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सांविधानिक विधि

जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर विवाद

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 23-Jul-2026

स्रोत:द हिंदू 

परिचय 

उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संबंधित उच्च न्यायालयों की सहमति के अधीन जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर विचार करने का निदेश दिया है। यह निदेश अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ मामले की सुनवाई के दौरान आयाजो काफी समय से लंबित है और जिसमें यह भी विचार किया जा रहा है कि क्या देश भर में जिला न्यायपालिका के लिये 62 वर्ष की एक समान सेवानिवृत्ति आयु लागू होनी चाहिये 

अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ मामला क्या है? 

  • यह मामला भारत भर में अधीनस्थ न्यायपालिका की सेवा शर्तों से संबंधित एक लंबे समय से चल रही रिट याचिका है। न्यायालय के समक्ष एक प्रश्न यह भी है कि क्या जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु को राज्योंकेंद्र शासित प्रदेशों या उच्च न्यायालयों की आपत्तियों के होते हुए भीपूरे देश में समान रूप से 62 वर्ष तक बढ़ाया जाना चाहिये 
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांतन्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। 

इस विवाद्यक की पृष्ठभूमि: 

  • कुछ राज्यों में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष किये जाने के बादमध्य प्रदेश ने अपने न्यायिक अधिकारियों के लिये भी इसी प्रकार की वृद्धि पर सहमति व्यक्त की थीलेकिन उच्च न्यायालय ने इस विषय पर उच्चतम न्यायालय के 2022 के आदेश के मद्देनजर अपनी सहमति रोक दी। यह विवाद फिर से उच्चतम न्यायालय पहुँचाजिसके परिणामस्वरूप मई 2025 के एक आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर कोई रोक नहीं है। 
  • मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट जारी कर न्यायालय को सूचित किया है कि उसकी पूर्ण पीठ ने जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष करने का संकल्प लिया है। तेलंगाना ने भी कथित तौर पर ऐसा ही कदम उठाया है। यद्यपिपंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों ने इस वृद्धि का विरोध किया हैउनका कहना है कि उनकी अधिकारिता में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष या उससे कम है। 
  • इससे पहले न्यायालय ने जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु को बढ़ाकर 62 करने की शेट्टी आयोग की सिफारिश को स्वीकार करने से इंकार कर दिया थाऔर जब यह विवाद्यक पिछली बार उठा था तब भी इस पर अपनी राय देने का कोई अवसर नहीं मिला थाक्योंकि दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग ने इस बिंदु पर कोई सिफारिश नहीं की थी। 

न्यायालय ने क्या कहा? 

  • पीठ ने संकेत दिया कि वह अखिल भारतीय एकरूपता के व्यापक प्रश्न का समाधान उचित समय पर करेगी। इस बीचउसने अपने पूर्व आदेश में संशोधन कियाजिसमें कुछ राज्यों के जिला न्यायाधीशों को 61 वर्ष की आयु तक बिना शर्त सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई थी। संशोधित निर्देश के अधीनअधिकारी अब 60 वर्ष की आयु के बाद तभी सेवा में बने रह सकते हैं जब संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और उच्च न्यायालय दोनों वेतन वृद्धि पर सहमत हों। 
  • यदि ऐसी सहमति बन जाती हैतो यह सुधार अप्रैल, 2026 से भूतलक्षी रूप से लागू होगा। 
  • इससे पहले यह आपत्ति उठाई गई थी कि 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले जिला न्यायाधीश उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों (जो 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं) के साथ पदानुक्रम को बाधित करेंगेइस पर मुख्य न्यायाधीश कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यदि जिला न्यायाधीश भी उस आयु में सेवानिवृत्त होते हैं तो कोई वास्तविक समस्या नहीं होगी। 
  • मामले की गंभीरता को देखते हुएपीठ ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निदेश दियाजिन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ भटनागर द्वारा संकलित करके न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 61 या 62 वर्ष की आयु सीमा बढ़ाने के पक्ष में राज्यों और उच्च न्यायालयों को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने की आवश्यकता नहीं हैजबकि अन्य राज्य और उच्च न्यायालय निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रति- शपथपत्र दाखिल कर सकते हैं। 

निष्कर्ष  

उच्चतम न्यायालय का नवीनतम आदेश सेवा विधि से जुड़े एक लंबे समय से चले आ रहे प्रश्न के संतुलित समाधान को दर्शाता है। इसमें जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु में अखिल भारतीय एकरूपता की आवश्यकता और राज्यों में व्याप्त विभिन्न स्थितियों की संघीय वास्तविकता के बीच संतुलन स्थापित किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों से दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र प्राप्त होने की उम्मीद के साथन्यायालय शेट्टी आयोग की सिफारिशों के बाद से अनसुलझे इस मुद्दे के अंतिम समाधान की ओर अग्रसर प्रतीत होता है।