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सांविधानिक विधि

तुषार मेहता को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिये सॉलिसिटर जनरल के पद पर पुनः नियुक्त किया गया

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 22-Jun-2026

"नियुक्ति समिति (ACC) ने श्री तुषार मेहता की भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में उच्चतम न्यायालय में भारत संघ का प्रतिनिधित्व करने हेतु पुनर्नियुक्ति को आगामी तीन वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिये अथवा अगले आदेश तकजो भी पहले होअनुमोदित कर दिया है।" 

स्रोत: कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) 

चर्चा में क्यों? 

केंद्र सरकार ने तुषार मेहता को जुलाई, 2026 से प्रभावी तीन वर्ष के एक और कार्यकाल के लिये भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) के रूप में पुनः नियुक्त किया है। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 20 जून, 2026 को जारी एक आदेश के माध्यम से इस पुनः नियुक्ति को मंजूरी दी। 

पृष्ठभूमि 

  • तुषार मेहता 10 अक्टूबर, 2018 से भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्यरत हैंजिससे वे सी.के. दफ्तारी के बाद द्वितीय सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) बन गए हैंजो 28 जनवरी, 1950 से इस पद के पहले धारक भी थे।  
  • मेहता को इससे पहले जुलाई, 2023 से प्रभावी रूप से 30 जून, 2026 तक के कार्यकाल के लिये पुनः नियुक्त किया गया था। 
  • उन्होंने 1987 में गुजरात बार काउंसिल में एक अधिवक्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण कराया और 2008 में गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। उन्हें 2014 में भारत का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया और 2018 में उन्हें सॉलिसिटर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया। 
  • भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) देश का दूसरा सर्वोच्च विधि अधिकारी हैजो भारत के अटॉर्नी जनरल के अधीन है और उसे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।  

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा अनुमोदित प्रमुख नियुक्तियाँ 

  • सॉलिसिटर जनरलउच्चतम न्यायालय:तुषार मेहता को जुलाई, 2026 से तीन वर्ष के लिये पुनः नियुक्त किया गया। 
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल - उच्चतम न्यायालय (1 जुलाई, 2026 से प्रभावी):विक्रमजीत बनर्जी और के.एम. नटराज। 
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल - सुप्रीम कोर्ट (30 जून, 2026 से):सूर्यप्रकाश वी. राजूएन. वेंकटरमनऔर ऐश्वर्या भाटी। 
  • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल - दिल्ली उच्च न्यायालय:चेतन शर्मा को जुलाई, 2026 से छह महीने के लिये या अगले आदेश तकजो भी पहले होके लिये पुनः नियुक्त किया गया। 

भारत के सॉलिसिटर जनरल कौन होते हैं? 

  • भारत के सॉलिसिटर जनरल संघ के द्वितीय सर्वोच्च विधि अधिकारी हैंजो भारत के अटॉर्नी जनरल के अधीन हैं और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों द्वारा सहायता प्राप्त करते हैं।  
  • अटॉर्नी जनरल के विपरीतजिनका पद संविधान के अनुच्छेद 76 के अधीन एक सांविधानिक पद है, SGI और ASG के पद न तो सांविधानिक हैं और न ही सांविधिक प्रकृति के हैं। 
  • सेवा की शर्तें संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक के अधीन बनाए गए विधि अधिकारी (सेवा की शर्तें) नियम, 1987 द्वारा शासित होती हैं। 
  • ACC, SGI की नियुक्ति की सिफारिश और अनुमोदन करता हैयह प्रस्ताव सामान्यत: विधि एवं न्याय मंत्री की स्वीकृति के साथ विधि मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव या विधि सचिव के स्तर पर प्रस्तुत किया जाता हैजिसके बाद यह ACC और राष्ट्रपति के पास जाता है।  
  • भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) के कर्त्तव्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: 
    • उन्हें सौंपे गए विधिक मामलों पर भारत सरकार को सलाह देना। 
    • उन मामलों में जिनमें संघ एक पक्षकार है या जिसका उसमें हित हैउच्चतम न्यायालय या किसी भी उच्च न्यायालय में संघ की ओर से पेश होना। 
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा किए गए संदर्भों में सरकार का प्रतिनिधित्व करना 
    • संविधान अथवा प्रवर्तनीय विधि के अधीन अथवा उसके द्वारा प्रदत्त अन्य कर्त्तव्यों एवं दायित्त्वों का निर्वहन करना 
  • निजी विधिक व्यवसाय पर प्रतिबंध:किसी विधि अधिकारी (Law Officer) को निजी पक्षकारों की ओर से वकालतनामा स्वीकार करनेभारत सरकार अथवा किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के प्रतिकूल किसी पक्षकार को विधिक परामर्श देनेसरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी अभियुक्त का आपराधिक कार्यवाही में प्रतिरक्षा करने अथवा पूर्व स्वीकृति के बिना किसी निगमित संस्था में कोई पद अथवा नियुक्ति स्वीकार करने की अनुमति नहीं होती है