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आपराधिक कानून
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की शक्तियां
« »28-Oct-2026
स्रोत: द हिंदू
परिचय
दिल्ली के एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका की जमानतें स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया, जबकि दिल्ली पुलिस ने उनकी अभिरक्षा में तीन दिन का और विस्तार किए जाने की मांग की थी। कार्यवाही की अध्यक्षता सहायक पुलिस आयुक्त ऋतुराज ने की। कार्यकर्ताओं ने अपनी निरंतर अभिरक्षा की वैधता को चुनौती दी थी। इस मामले ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की भूमिका एवं शक्तियों तथा न्यायिक मजिस्ट्रेटों से उनकी भिन्नता की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
वर्तमान मामले में क्या हुआ?
- पुलिस ने CJP कार्यकर्ताओं के विरुद्ध निवारक कार्यवाही शुरू कर दी है, उन पर पहले हस्ताक्षरित शांति समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।
- 19 अक्टूबर को, विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) ने लोक शांति को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए उनकी अभिरक्षा की अवधि बढ़ा दी।
- बाद में उनकी जमानतें स्वीकार कर ली गईं तथा उन्हें इस शर्त पर एक वचनबद्धता के आधार पर रिहा किया गया कि जब तक जंतर-मंतर को अधिसूचना द्वारा विरोध-प्रदर्शन स्थल की श्रेणी से हटाया गया है, तब तक वे वहाँ किसी भी विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
- विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष की गई कार्यवाही केवल जंतर-मंतर पर की गई क्रियाकलापों के माध्यम से शांति बनाए रखने संबंधी बंधपत्र के कथित उल्लंघन से संबंधित थी, न कि 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई घटना के संबंध में पंजीकृत आपराधिक मामलों से।
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट कौन होता है?
- राज्य सरकारें विशिष्ट क्षेत्रों या प्रयोजनों के लिये विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) नियुक्त करती हैं और उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 15 के अधीन कार्यपालक मजिस्ट्रेटों द्वारा प्रयोग की जाने वाली शक्तियां प्रदान करती हैं।
- जबकि कार्यपालक मजिस्ट्रेट निरंतर प्रशासनिक और निवारक कार्य करते हैं, वहीं विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) को एक निर्दिष्ट अवधि, क्षेत्र या कार्य के लिये नियुक्त किया जाता है, जैसे कि ऐसी स्थितियां जिनमें निवारक कार्रवाई या लोक व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
- उनकी शक्तियां राज्य सरकार द्वारा उन्हें प्रदत्त अधिकार पर भी निर्भर करती हैं।
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के कार्य क्या हैं?
- विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) शक्तियों का उद्देश्य किसी अपराध के घटित होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय, अशांति की संभावना होने पर हस्तक्षेप करने की अनुमति देना है।
- वे निवारक और प्रशासनिक कार्यों के माध्यम से लोक व्यवस्था बनाए रखते हैं और शांति भंग होने से रोकते हैं।
- शांति बनाए रखने के लिये सुरक्षा: एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट शांति भंग करने या लोक शांति भंग करने की संभावना वाले व्यक्ति से यह कारण बताने के लिये कह सकता है कि उन्हें एक निर्दिष्ट अवधि के लिये शांति बनाए रखने के लिये बंधपत्र क्यों नहीं देना चाहिये, जो विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अधीन है (धारा 126, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता)।
- तत्काल आदेश: कार्यपालक मजिस्ट्रेट उपद्रव या संभावित खतरे के मामलों में तत्काल आदेश जारी कर सकते हैं, जहाँ ऐसी कार्रवाई से किसी वैध रूप से नियोजित व्यक्ति को बाधा या क्षति से बचाने, मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरे में डालने, लोक शांति भंग करने, दंगा या मारपीट को रोकने की संभावना हो।
- निवारक गिरफ्तारी: संज्ञेय अपराध को होने से रोकने के लिये पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं, यदि अन्यथा इसे रोकना संभव न हो (धारा 170, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता)। यह पुलिस का अधिकार है और केवल विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) तक ही सीमित नहीं है।
शांति बंधपत्र क्या है?
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट को किसी व्यक्ति से एक वर्ष तक की अवधि के लिये शांति बनाए रखने के लिये बंधपत्र निष्पादित करने की आवश्यकता करने की अनुमति देती है।
- जांच (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135): मजिस्ट्रेट प्राप्त सूचना की जांच करता है और कुछ परिस्थितियों में, जांच लंबित रहने के दौरान व्यक्ति को लिखित में कारण अभिलिखित करते हुए सुरक्षा प्रदान करने का निदेश दे सकता है।
- बंधपत्र का भंग (धारा 141(1)(ख), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता): शांति बंधपत्र के भंग पर, मजिस्ट्रेट बंधपत्र की शेष अवधि के लिये व्यक्ति की गिरफ्तारी या निरोध का आदेश दे सकता है।
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEMs), न्यायिक मजिस्ट्रेटों से किस प्रकार भिन्न हैं?
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पहलू |
न्यायिक मजिस्ट्रेट |
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट |
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स्रोत |
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 9 (प्रथम एवं द्वितीय वर्ग के न्यायालय) |
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 15 |
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नियुक्ति |
पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है; राज्य सरकार न्यायालयों की संख्या एवं स्थान निर्धारित करती है। |
राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जाते हैं। |
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प्रकृति |
न्यायिक प्रणाली का हिस्सा होते हैं तथा स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। |
कार्यपालिका का हिस्सा होते हैं तथा इनके कार्य प्रशासनिक एवं निवारक कार्यों तक सीमित होते हैं। |
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आपराधिक विचारण |
विचारण संचालित करते हैं तथा विधि द्वारा अनुमत दण्ड अधिरोपित कर सकते हैं। |
आपराधिक विचारण संचालित नहीं कर सकते और न ही व्यक्तियों को दोषसिद्ध कर सकते हैं। |
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अभिरक्षा और जमानत |
अभिरक्षा संबंधी कार्यवाहियों एवं जमानत आवेदनों पर विचार करते हैं। |
पुलिस अभिरक्षा अथवा न्यायिक अभिरक्षा प्रदान करने के लिये प्राधिकृत नहीं होते हैं। |
क्या विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेटों (SEMs) के कार्यों की न्यायालयों द्वारा समीक्षा की जा सकती है?
- हां हाँ, विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेटों के कार्यों की वैधता सुनिश्चित करने तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से वे न्यायिक पुनर्विलोकन एवं प्रशासनिक पर्यवेक्षण के अधीन होते हैं।
- उनके आदेशों को आदेश की प्रकृति तथा उपलब्ध विधिक उपचार के आधार पर सक्षम न्यायालय अथवा प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।
निष्कर्ष
CJP के कार्यकर्ताओं की रिहाई इस तथ्य को रेखांकित करती है कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट, BNSS के अधीन निवारक एवं प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य शांति बनाए रखने संबंधी बंधपत्र (Peace Bonds) जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से लोक व्यवस्था बनाए रखना है। न्यायिक मजिस्ट्रेटों के विपरीत, वे विचारण संचालित नहीं कर सकते, व्यक्तियों को दोषसिद्ध नहीं कर सकते और न ही अभिरक्षा प्रदान कर सकते हैं। उनके कार्य न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन रहते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि निवारक शक्तियों का प्रयोग विधि की सीमाओं के भीतर तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समुचित ध्यान रखते हुए किया जाए।