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सिविल कानून

एक वर्ष से अधिक विलंबित जन्म रजिस्ट्रीकरण का आदेश केवल प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट ही दे सकते हैं

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 03-Sep-2026

सेवियो जोस जेवियर वीगास बनाम डॉ. मारियानो गोडिन्हो 

"प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास सभी आवश्यक साधन होते हैं... कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास उपर्युक्त अधिकार सहित ऐसे न्यायनिर्णय संबंधी साधन नहीं होते हैं।" 

न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस 

बॉम्बे उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस नेसाविओ जोस जेवियर विएगास बनाम डॉ. मारियानो गोडिन्हो (2026) के मामलेमें यह अभिनिर्धारित किया कि जन्म के एक वर्ष से अधिक विलंबित रजिस्ट्रीकरण का आदेश केवल प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के अधीन दिया जा सकता हैऔर मध्य प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 1999 के नियम को उस हद तक निरस्त/कम कर दियाजिस हद तक यह कार्यपालक मजिस्ट्रेट को इस अधिकारिता का प्रयोग करने की अनुमति देता था। 

सेवियो जोस जेवियर वीगास बनाम डॉ. मारियानो गोडिन्हो (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • याचिकाकर्त्ता ने पणजी नगर निगम के आयुक्त द्वारा 13 दिसंबर, 2023 को पारित एक आदेश को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की थीजिसमें 22 नवंबर, 1999 को किये गए उनके जन्म रजिस्ट्रीकरण को रद्द कर दिया गया था। 
  • याचिकाकर्त्ता ने तर्क दिया कि रजिस्ट्रार ने अधिनियम की धारा 15 के अधीन अपनी अधिकारिता से बाहर जाकर कार्य किया था और उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर विचार करने में असफल रहा था। 
  • याचिकाकर्त्ता ने दावा किया कि उसका जन्म 11 जून, 1975 को हुआ था और उसका जन्म केवल 1999 में रजिस्ट्रीकृत हुआ थाजब वह पहले से ही 24 वर्ष का थाकथित तौर पर तिसवाड़ी के मामलतदार के 11 सितंबर, 1999 के आदेश के अनुसारजो एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत था। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • विलंबित रजिस्ट्रीकरण के लिये सांविधिक योजना पर: 
    न्यायालय ने माना कि अधिनियम की धारा 13(3) और धारा 30 के साथ-साथ 1970 के नियमों के नियम 10 या 1999 के नियमों के नियम को संयुक्त रूप से पढ़ने से पता चलता है कि जन्म होने के एक वर्ष बाद उसकी प्रविष्टि का आदेश प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा ही दिया जाना चाहियेकिसी और द्वारा नहींजबकि रजिस्ट्रार के पास कपटपूर्ण या अनुचित तरीके से प्रविष्टि किये जाने की स्थिति में कार्रवाई करने की शक्ति बनी रहती है। 
  • 1999 के रजिस्ट्रीकरण की वैधता पर: 
    न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्त्ता का 1999 का रजिस्ट्रीकरणजो तब किया गया था जब वह पहले से ही 24 वर्ष का थाप्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के आदेश के अभाव में वैध रूप से नहीं किया जा सकता थाऔर ऐसे आदेश के बिना 1999 में उसके जन्म का रजिस्ट्रीकरण नहीं किया जा सकता था। 
  • कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार की अपर्याप्तता पर: 
    न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि तिसवाड़ी के मामलतदारजो एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट हैंका आदेश धारा 13(3) को संतुष्ट कर सकता हैयह मानते हुए कि केवल प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास ही वे न्यायनिर्णयात्मक उपकरण हैं जो प्रावधान में परिकल्पित हैंऔर विधायी आशय विशेष रूप से प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को अधिकार प्रदान करना था। 
  • 1999 के नियमों के नियम की वैधता पर: 
    न्यायालय ने माना कि मध्य प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 1999 के नियम में कार्यपालक मजिस्ट्रेट को शामिल करने को उस हद तक निरस्त/कम करके पढ़ा जाना चाहियेजिस हद तक यह कार्यपालक मजिस्ट्रेट को जन्म और मृत्यु के विलंबित रजिस्ट्रीकरण को सत्यापित करने की अनुमति देता हैऔर इस प्रकार की अधिकारिता को धारा 13(3) के अधीन संबंधित अधिकारिता के प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट तक सीमित करता है। 
  • तदनुसारन्यायालय ने रिट अधिकारिता के अंतर्गत विवादित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई मामला नहीं पाया और रिट याचिका खारिज कर दी। 

जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 क्या है? 

जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969: 

  • जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (1969 का अधिनियम संख्यांक18) भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जो 31 मई, 1969 को लागू हुआ था। 
  • यह जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के लिये एक समानराष्ट्रव्यापी ढाँचा प्रदान करता हैजिससे राज्यों के बीच महत्त्वपूर्ण आंकड़ों की तुलना करना संभव हो जाता है। इसने पूर्ववर्ती जन्ममृत्यु और विवाह रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1886 का स्थान लिया है। 

प्रमुख संशोधन: 

  • प्रत्यायोजित विधान प्रावधान (संशोधन) अधिनियम, 1985 (1985 का 4) - अधिनियम के अंतर्गत प्रत्यायोजित/अधीनस्थ विधान से संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया गया। 
  • जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 (2023 का अधिनियम) — 26 जुलाई, 2023 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया; 1 अगस्त, 2023 को लोकसभा द्वारा और अगस्त, 2023 को राज्यसभा द्वारा पारित किया गया। यह संशोधन: 
    • यह विधेयक भारत के रजिस्ट्रार जनरल कोरजिस्ट्रीकृत जन्म और मृत्यु काराष्ट्रीय डेटाबेस बनाए रखने का आदेश देता है। 
    • यह विधेयक मुख्य रजिस्ट्रारों (राज्यों द्वारा नियुक्त) औररजिस्ट्रारों (स्थानीय अधिकारिताओं के लिये नियुक्त) को रजिस्ट्रीकृत जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ साझा करने के लियेबाध्य करता है । 

धारा 13 — विहित समय सीमा के बाद जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण: 

धारा 13 में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रीकरण के लिये एक श्रेणीबद्ध तंत्र निर्धारित किया गया हैजो सामान्य समय सीमा के भीतर दर्ज नहीं किये गए थेयह इस बात पर आधारित है कि कितनी देरी हुई है: 

  • धारा 13(1):यदि किसी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण निर्धारित अवधि (सामान्यतः 21 दिन) के भीतर नहीं हुआ हैतो भी उसका रजिस्ट्रीकरण उसके होने केएक वर्ष के भीतर निम्नलिखित तिथि पर किया जा सकता है: 
    • विहित फीस का संदायऔर 
    • राज्य सरकार द्वारा विहित प्र रूप में लिखित घोषणा पत्र और अधिसूचित प्राधिकारी से प्राप्त प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना। 
  • धारा 13(3):जन्म या मृत्यु जोघटित होने केएक वर्ष के भीतर रजिस्ट्रीकृत नहीं हुई हैउसे केवलप्रथम वर्ग मजिस्ट्रेटयाप्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेटद्वारा जारीआदेश परऔर विहित तरीके से विधिवत सत्यापन और विहित फीस के संदाय के बाद ही रजिस्ट्रीकृत किया जा सकता है।