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सिविल कानून

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69क केंद्र सरकार को केवल विशिष्ट सामग्री ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मंच को अवरुद्ध करने का अधिकार प्रदान करती है

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 20-Jun-2026

टेलीग्राम एफ.जेड. एल.एल.सी. और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य 

"सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69क के अधीन अवरोधक शक्ति व्यक्तिगत सामग्री तक ही सीमित नहीं है।" 

न्यायमूर्ति तेजस कारिया 

स्रोत: दिल्ली उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तेजस कारिया की अवकाशकालीन पीठ ने टेलीग्राम एफ.जेड. एल.एल.सी. और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य (2026)के मामले मेंकेंद्र सरकार के उस आपातकालीन आदेश को चुनौती देने वाली टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दीजिसमें भारत में प्लेटफॉर्म को अस्थायी रूप से अवरुद्ध किया गया था। न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69क के अधीन केंद्र सरकार की उस शक्ति को बरकरार रखाजिसके अधीन वह किसी भी मध्यस्थ प्लेटफॉर्म को अवरुद्ध कर सकती हैन कि केवल उस पर होस्ट की गई विशिष्ट सामग्री को। 

टेलीग्राम एफ.जेड. एल.एल.सी. बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • नीट की पुनर्परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की आशंकाओं के मद्देनजरइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69क के अधीन एक आपातकालीन आदेश जारी कर भारत में 22 जून तक टेलीग्राम को प्रतिबंधित कर दिया है। 
  • टेलीग्राम ने दावा किया कि उसने NEET से संबंधित विधिविरुद्ध सामग्री को हटाने के लिये सक्रिय उपाय किये हैंजिसमें प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री से निपटने के लिये AI और मशीन लर्निंग टूल का उपयोग करना शामिल है। 
  • टेलीग्राम ने तर्क दिया कि निरोध आदेश में विचार-विमर्श का अभाव थाकेंद्र द्वारा कोई स्वतंत्र संतुष्टि दर्ज नहीं की गई थीऔर नामित अधिकारी ने केवल आरोपों को दोहराया था। 
  • टेलीग्राम ने आगे तर्क दिया कि धारा 69क व्यक्तिगत पोस्ट या संदेशों को ब्लॉक करने तक सीमित हैऔर इसका प्रयोग पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के लिये नहीं किया जा सकता है। 
  • इससे व्यथित होकर टेलीग्राम ने ब्लॉकिंग आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

  • धारा 69क के अंतर्गत "सूचना" के दायरे पर: न्यायालय ने माना कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 2(1)(v) के अंतर्गत "सूचना" की परिभाषा इतनी व्यापक है कि इसमें कोडकंप्यूटर प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर शामिल हैंऔर इसलिये इसमें एप्लिकेशन या सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। तदनुसारन्यायालय ने टेलीग्राम के इस तर्क को खारिज कर दिया कि अवरोधक शक्ति विशिष्ट सामग्री तक ही सीमित है। 
  • विचार-विमर्श के आधार पर: न्यायालय ने माना कि आपातकालीन निरोध आदेश में विचार-विमर्श की कमी नहीं थीयह देखते हुए कि अंतरिम आदेश में इसकी आपातकालीन प्रकृति को देखते हुए पर्याप्त कारण बताए गए थेऔर धारा 69क के अधीन सांविधिक प्रक्रिया का 2009 के निरोध नियमों के साथ विधिवत पालन किया गया था। 
  • अंतिम आदेश में कारणों को पूरक करने के संबंध में: न्यायालय ने टेलीग्राम के इस तर्क को खारिज कर दिया कि अंतिम आदेश अंतरिम आदेश में अभिलिखित कारणों को पूरक नहीं कर सकतायह मानते हुए कि सांविधिक योजना स्पष्ट रूप से एक अंतरिम निर्देश की परिकल्पना करती है जिसके बाद ब्लॉक की पुष्टि या निरस्त करने वाला अंतिम आदेश पारित होने से पहले निर्णय के बाद की सुनवाई होती है। 
  • आनुपातिकता के संबंध में: न्यायालय ने माना कि अस्थायी रूप से पूरे प्लेटफॉर्म पर की गई ब्लॉकिंग आनुपातिकता की सांविधानिक आवश्यकता को पूरा करती हैयह देखते हुए कि सरकार ने पहले व्यक्तिगत चैनलों और खातों को बंद करने का निर्देश देकर कम प्रतिबंधात्मक उपायों का प्रयास किया थालेकिन आपत्तिजनक सामग्री मिरर चैनलोंबैकअप चैनलोंबॉट्स और रोटेटेड हैंडल्स के माध्यम से फिर से उभरती रहीजिससे चैनल-विशिष्ट प्रवर्तन अप्रभावी हो गया। 
  • तत्काल आवश्यकता के संबंध में: न्यायालय ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि लगभग 22 लाख अभ्यर्थी NEET की पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले थेऔर यह माना कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र की कार्रवाई उचित थी। 

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (क) क्या है? 

बारे में: 

  • यह केंद्र और राज्य सरकारों को किसी भी कंप्यूटर संसाधन में उत्पन्नप्रेषितप्राप्त या संग्रहीत किसी भी जानकारी को रोकनेनिगरानी करने या डिक्रिप्ट करने के निदेश जारी करने की शक्ति प्रदान करता है। 
  • इन शक्तियों का प्रयोग निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है: 
    • भारत की संप्रभुता या अखंडताभारत की रक्षाराज्य की सुरक्षा के हित में। 
    • विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध। 
    • लोक व्यवस्था बनाए रखने के लियेया इनसे संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध को अंजाम देने के लिये उकसाने से रोकने के लिये 
    • किसी भी अपराध के अन्वेषण के लिये 

इंटरनेट वेबसाइटों को ब्लॉक करने की प्रक्रिया: 

  • धारा 69इसी प्रकार के कारणों और आधारों (जैसा कि ऊपर बताया गया है) के आधार परकेंद्र को सरकार की किसी भी अभिकरण या किसी मध्यस्थ से किसी भी कंप्यूटर संसाधन पर उत्पन्नप्रसारितप्राप्त या संग्रहीत या होस्ट की गई किसी भी जानकारी की जनता तक पहुँच को अवरुद्ध करने के लिये कहने में सक्षम बनाती है। 
  • 'मध्यस्थोंशब्द में दूरसंचार सेवानेटवर्क सेवाइंटरनेट सेवा और वेब होस्टिंग के प्रदाताओं के अलावा सर्च इंजनऑनलाइन भुगतान और नीलामी साइटेंऑनलाइन मार्केटप्लेस और साइबर कैफे शामिल हैं। 
  • पहुँच को अवरुद्ध करने के लिये ऐसा कोई भी अनुरोध लिखित रूप में दिये गए कारणों पर आधारित होना चाहिये