस्ताव पारित नहीं होता हैया यदि दोनों सदनों में इसे अस्वीकार करने वाले प्रस्ताव पारित हो जाते हैंतो यह अध्यादेश अपने आप समाप्त हो जाएगा। राष्ट्रपति किसी भी समय अध्यादेश को वापस ले सकते हैं। 

पृष्ठभूमि 

  • 16 मई के राजपत्र अधिसूचना में कहा गया है कि "संसद का सत्र नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति संतुष्ट हैं कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं जिनके कारण उनके लिये तत्काल कार्रवाई करना [अध्यादेश जारी करना] आवश्यक हो जाता है।" 
  • इस अध्यादेश ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा में संशोधन करके "तैंतीस" शब्द को "सैंतीस" से प्रतिस्थापित कर दिया है। 
  • इस अध्यादेश के लागू होने के साथ हीभारत के मुख्य न्यायाधीश सहित उच्चतम न्यायालय में स्वीकृत न्यायिक संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। 

उच्चतम न्यायालय की स्वीकृत शक्ति का विधायी इतिहास 

न्यायिक क्षमता का संकट 

  • यह कदम न्यायालय में वर्षों से व्याप्त लंबित वादों के सतत संकट से निपटने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा हैविशेषकर COVID-19 महामारी के पश्चातजब वादों की ई-फाइलिंग की व्यवस्था व्यापक रूप से प्रचलित हुई।  
  • वर्तमान में लंबित वादों की संख्या 93,000 से अधिक हैऔर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि जून माह में न्यायालय के ग्रीष्मकालीन अवकाश अथवा “आंशिक कार्य दिवसों” के दौरान यह संख्या एक लाख के आंकड़े तक पहुँच सकती है 
  • वर्तमान मेंउच्चतम न्यायालय में दो न्यायिक पद रिक्त हैं - भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशन्यायमूर्ति बी.आर. गवईजो नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त हुएऔर न्यायमूर्ति राजेश बिंदलजिनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हुआ। 
  • 2026 में तीन और न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने का कार्यक्रम है: न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और पंकज मिथल का कार्यकाल जून में समाप्त होगाऔर न्यायमूर्ति संजय करोल का अगस्त में। 
  • सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी छह वर्ष के अंतराल के बाद दी गई हैक्योंकि संसद ने अंतिम बार 2019 में उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 की धारा में संशोधन किया था। 

भारतीय संविधान के अंतर्गत अध्यादेश 

पहलू 

विवरण 

सांविधानिक उपबंध 

अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति)अनुच्छेद 213 (राज्यपाल) 

जारी करने वाला प्राधिकरण 

राष्ट्रपति (मंत्रिपरिषद की सलाह पर)राज्यों के लिये राज्यपाल 

कब जारी किया जाता है 

जब संसद / राज्य विधानमंडल का कोई सदन सत्र में न हो तथा तात्कालिक परिस्थितियाँ विद्यमान हों 

कौन जारी नहीं कर सकता 

स्वयं संसद अध्यादेश जारी नहीं कर सकती 

विधिक प्रभाव 

विधायिका द्वारा पारित अधिनियम के समान बल एवं प्रभाव 

अनुमोदन की आवश्यकता 

संसद के पुन: गठित होने के छह सप्ताह के भीतर इसका अनुमोदन होना आवश्यक है 

अधिकतम वैधता 

प्रख्यापन की तिथि से छह माह एवं छह सप्ताह 

दोनों सदनों के सत्र की तिथि 

यदि दोनों सदनों का सत्र भिन्न-भिन्न तिथियों पर प्रारंभ होतो बाद की तिथि मान्य होगी 

राष्ट्रपति की भूमिका 

मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता हैपुनर्विचार हेतु अनुशंसा लौटा सकता हैकिंतु पुनः भेजे जाने पर अध्यादेश प्रख्यापित करना अनिवार्य होता है 

वापसी 

राष्ट्रपति किसी भी समय अध्यादेश वापस ले सकता है 

संसदीय अस्वीकृति 

दोनों सदन अस्वीकृति प्रस्ताव पारित कर सकते हैंजिससे अध्यादेश निष्प्रभावी हो जाता हैअस्वीकृति बहुमत खोने का संकेत मानी जाती है  

शून्य अध्यादेश 

यदि अध्यादेश संसद की विधायी क्षमता से परे किसी विषय पर विधि बनाता हैतो वह शून्य होगा  

निष्कर्ष 

उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 का प्रख्यापन कार्यपालिका द्वारा उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों के गंभीर संकट से निपटने की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम है। स्वीकृत न्यायिक संख्या को 37 (मुख्य न्यायाधीश के सिवाय) तक बढ़ाकरयह अध्यादेश एक लाख से अधिक लंबित मामलों के बढ़ते ढेर का समाधान करता है। इस विषय पर छह वर्ष के विधायी अंतराल के बाद उठाया गया यह कदम न्यायिक क्षमता विस्तार की तात्कालिकता को रेखांकित करता है। यद्यपिइसकी अंतिम प्रभावशीलता मौजूदा और आगामी रिक्तियों को समय पर भरने और संसद द्वारा अध्यादेश के अनुमोदन पर निर्भर करेगी।