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सिविल कानून
कर वर्गीकरण विक्रय के समय वस्तुओं के स्वरूप पर आधारित होगा, न कि उनके अंतिम उपयोग पर
«06-Oct-2026
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अतिरिक्त वाणिज्यिक कर आयुक्त और अन्य बनाम कैडिला हेल्थ केयर लिमिटेड और अन्य "कर अधिकारियों को आपूर्ति की गई वस्तु पर ध्यान देना चाहिये, न कि वस्तु के 'अंतिम उपयोग' पर।" न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली |
स्रोत: उच्चतम न्यायालय
चर्चा में क्यों?
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने अतिरिक्त वाणिज्यिक कर आयुक्त एवं अन्य बनाम कैडिला हेल्थ केयर लिमिटेड एवं अन्य (2026) के मामले में अभिनिर्धारित किया। न्यायालय ने माना कि विक्रय के समय वस्तुओं का स्वरूप ही उनके कर वर्गीकरण को निर्धारित करता है, और उपभोक्ताओं द्वारा उनके बाद के उपयोग से इसमें कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। न्यायालय ने निर्णय दिया कि पाउडर और बिस्कुट उत्पादों पर पेय पदार्थों की तरह कर नहीं लगाया जा सकता और राजस्व विभाग की अपील खारिज कर दी।
एडिशनल कमिश्नर कमर्शियल टैक्स बनाम कैडिला हेल्थ केयर लिमिटेड (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- प्रत्यर्थी, कैडिला हेल्थ केयर लिमिटेड, ने "GRD पाउडर" और "GRD मिक्स" नामक दो उत्पादों को पाउडर और बिस्कुट के रूप में काउंटर पर बेचा।
- यह विवाद मूल्यांकन वर्ष 1997-1998 से संबंधित था।
- राजस्व विभाग ने उत्पादों को पेय पदार्थ माना, इस आधार पर कि उनका अंतिम उपयोग उपभोक्ता द्वारा तरल रूप में सेवन करना था, चाहे उनका मूल रूप कुछ भी हो।
- राजस्व विभाग ने मध्य प्रदेश वाणिज्यिक कर अधिनियम, 1994 की अनुसूची द्वितीय के भाग 4 में प्रविष्टि 20(ii) के अधीन इन्हें "गैर-मादक पेय पदार्थ" के रूप में वर्गीकृत करने की मांग की, जिस पर 10% की दर से कर लगाया जाएगा।
- प्रत्यर्थी ने तर्क दिया कि पाउडर और बिस्कुट के रूप में बेची जा रही वस्तुएं अवशिष्ट प्रविष्टि के अंतर्गत आती हैं और उन पर 8% की दर से कर लगाया जा सकता है।
- मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अनुसूची 2 की अवशिष्ट प्रविष्टि के अधीन वर्गीकरण को बरकरार रखते हुए, माल पर 8% की दर से कर लगाने का निर्णय लिया।
- राजस्व विभाग ने उच्चतम न्यायालय में अपील की।
- न्यायालय के समक्ष प्रश्न यह था कि वस्तुओं को उनके अंतिम उपयोग (दूध या पानी के साथ मिलाकर पेय बनाना) के आधार पर वर्गीकृत किया जाना चाहिये या विक्रय के समय उनके स्वरूप के आधार पर।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
कर योग्य घटना और वर्गीकरण के आधार पर:
- कर योग्य घटना आपूर्ति का कार्य है।
- कर का निर्धारण वस्तुओं की प्रकृति और उन्हें बेचने के तरीके के आधार पर किया जाता है।
- कर अधिकारियों को बिक्री के समय माल के स्वरूप के आधार पर कर लगाना चाहिये और आपूर्ति की गई वस्तु पर ध्यान देना चाहिये, न कि उसके अंतिम उपयोग पर।
- उपभोक्ता द्वारा वस्तुओं के बाद के उपयोग से उनका वर्गीकरण इस प्रकार नहीं बदला जा सकता है जिससे उन पर उच्च दर से कर लागू हो।
न्यायालय द्वारा दिये गए दृष्टांत के आधार पर:
- पाउडर के रूप में बेचे जाने वाले प्रोटीन पाउडर पर पाउडर पर लागू होने वाला कर लगेगा।
- बोतलबंद कोल्ड कॉफी या पैकेटबंद प्रोटीन शेक जैसे रेडी-टू-ड्रिंक पेय पदार्थों पर पेय पदार्थों पर लागू होने वाला कर लगेगा।
प्रविष्टि में "पेय पदार्थ" के अर्थ पर:
- इस प्रविष्टि में "पेय पदार्थ" के साथ सूचीबद्ध वस्तुएं, अर्थात् सिरप, कॉर्डियल, आसुत रस, अर्क और एसेंस, सभी तरल पदार्थ या तरल तैयारी को दर्शाते हैं।
- इन सभी में एक समान बात यह है कि ये तरल पदार्थ हैं जिन्हें बोतलों में भरकर, संग्रहित करके और तरल रूप में ही सेवन या उपयोग किया जा सकता है।
- "पेय पदार्थ" शब्द को अलग से पढ़कर ऐसे उत्पादों को शामिल नहीं किया जा सकता जिनका भौतिक स्वरूप मौलिक रूप से भिन्न हो।
कर संबंधी प्रविष्टि में "सहित" शब्द पर:
- "शामिल" शब्द को स्वतः ही एक सर्वव्यापी अभिव्यक्ति के रूप में नहीं माना जा सकता है जो पेय पदार्थों से दूर से भी जुड़े हर उत्पाद को कवर करती हो।
पियोमा इंडस्ट्रीज बनाम केरल राज्य (2008) पर निर्भरता के आधार पर:
- वह मामला रसना से संबंधित था, और संबंधित प्रविष्टि में स्पष्ट रूप से गैर-मादक पेय तैयार करने के लिये उपयोग किये जाने वाले पाउडर, टैबलेट और सांद्रण को शामिल करते हुए एक स्पष्टीकरण शामिल था।
- इससे यह पता चलता है कि विधायिका को पेय पदार्थों की श्रेणी में पाउडर को स्पष्ट रूप से शामिल करने का तरीका पता था, लेकिन उसने वर्तमान प्रविष्टि में ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया था।
हमदर्द (वक्फ) लेबोरेटरीज बनाम आयुक्त, वाणिज्यिक कर, उत्तर प्रदेश (2026) पर निर्भरता के आधार पर:
- उस मामले में शरबत तरल रूप में था, जबकि न्यायालय के समक्ष मौजूद उत्पाद पाउडर और बिस्कुट थे, इसलिये निर्णय अलग था।
निष्कर्ष
- न्यायालय ने राजस्व विभाग की अपील खारिज कर दी और उच्च न्यायालय के उस निर्णय को बरकरार रखा जिसमें GRD पाउडर और GRD मिक्स को अवशिष्ट श्रेणी के अधीन वर्गीकृत किया गया था और जिस पर 8% कर लगाया जाना था।
कर संविधियों के अंतर्गत वस्तुओं के वर्गीकरण के सिद्धांत क्या हैं?
बारे में:
- वर्गीकरण यह निर्धारित करता है कि कोई उत्पाद कर संबंधी संविधि की किस धारा के अंतर्गत आता है, और इसलिये उस पर लागू होने वाले कर की दर भी निर्धारित होती है।
- विवाद सामान्यतः तब उत्पन्न होते हैं जब राजस्व विभाग माल को उच्च दर वाली किसी विशिष्ट प्रविष्टि के अधीन रखना चाहता है, जबकि करदाता अवशिष्ट या कम दर वाली प्रविष्टि का दावा करता है।
प्रमुख सिद्धांत:
- विक्रय के समय का स्वरूप: जैसा कि इस मामले में माना गया है, वस्तुओं का वर्गीकरण विक्रय स्थल पर वास्तव में आपूर्ति की गई वस्तु के आधार पर किया जाता है। अंतिम उपयोग सामान्यतः अप्रासंगिक होता है, जब तक कि प्रविष्टि में ही अंतिम उपयोग को मानदंड न बनाया गया हो।
- शुल्क प्रावधानों का कठोरता से पालन: कर संबंधी प्रविष्टि को उसके शब्दों के अनुसार ही पढ़ा जाता है। राजस्व विभाग इसे उन वस्तुओं पर लागू नहीं कर सकता जिन्हें विधायिका ने स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया है।
- राजस्व पर भार: जहाँ राजस्व किसी विशेष श्रेणी के अंतर्गत वस्तुओं का वर्गीकरण करना चाहता है, वहाँ यह साबित करने का भार उसी पर होता है कि वस्तुएं उस श्रेणी के अंतर्गत आती हैं (हिंदुस्तान फेरोदो लिमिटेड बनाम कलेक्टर ऑफ सेंट्रल एक्साइज, 1997)।
- विशिष्ट प्रविष्टि बनाम अवशिष्ट प्रविष्टि: माल को अवशिष्ट प्रविष्टि में तभी रखा जाता है जब उसे किसी विशिष्ट प्रविष्टि के अंतर्गत उचित रूप से नहीं लाया जा सकता (डनलप इंडिया लिमिटेड बनाम भारत संघ, 1976)। यहाँ, चूँकि माल "पेय पदार्थ" श्रेणी में नहीं आता था, इसलिये अवशिष्ट प्रविष्टि लागू हुई।
- नोस्किटुर ए सोसाइस (Noscitur a sociis): किसी प्रविष्टि में एक शब्द अपने आस-पास के शब्दों से रंग ग्रहण करता है। न्यायालय ने "पेय पदार्थ" को सिरप, कॉर्डियल, जूस, अर्क और एसेंस, सभी तरल पदार्थों के साथ पढ़ा।
- विधानमंडल द्वारा स्पष्ट समावेशन: यदि विधानमंडल किसी श्रेणी में पाउडर, सांद्रित पदार्थ या इसी प्रकार के पदार्थों को शामिल करना चाहता है, तो वह इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है, जैसा कि पियोमा इंडस्ट्रीज में रसना प्रविष्टि में है । इस प्रकार की भाषा का अभाव यह दर्शाता है कि वे पदार्थ इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं।