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सिविल कानून

निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों में भी हुक्का सेवा वर्जित है

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 29-Sep-2026

X बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य 

"सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन प्रत्याभूत एक मौलिक अधिकार है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(छ) के अधीन व्यापार का अधिकार रखने वाले प्रतिष्ठान के वाणिज्यिक हित द्वारा कम नहीं किया जा सकता है।" 

न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी 

स्रोत: इलाहाबाद उच्च न्यायालय 

चर्चा में क्यों? 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की पीठ ने संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर निर्णय लेते हुए निर्णय दिया कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार का संचालन और रेस्तरां द्वारा हुक्का सेवाएं प्रदान करना, यहाँ तक ​​कि निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र के भीतर भी, निषिद्ध है।  

  • न्यायालय ने माना कि ऐसी गतिविधि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 (2017 में संशोधित) के नियम 4(3) का उल्लंघन करती है, जिसे सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) के साथ पढ़ा जाता है। 

इस मामले की पृष्ठभूमि क्या थी? 

  • उत्तर प्रदेश भर में हुक्का बार के संचालन और रेस्तरां में हुक्का सेवाएं प्रदान करने के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष कई संबंधित याचिकाएं दायर की गईं। 
  • न्यायालय के समक्ष प्रश्न यह नहीं था कि हुक्का के माध्यम से तंबाकू पीना अपने आप में निषिद्ध है या नहीं। मुद्दा यह था कि क्या रेस्तरां और इसी प्रकार के प्रतिष्ठान निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र के भीतर ग्राहकों को हुक्का सेवा प्रदान कर सकते हैं। 
  • याचिकाकर्त्ताओं ने हुक्का सेवाओं को जारी रखने के समर्थन में कई तर्क प्रस्तुत किये: 
    • सबसे पहले, यह तर्क दिया गया कि नामित धूम्रपान क्षेत्र के भीतर हुक्का सेवा की अनुमति है, इसके लिये उच्चतम न्यायालय के नरिंदर एस. चड्ढा बनाम बृहन्मुंबई नगर निगम (2014) के निर्णय पर विश्वास किया गया। 
    • दूसरा, रेस्तरां "स्व-सेवा" मॉडल अपना सकते हैं, जिसके अधीन हुक्का तैयार करके ग्राहक को सौंप दिया जाएगा, और फिर ग्राहक बिना किसी सहायता के उसका सेवन कर सकेगा। 
    • तीसरा, हुक्का उपकरण की आपूर्ति करना सेवा प्रदान करने के बजाय उपकरण किराए पर देने के समान था। 
    • चौथा, खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगम के पास हुक्का बार के लिये लाइसेंस देने या विनियमित करने की अधिकारिता नहीं थी, और पुलिस के पास सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के अधीन प्रवर्तन शक्तियां नहीं थीं। 

न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं? 

सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) योजना और निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों पर:  

  • न्यायालय ने पाया कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के अधीन सामान्य नियम सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध है, और निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र उस सामान्य प्रतिबंध से अलग बनाया गया एक अपवाद मात्र है। 
  • जबकि निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र किसी व्यक्ति को धूम्रपान करने की अनुमति देता है, यह किसी रेस्तरां को हुक्का सेवा के रूप में प्रदान करने की अनुमति नहीं देता है, क्योंकि संशोधित नियम 4 (3) धूम्रपान क्षेत्र में किसी भी सेवा को प्रतिबंधित करता है। 

2017 के संशोधन के प्रभाव और नरिंदर एस. चड्ढा पर: 

  • न्यायालय ने कहा कि संशोधन से पहले के नियम 4(3) के अनुसार धूम्रपान क्षेत्र का उपयोग केवल धूम्रपान के लिये ही किया जाना था, और "कोई अन्य सेवा" की अनुमति नहीं थी। इस भाषा की व्याख्या करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने नरिंदर एस. चड्ढा मामले में धूम्रपान क्षेत्रों में हुक्का परोसने की अनुमति अप्रत्यक्ष रूप से दे दी थी, जबकि भोजन और अन्य वस्तुओं की सेवा पर प्रतिबंध लगा दिया था। 
  • यद्यपि , 2017 में केंद्र सरकार ने नियम 4(3) को प्रतिस्थापित करते हुए यह उपबंधित किया कि "धूम्रपान क्षेत्र या धूम्रपान के लिये उपलब्ध कराए गए किसी भी स्थान में कोई सेवा की अनुमति नहीं होगी।" 
  • उच्च न्यायालय ने भाषा में इस परिवर्तन को महत्त्वपूर्ण माना। न्यायालय ने कहा कि नरिंदर एस. चड्ढा को पूर्ववर्ती सांविधिक पाठ के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिये, और संशोधित नियम 4(3) अब निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र के भीतर भी हुक्का सेवा प्रदान करने पर रोक लगाता है। 

स्व-सेवा मॉडल पर: 

  • न्यायालय ने स्व-सेवा के तर्क को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि हुक्का तैयार करने में कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें उपकरण को जोड़ना, कटोरे में तंबाकू डालना, तल को पानी से भरना, पन्नी तैयार करना और गर्म कोयला रखना शामिल है, जिनके लिये विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। 
  • न्यायालय ने कहा: "याचिकाकर्त्ताओं द्वारा सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) और संशोधित नियमों के शिकंजे से बचने के लिये काल्पनिक रूप से संश्लेषित स्व-सेवा मॉडल एक व्यवहार्य मॉडल नहीं है, क्योंकि हुक्का के संचालन की प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से 'सेवा' शामिल होती है, जिसे इसमें विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिये और यह ऐसा कार्य नहीं है जिसे अप्रशिक्षित और नौसिखिए ग्राहक कर सकें।" 

हुक्का को किराए पर देने के बजाय सेवा के रूप में देना: 

  • न्यायालय ने इस व्यवस्था को सामान्य किराए से अलग बताया, जिसमें संपत्ति का कब्ज़ा और नियंत्रण ग्राहक को हस्तांतरित हो जाता है। यहाँ, ग्राहक को निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र के भीतर ही रहना होता है और वहीं हुक्का पीना होता है। 
  • न्यायालय ने टिप्पणी की: "निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्र के अंदर ग्राहक द्वारा हुक्का का अनिवार्य सेवन इस तथ्य को पूरी तरह से स्पष्ट करता है कि उसे केवल एक 'सेवा' प्रदान की जा रही है।" 
  • सामान्यतः आवश्यक निरंतर सहायता, जैसे कि कोयला भरना, राख हटाना और तंबाकू बदलना, को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने माना कि शुल्क लेकर हुक्का तैयार करना, असेंबल करना, वितरित करना, जलाना, ईंधन भरना और उसकी देखरेख करना एक प्रकार की सेवा प्रदान करने के समान है। 
  • इसमें इस बात पर बल दिया गया कि संव्यवहार का सार ही निर्णायक होता है, न कि प्रतिष्ठान द्वारा अपनाया गया नाम। 

अनुच्छेद 21 और 19(1)(छ) पर: 

  • न्यायालय ने माना कि सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ हवा में सांस लेने का धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति का अधिकार अनुच्छेद 21 के अधीन एक मौलिक अधिकार है, जिसे अनुच्छेद 19(1)(छ) के अधीन व्यापार करने के अधिकार का दावा करने वाले प्रतिष्ठान के वाणिज्यिक हितों द्वारा कम नहीं किया जा सकता है। 

लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के बारे में: 

  • न्यायालय ने याचिकाकर्त्ताओं की इस अभिवचन को स्वीकार किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगम हुक्का बार के संचालन को अधिकृत करने वाले लाइसेंस जारी नहीं कर सकते। खाद्य सुरक्षा ढाँचा ऐसी कोई शक्ति प्रदान नहीं करता है, और नगर निगम के पास ऐसा कोई सांविधिक उपबंध नहीं है जो उसे अलग से हुक्का बार लाइसेंस जारी करने का अधिकार देता हो। 

पुलिस की प्रवर्तन शक्तियों पर: 

  • न्यायालय ने पुलिस शक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) की धारा 12, 13 और 15 पुलिस अधिकारियों को उचित मामलों में तलाशी, जब्ती, संपत्ति ज़ब्ती और दण्ड सहित अधिनियम को लागू करने का अधिकार देती हैं। 

राज्य विधान की आवश्यकता पर: 

  • न्यायालय ने हुक्का बार से संबंधित मुद्दों को सुलझाने और दण्ड एवं जुर्माने को बढ़ाने के लिये गुजरात, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक द्वारा उठाए गए विधायी उपायों का उल्लेख किया। 
  • इसमें यह उम्मीद जताई गई कि उत्तर प्रदेश "इस अवसर पर खरा उतरेगा", जिसमें निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों में हुक्का परोसने के लिये कठोर दण्ड का प्रावधान करने वाली अधिसूचना पर विचार करना भी शामिल है। 
  • न्यायालय ने हुक्का पीने से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और इस गलत धारणा पर भी ध्यान दिया कि हुक्का सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक होता है। 

निष्कर्ष: 

न्यायालय ने माना कि उत्तर प्रदेश में रेस्तरां द्वारा हुक्का बार का संचालन और हुक्का सेवाएं प्रदान करना नियम 4(3) का घोर उल्लंघन है और सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) की योजना और उद्देश्य के विपरीत है। 

संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया गया और निर्णय की एक प्रति सूचना और आवश्यक अनुपालन के लिये उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजने का निदेश दिया गया। 

सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) क्या है? 

बारे में: 

  • सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) एक केंद्रीय विधि है जिसे सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर रोक लगाने और उनके व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को विनियमित करने के लिये बनाई गई है। 
  • इसका उद्देश्य लोक स्वास्थ्य की रक्षा करना है, विशेष रूप से गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वास्थ्य को, तंबाकू के सेवन और परोक्ष रूप से फैलने वाले धुएं के हानिकारक प्रभावों से बचाना है। 

मुख्य उपबंध: 

  • धारा 4: सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषिद्ध है। हालांकि, इस परंतुक के अधीन तीस या उससे अधिक कमरों वाले होटल, तीस या उससे अधिक बैठने की क्षमता वाले रेस्तरां और हवाई अड्डों को धूम्रपान क्षेत्र या स्थान के लिये अलग से व्यवस्था करने की अनुमति है। 
  • धारा 12: अधिकृत अधिकारियों को उन परिसरों में प्रवेश करने और तलाशी लेने का अधिकार देती है जहाँ उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। 
  • धारा 13: उल्लंघन के मामलों में अधिकृत अधिकारियों को तंबाकू उत्पादों और संबंधित सामग्रियों को जब्त करने का अधिकार प्रदान करती है। 
  • धारा 21: धारा 4 के उल्लंघन में सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने पर जुर्माने का उपबंध करती है। 

सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिषेध संबंधी नियम, 2008 का नियम 4 क्या है? 

बारे में: 

  • सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिये केंद्र सरकार द्वारा सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के अधीन ये नियम बनाए गए थे। 
  • नियम 4 होटलों, रेस्तरां और हवाई अड्डों में एक अलग धूम्रपान क्षेत्र या स्थान के प्रावधान से संबंधित है जो धारा 4 के परंतुक के अंतर्गत आते हैं, और ऐसे क्षेत्रों के लिये शर्तें निर्धारित करता है, जिसमें भौतिक पृथक्करण, पर्याप्त वेंटिलेशन और प्रवेश और निकास द्वारों से दूर स्थान शामिल हैं। 

नियम 4(3) — संशोधन से पूर्व: 

  • "धूम्रपान क्षेत्र या स्थान का उपयोग केवल धूम्रपान के उद्देश्य से किया जाएगा और किसी अन्य सेवा की अनुमति नहीं होगी।" 

नियम 4(3) — 2017 के बाद का संशोधन: 

  • धूम्रपान क्षेत्र या धूम्रपान के लिये उपलब्ध कराए गए किसी भी स्थान में कोई भी सेवा प्रदान करने की अनुमति नहीं होगी।