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सांविधानिक विधि

उच्चतम न्यायालय ने 2025-26 के लिये इथेनॉल आवंटन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

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 01-Jul-2026

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम भारत संघ और अन्य 

"समर्पित इथेनॉल संयंत्रों को उपेक्षित नहीं किया जा सकता।" 

न्यायमूर्ति एम.एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू   

स्रोत: उच्चतम न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

हाल ही मेंउच्चतम न्यायालय नेभारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य (2026) के मामले में, इस दलील को सुनने के बाद कि कर्नाटक उच्च न्यायालय का एक आदेश इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर राष्ट्रीय नीति को अस्थिर कर सकता हैइथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 के लिये इथेनॉल आपूर्ति आवंटन के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। 

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी ? 

  • एम./एस. विनप डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेडजो कि एक समर्पित इथेनॉल निर्माता कंपनी हैने एक समर्पित इथेनॉल संयंत्र स्थापित करने के बावजूद इथेनॉल आपूर्ति के कम आवंटन को चुनौती देते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया। 
  • याचिकाकर्त्ता के संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 9.90 करोड़ लीटर थीलेकिन उसे ESY 2025-26 के वित्तीय वर्ष के लिये 9.26 करोड़ लीटर की बोली के मुकाबले केवल 3.92 करोड़ लीटर आवंटित किया गया था। 
  • तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि सर्वोत्तम प्रयास के आधार पर तरजीही आवंटन याचिकाकर्त्ता को अंतर-पक्षीय करार के अनुपालन को बाध्य करने के लिये परमादेश मांगने का अधिकार प्रदान नहीं कर सकता है। 
  • OMCs ने आगे तर्क दिया कि प्रतिनिधित्व की अनुमति देना स्वयं सरकारी नीति में संशोधन के समान होगाजो विधि में अग्राह्य है। 
  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्त्ता को पक्षकारों के बीच हुए करार और OMCs के लगातार पिछले आचरण के आधार पर विद्यमान नीति के जारी रहने की वैध अपेक्षा थी। 
  • उच्च न्यायालय ने OMCs को करार के खंड 6.8 के अनुरूप कार्य करने का निदेश देने के लिये परमादेश रिट जारी करने का निदेश दियाविशेष रूप से इसलिये क्योंकि OMCs ने स्वयं ही खरीद को 1.44 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 3.92 करोड़ लीटर करने के लिये इस खंड का हवाला दिया था। 
  • इस आदेश से व्यथित होकर भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय का रुख किया। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

इस मामले पर विचार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण टिप्पणियां कीं: 

उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के संबंध में: 

  • भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी और तर्क दिया कि इससे 20% इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण (E20 नीति) की राष्ट्रीय नीति अस्थिर हो सकती है। 

मंच के चयन पर: 

  • जब पीठ द्वारा यह पूछा गया कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ से संपर्क क्यों नहीं किया जा सकतातो अटॉर्नी जनरल ने प्रस्तुत किया कि ESY 2025-26 के लिये इथेनॉल आपूर्ति संविदा अक्टूबर 2025 में पहले ही अंतिम रूप दे दिया गया थाऔर इसी तरह की कई याचिकाएं विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित थीं। 
  • तदनुसारअटॉर्नी जनरल ने लंबित मामलों को समेकित करने के लिये उचित स्थानांतरण याचिकाएं दाखिल करने हेतु समय मांगा। 

अंतरिम अनुतोष प्रदान करने के संबंध में: 

  • भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अटॉर्नी जनरल और प्रत्यर्थियों के वरिष्ठ अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बादपीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया। 
  • पीठ ने ESY 2025-26 के लिये इथेनॉल आपूर्ति आवंटन के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दियाजब तक कि आगे विचार-विमर्श नहीं हो जाता। 

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम क्या है? 

एथेनॉल और मिश्रण के बारे में: 

  • इथेनॉल एक जैव ईंधन है जिसका उत्पादन शर्करा के किण्वन या पेट्रोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता हैभारत में यह मुख्य रूप से गन्ने के गुड़ से प्राप्त होता हैसाथ ही मक्काअतिरिक्त चावल और क्षतिग्रस्त अनाज का उपयोग भी बढ़ रहा है। 
  • इथेनॉल को फीडस्टॉक और उत्पादन तकनीक के आधार पर 1G, 2G या 3G में वर्गीकृत किया जाता है। 
  • ब्लेंडिंग का तात्पर्य कच्चे तेल के आयात और उत्सर्जन को कम करने के लिये पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से है; E10, E20 और E100 क्रमशः 10%, 20% और शुद्ध इथेनॉल ईंधन को दर्शाते हैं।     
  • E20 के लिये संगत इंजनों की आवश्यकता होती हैजिसमें दक्षता में थोड़ा समझौता करना पड़ता हैजबकि E100 के लिये फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की आवश्यकता होती हैब्राजील जैसे देशों की तुलना में भारत अभी भी फ्लेक्स-फ्यूल को अपनाने के शुरुआती चरणों में है। 

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम: 

  • EBP कार्यक्रम राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (NBP), 2018 के अधीन संचालित होता है और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है। 
  • इसके उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करनाग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करना और वैकल्पिक कृषि बाजार के माध्यम से किसानों की आय को बढ़ाना है। 
  • भारत ने अपना 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) लक्ष्य 2025 में हासिल कर लियाजो मूल समय सीमा 2030 से पाँच वर्ष पहले है।  
  • अप्रैल 2026 सेभारत में बेचे जाने वाले सभी पेट्रोल में 20% इथेनॉल होना अनिवार्य होगा और उसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 होना चाहिये 
  • एथेनॉल की उत्पादन क्षमता 2014 में अरब लीटर से कम से बढ़कर लगभग 20 अरब लीटर हो गई हैजो E20 जनादेश के लिये आवश्यक 11 अरब लीटर से अधिक है। 
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (NBCC) अधिशेष घोषणाओं के आधार पर फीडस्टॉक आवंटन की देखरेख करती है। 

अवसंरचना और मूल्य निर्धारण सुधार: 

  • वित्तीय सहायता योजनाओं और सुनिश्चित मूल्य निर्धारण तंत्रों के साथ-साथ OMCs और समर्पित इथेनॉल संयंत्रों के बीच दीर्घकालिक ऑफटेक करार ने स्थिर मांग प्रदान की है और इथेनॉल उत्पादन में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया है। 
  • करों के युक्तिकरण (GST को 18% से घटाकर 5% करने) और एथेनॉल के अंतरराज्यीय मुक्त आवागमन को सक्षम बनाने वाले विधिक संशोधनों ने लागत को और कम कर दिया है और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को कम करने में सहायता की है। 

EBP कार्यक्रम का प्रभाव: 

  • इस कार्यक्रम ने कच्चे तेल के आयात पर अंकुश लगाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है और विदेशी मुद्रा की पर्याप्त बचत की हैसाथ ही देश के नेट-जीरो लक्ष्यों के अनुरूप कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी की है। 
  • इससे किसानों और शराब बनाने वाली फैक्ट्रियों की आय में भी वृद्धि हुई हैग्रामीण क्षेत्रों में नियोजन सृजित हुआ है और DDGS पशु आहार जैसे मूल्यवान उप-उत्पादों के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं को बढ़ावा मिला है। 

एथेनॉल फीडस्टॉक की पीढ़ियाँ: 

पीढ़ी 

कच्चा माल 

विशेषताएँ 

प्रथम पीढ़ी (1G) 

खाद्य जैव-द्रव्य (गन्नामक्कागेहूँ) 

खाद्य सुरक्षा के साथ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करती हैप्रौद्योगिकी की दृष्टि से परिपक्वकिंतु पारिस्थितिकीय दृष्टि से अपेक्षाकृत अधिक बोझिल। 

द्वितीय पीढ़ी (2G) 

अखाद्य जैव-द्रव्य (कृषि अवशेषधान की परालीबाँस) 

पराली जलाने की समस्या (विशेषकर पंजाब एवं हरियाणा में) के समाधान में सहायकरूपांतरण की प्रक्रिया जटिल एवं अधिक व्ययकारी। 

तृतीय पीढ़ी (3G) 

शैवाल (Algae) आधारित 

उच्च उत्पादन क्षमताकृषि योग्य भूमि अथवा मीठे जल की आवश्यकता नहींभारत में अभी अनुसंधान एवं विकास (R&D) के चरण में।  

चतुर्थ पीढ़ी (4G) 

आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें/जीव 

अधिक कार्बन अवशोषण (Carbon Capture) के उद्देश्य से विकसितवर्तमान में मुख्यतः सैद्धांतिकअवधारणा के स्तर पर।