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सिविल कानून
प्रतिस्पर्धी कीटनाशी अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रदान किये जाने को चुनौती नहीं दे सकता है
« »04-Nov-2026
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क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड बनाम धनुका एग्रीटेक लिमिटेड एवं अन्य “हमारे समक्ष निजी प्रत्यर्थी को ‘व्यथित व्यक्ति' नहीं कहा जा सकता।” न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले |
स्रोत: उच्चतम न्यायायल
चर्चा में क्यों?
उच्चतम न्यायालय की न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश एवं न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड बनाम धनुका एग्रीटेक लिमिटेड और अन्य (2026) के मामले में निर्णय दिया। न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारित निर्णय को अपास्त कर दिया तथा कीटनाशी अधिनियम, 1968 के अंतर्गत क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन को प्रदान किये गए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को पुनः बहाल कर दिया।
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड बनाम धनुका एग्रीटेक लिमिटेड (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- रजिस्ट्रीकरण समिति ने क्रिस्टल फसल संरक्षण (अपीलकर्त्ता) को कीटनाशी अधिनियम, 1968 की धारा 9(3) के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किया।
- उक्त रजिस्ट्रीकरण के अंतर्गत अपीलार्थी को निम्नलिखित की अनुमति प्रदान की गई थी:
- हैलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल टेक्निकल (Halosulfuron Methyl Technical) का आयात करना, और
- भारत में इसके फॉर्मूलेशन (Formulation) का विनिर्माण करना।
- धनुका एग्रीटेक लिमिटेड (प्रत्यर्थी), जो एक वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धी थी, ने अधिनियम की धाराओं 10 एवं 11 के अंतर्गत अपीलीय/पुनरीक्षण प्राधिकारी के समक्ष उक्त रजिस्ट्रीकरण को चुनौती दी।
- उक्त चुनौती अस्वीकार कर दी गई, जिसके पश्चात् प्रत्यर्थी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
- एकल न्यायाधीश ने अपीलार्थी को प्रदान किये गए रजिस्ट्रीकरण को यथावत् रखा।
- खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उक्त निर्णय को उलटते हुए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को अपास्त कर दिया।
- तत्पश्चात् अपीलार्थी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपील प्रस्तुत की।
उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचारणीय प्रश्न:
- क्या कोई वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धी कीटनाशी अधिनियम, 1968 की धारा 10 के अंतर्गत किसी अन्य कंपनी को रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किये जाने को चुनौती दे सकता है? साथ ही, ऐसे रजिस्ट्रीकरण को प्रदान किये जाने के संबंध में उच्च न्यायालय न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति का प्रयोग किस सीमा तक कर सकता है?
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
कीटनाशी अधिनियम, 1968 के संबंध में:
- न्यायालय ने कहा कि धारा 10 के अंतर्गत केवल रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने से इंकार करने अथवा विद्यमान रजिस्ट्रीकरण को निरस्त करने संबंधी निर्णय के विरुद्ध ही अपील का उपबंध किया गया है।
- कोई वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धी इस उपबंध का उपयोग किसी अन्य कंपनी को प्रदान किये गए रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र को चुनौती देने के लिये नहीं कर सकता है।
- धारा 10 केवल रजिस्ट्रीकरण से इंकार करने अथवा रजिस्ट्रीकरण को निरस्त करने संबंधी निर्णयों पर लागू होती है तथा ऐसे निर्णयों की सूचना उस व्यक्ति को दी जानी आवश्यक है, जो उन्हें चुनौती देने का अधिकारी है।
“कोई व्यथित व्यक्ति” पदावली के संबंध में:
- प्रत्यर्थी ने धारा 10 में प्रयुक्त “कोई व्यथित व्यक्ति” पदावली पर विश्वास किया।
- न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि उक्त पदावली का अर्थ उन विशिष्ट निर्णयों के संदर्भ में ही लगाया जाना चाहिये, जिनके विरुद्ध संबंधित उपबंध अपील का अधिकार प्रदान करता है।
- अतः एक वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धी होने के नाते प्रत्यर्थी को धारा 10 के अंतर्गत अपील प्रस्तुत करने का अधिकारी “व्यथित व्यक्ति” (Person Aggrieved) नहीं माना जा सकता।
न्यायिक पुनर्विलोकन की सीमाओं के संबंध में:
- न्यायालय ने कहा कि कार्यपालिका के निर्णयों का न्यायिक पुनर्विलोकन सीमित होता है, विशेषकर वाणिज्यिक संस्थाओं को अनुज्ञप्ति प्रदान करने संबंधी निर्णयों के मामले में।
- खंडपीठ ने वैधानिक प्राधिकारियों द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को उलट दिया था, जिन्हें एकल न्यायाधीश पहले ही यथावत् रख चुका था।
- ऐसा करके उच्च न्यायालय ने वस्तुतः अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य किया तथा न्यायिक पुनर्विलोकन की अनुज्ञेय सीमाओं का अतिक्रमण किया।
रजिस्ट्रीकरण प्रदान किये जाने से पूर्व की गई जांच के संबंध में:
- न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र पर ध्यान दिया, जिसमें रजिस्ट्रीकरण प्रदान किये जाने से पूर्व की गई जांच एवं परीक्षण की प्रक्रिया का विवरण दिया गया था।
- इसमें प्रयोगशाला परीक्षण भी सम्मिलित था, जिसमें उत्पाद की शुद्धता 98.53% पाई गई थी।
निर्णय:
- न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि उच्च न्यायालय का निर्णय न तो विधि की दृष्टि से और न ही गुण-दोष के आधार पर कायम रखा जा सकता है।
- अपील स्वीकार कर ली गई।
- अपीलार्थी को प्रदान किया गया रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र पुनः बहाल कर दिया गया।
कीटनाशी अधिनियम, 1968 की धाराएँ 9, 10 और 11 क्या हैं?
बारे में:
- कीटनाशी अधिनियम, 1968 कीटनाशकों के आयात, विनिर्माण, विक्रय, परिवहन, वितरण एवं उपयोग को विनियमित करता है। इस अधिनियम का उद्देश्य मनुष्यों एवं पशुओं के जीवन और स्वास्थ्य के प्रति उत्पन्न होने वाले जोखिमों की रोकथाम करना है।
- इस अधिनियम के अंतर्गत सरकार को परामर्श प्रदान करने हेतु केंद्रीय कीटनाशी समिति तथा कीटनाशियों के रजिस्ट्रीकरण हेतु रजिस्ट्रीकरण समिति की स्थापना का उपबंध किया गया है।
धारा 9 – कीटनाशियों का रजिस्ट्रीकरण:
- कोई भी व्यक्ति, जो किसी कीटनाशक का आयात अथवा विनिर्माण करना चाहता है, उसे उक्त कीटनाशियों के रजिस्ट्रीकरण हेतु रजिस्ट्रीकरण समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
- धारा 9(3): रजिस्ट्रीकरण समिति जांच करने के पश्चात्, यदि इस बात से संतुष्ट हो जाती है कि संबंधित कीटनाशक प्रभावकारित एवं मनुष्यों तथा पशुओं की सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त है, तो उसका रजिस्ट्रीकरण कर सकती है। इसके पश्चात् समिति एक रजिस्ट्रीकरण संख्या आवंटित करती है तथा रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र जारी करती है।
- यदि समिति रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने से इंकार करती है, तो उसे अपने निर्णय की सूचना आवेदक को देनी अनिवार्य है।
धारा 10 – अपील:
- धारा 10 के अंतर्गत रजिस्ट्रीकरण समिति के निर्णयों के विरुद्ध केंद्र सरकार के समक्ष अपील प्रस्तुत करने का उपबंध किया गया है।
- इस मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई व्याख्या के अनुसार, निम्नलिखित निर्णयों के विरुद्ध ही अपील प्रस्तुत की जा सकती है:
- रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने से इंकार करने संबंधी निर्णय, या
- पूर्व में प्रदान किये गए रजिस्ट्रीकरण को निरस्त करने संबंधी निर्णय (जिसका उपबंध धारा 14 में किया गया है)।
- अपील निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिये। उक्त समय-सीमा संबंधित व्यक्ति को निर्णय की संसूचना दिये जाने की तिथि से प्रारंभ होती है।
धारा 11 – पुनरीक्षण:
- धारा 11 के अंतर्गत केंद्र सरकार को इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण समिति की कार्यवाहियों के संबंध में पुनरीक्षण संबंधी शक्तियां प्रदान की गई हैं।
प्रमुख विशेषताएँ:
- रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य है: अधिनियम के अंतर्गत रजिस्ट्रीकरण के बिना किसी भी कीटनाशक का आयात अथवा विनिर्माण नहीं किया जा सकता है।
- सुरक्षा एवं प्रभावकारिता प्रमुख मानदंड हैं: रजिस्ट्रीकरण समिति कीटनाशक की प्रभावकारिता तथा मनुष्यों एवं पशुओं के लिये उसकी सुरक्षा के वैज्ञानिक परीक्षण एवं जांच के आधार पर रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने का निर्णय लेती है।
- अपील का सीमित अधिकार: धारा 10 के अंतर्गत अपील का अधिकार रजिस्ट्रीकरण प्रदान करने से इंकार अथवा पूर्व में प्रदान किये गए रजिस्ट्रीकरण को निरस्त करने से प्रभावित व्यक्ति को प्राप्त है। सामान्यतः ऐसा व्यक्ति आवेदक अथवा रजिस्ट्रीकरण धारक होता है।
- प्रतिस्पर्धियों को अपील का अधिकार नहीं: कोई वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धी धारा 10 के अंतर्गत “व्यथित व्यक्ति” की श्रेणी में नहीं आता है तथा वह किसी प्रतिस्पर्धी कंपनी को प्रदान किये गए रजिस्ट्रीकरण के विरुद्ध अपील प्रस्तुत नहीं कर सकता है।