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सांविधानिक विधि
NEET-UG 2026 विवाद के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
«27-Jul-2026
स्रोत: द हिंदू
परिचय
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद की नैतिक उत्तरदायितत्व लेते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के अधीन तत्काल प्रभाव से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निदेश दिया।
- भारत के राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान द्वारा उसी दिन पहले की गई घोषणा के बाद, संविधान के अनुच्छेद 75(2) के अधीन प्रयोग करते हुए, केंद्रीय मंत्रिपरिषद से उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया।
- पहले से ही मंत्रिमंडल में मंत्री रहे प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
- यह इस्तीफा 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बाद आया है।
पृष्ठभूमि
- 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक होने के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने अन्वेषण CBI को सौंप दिया, परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया।
- 21 जून, 2026 को 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिये पुनर्परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसके परिणाम 16 जुलाई, 2026 को घोषित किये गए थे।
- सरकार ने यह भी घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से NEET-UG परीक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के माध्यम से आयोजित की जाएगी।
- प्रधान ने अपने इस्तीफे से पहले के दिनों में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन तेज होने का हवाला दिया, जिसे उन्होंने अपने फैसले को प्रभावित करने वाले एक कारक के रूप में बताया।
मंत्री द्वारा इस्तीफे के लिये बताए गए कारण
- प्रधान ने कहा कि विवाद शुरू होने के बाद से उन्होंने "जवाबदेही से कभी मुंह नहीं मोड़ा" और कथित अनियमितताओं के बारे में पता चलने पर उन्होंने तुरंत कार्रवाई की थी।
- उन्होंने चिंता व्यक्त की कि लगातार विरोध प्रदर्शन और संभावित मुकदमेबाजी छात्रों के भविष्य को लंबे विधिक विवादों में उलझा सकती है।
- उन्होंने कहा कि उनका संकल्प है कि परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग के कारण किसी भी मेधावी छात्र को नुकसान न हो।
- उन्होंने पिछले दस दिनों को व्यक्तिगत रूप से कष्टदायक बताया और स्पष्ट किया कि यह मामला उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से संबंधित नहीं था, अपितु छात्रों को होने वाली और अधिक बाधाओं को रोकने से संबंधित था।
विधायी प्रतिक्रिया: कागजी दस्तावेजों के रिसाव के लिये कठोर दण्ड
- प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने के अपराधों के लिये कठोर दण्ड का प्रस्ताव करने वाले एक नए विधेयक को मंजूरी दी गई।
- यह विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किये जाने की उम्मीद है।
- विद्यमान ढाँचा : सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 वर्तमान में संगठित परीक्षा कपट के लिये तीन से दस वर्ष का कारावास और कम से कम 1 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान करता है।
- प्रस्तावित परिवर्तन:
- अधिकतम कारावास का दण्ड बढ़ाकर दस वर्ष तक कर दिया गया है, साथ ही 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- न्यूनतम कारावास की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पाँच वर्ष कर दी गई है।
सांविधानिक प्रावधान शामिल है
- अनुच्छेद 75(2): इसमें उपबंधित किया गया है कि मंत्री राष्ट्रपति की इच्छा के अनुसार पद पर बने रहते हैं। मंत्री का त्यागपत्र प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किये जाने और राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किये जाने पर प्रभावी होता है, जैसा कि इस मामले में हुआ।
निष्कर्ष
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक विवाद से उपजा एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है, जिसे अनुच्छेद 75(2) के अधीन सांविधानिक तंत्र के माध्यम से लागू किया गया है। मंत्रिस्तरीय प्रभार में परिवर्तन के साथ-साथ, इस घटना ने केंद्र सरकार को परीक्षा कपट के लिये कठोर दण्डात्मक ढाँचा अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिये प्रेरित किया है, जो भारत में बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर जारी चिंताओं को दर्शाता है।