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सांविधानिक विधि
माता को पारिवारिक सदस्य का प्रमाण पत्र देने से इंकार नहीं किया जा सकता
« »22-Sep-2026
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मंडुला खासीम बी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य "पत्नी द्वारा पारिवारिक सदस्य प्रमाण पत्र प्राप्त करने का विकल्प चुनने तक उसे प्रमाण पत्र जारी होने का इंतजार नहीं कराया जा सकता।" न्यायमूर्ति बी.एस. भानुमथी |
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय
चर्चा में क्यों?
न्यायमूर्ति बी.एस.भानुमथी की एकल न्यायाधीश पीठ ने मंडुला खासिम बी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य (2026) के मामले में, एक तहसीलदार द्वारा एक माता के सरकारी कर्मचारी पुत्र की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य प्रमाण पत्र के लिये आवेदन को अस्वीकार करने के निर्णय को रद्द कर दिया, यह मानते हुए कि वह स्वतंत्र रूप से प्रमाण पत्र के लिये आवेदन कर सकती है, भले ही उसका पुत्र विवाहित था।
मंडुला खासिम बी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- याचिकाकर्त्ता एक पुलिस कांस्टेबल की माता थीं, जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनके पुत्र के सेवा अभिलेखों में उन्हें नामांकित व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया था।
- उन्होंने सेवा संबंधी विधिक लाभ प्राप्त करने के लिये राजस्व (SER.II) विभाग के G.O.Ms.No.145 के अधीन परिवार सदस्य प्रमाण पत्र के लिये एक ऑनलाइन आवेदन जमा किया।
- तहसीलदार ने एक टिप्पणी लिखकर उसका आवेदन खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि चूँकि मृतक विवाहित था, इसलिये उसकी पत्नी और बच्चे, यदि कोई हों, तो उन्हें उसके परिवार के सदस्य माना जाना चाहिये।
- तहसीलदार ने कहा कि मृतक ने अपनी पत्नी के विरुद्ध तलाक की कार्यवाही शुरू की थी, जो उसकी मृत्यु के बाद खारिज कर दी गई थी, और कहा कि पत्नी के प्रमाण पत्र के आवेदन पर उचित जांच के बाद ही विचार किया जा सकता है।
- उस समर्थन पत्र में आगे कहा गया था कि विवाहित पुत्र की माता को प्रमाण पत्र के प्रयोजन के लिये परिवार के सदस्य के रूप में नहीं माना जा सकता है, और यह दर्ज किया गया था कि याचिकाकर्त्ता ने मृतक की पत्नी को छोड़कर प्रमाण पत्र मांगा था।
- याचिकाकर्त्ता ने G.O.Ms.No.145 के अधीन निर्धारित प्रक्रिया पर विश्वास करते हुए अनुमोदन को चुनौती दी, जिसके अनुसार तहसीलदार को प्रमाण पत्र जारी करने या अस्वीकार करने का निर्णय लेने से पहले सात दिन का नोटिस जारी करना, जांच करना और पंचनामा दर्ज करना आवश्यक है।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
- याचिकाकर्त्ता के नामांकित व्यक्ति के रूप में पात्रता पर: न्यायालय ने माना कि चूँकि याचिकाकर्त्ता ने अपने दिवंगत पुत्र के सेवा लाभों के लिये नामांकित व्यक्ति होने का दावा किया था, इसलिये वह केवल इसी आधार पर पारिवारिक सदस्य प्रमाण पत्र के लिये आवेदन करने की हकदार थी।
- पुत्र के विवाह के होते हुए भी माता का वैधानिक उत्तराधिकारी और परिवार की सदस्य होना: न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्त्ता, मृतक सरकारी कर्मचारी की माता होने के नाते, मृतक की पत्नी या बच्चों की उपस्थिति में भी वैधानिक उत्तराधिकारी और परिवार की सदस्य है, और यह दर्जा केवल इसलिये समाप्त नहीं हो जाता क्योंकि उसके पुत्र का विवाह हो गया है।
- पत्नी के दावे पर आवेदन निर्भर न होने के संबंध में: न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्त्ता को प्रमाण पत्र जारी होने के लिये तब तक प्रतीक्षा नहीं कराई जा सकती जब तक कि पत्नी स्वयं इसके लिये आवेदन न करे। मृतक की माता होने के नाते, उनके आवेदन पर स्वतंत्र रूप से विचार किया जाना चाहिये और किसी अन्य परिवार के सदस्य के दावे के लंबित रहने तक इसे स्थगित नहीं किया जा सकता।
- अन्य पात्र परिवार सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया के संबंध में: न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि निर्धारित प्रक्रिया के अधीन जांच करने के बाद, परिवार का कोई अन्य सदस्य शामिल किये जाने का पात्र पाया जाता है, तो ऐसे सदस्य को माता के साथ प्रमाण पत्र में जोड़ा जा सकता है, जिससे आवेदन करने के उसके स्वतंत्र अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- तहसीलदार के अनुमोदन की अवैधता पर: G.O.Ms.No.145 के अधीन विहित प्रक्रिया पर विचार करते हुए, न्यायालय ने याचिकाकर्त्ता के आवेदन को अस्वीकार करने वाले तहसीलदार के अनुमोदन को स्पष्ट रूप से अवैध पाया, क्योंकि यह इस गलत धारणा पर आधारित था कि केवल विवाहित मृतक कर्मचारी की पत्नी और बच्चों को ही परिवार के सदस्य माना जा सकता है।
पारिवारिक सदस्य प्रमाणपत्र क्या है?
पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य:
G.O.Ms.No.145, (SER.II) में तहसीलदार द्वारा परिवार सदस्य प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया विहित की गई है। यह प्रमाण पत्र सरकारी कर्मचारी की मृत्यु पर, साथ ही आम जनता के सदस्यों को भी जारी किया जा सकता है, जिससे पात्र व्यक्ति सेवा लाभ, सरकारी योजनाओं और अन्य उद्देश्यों का लाभ उठा सकें।
विहित प्रक्रिया:
- आवेदन प्राप्त होने पर, तहसीलदार को सात दिनों का नोटिस जारी करना आवश्यक है, जिसमें अन्य संभावित पात्र परिवार के सदस्यों को आपत्तियां या दावे प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है।
- तहसीलदार को आवेदक के दावे और मृतक के परिवार की संरचना की जांच करनी होगी।
- इस जांच के भाग के रूप में एक पंचनामा दर्ज किया जाना है, जिसमें निर्णय लेने से पहले निष्कर्षों को दस्तावेजित किया जाएगा।
- जांच के आधार पर, तहसीलदार यह तय करता है कि प्रमाण पत्र जारी किया जाए या अस्वीकार किया जाए, और आवेदक के साथ-साथ पात्र पाए गए अन्य परिवार के सदस्यों को भी इसमें शामिल कर सकता है।
पात्रता को नियंत्रित करने वाले प्रमुख सिद्धांत:
- मृतक के सेवा लाभों के लिये नामांकित व्यक्ति होने का दावा करने वाला व्यक्ति उस आधार पर प्रमाण पत्र के लिये आवेदन करने का हकदार है।
- किसी मृत कर्मचारी की माता, मृतक के विवाहित होने या न होने की परवाह किये बिना, विधिक उत्तराधिकारी और परिवार की सदस्य बनी रहती है, और केवल इसलिये कि उसका पति/पत्नी या बच्चे जीवित हैं, वह यह दर्जा नहीं खोती है।
- किसी पात्र परिवार के सदस्य (जैसे कि माता) को प्रमाण पत्र प्राप्त करने का अधिकार किसी अन्य पात्र परिवार के सदस्य (जैसे कि पति/पत्नी) के पहले आवेदन करने पर निर्भर नहीं है; प्रत्येक आवेदन पर सरकारी आदेश के अधीन अनिवार्य जांच के बाद स्वतंत्र रूप से विचार और कार्रवाई की जानी चाहिये।