- बुक्स एवं मैगज़ीन्स
- लॉग इन
- भाषा: Eng हिंदी
होम / करेंट अफेयर्स
सिविल कानून
संदाय न होने पर विक्रय विलेख अमान्य नहीं होता
« »10-Aug-2026
|
रजिया बेगम और अन्य बनाम नफीसा बेगम अब्दुल हामिद और अन्य "विक्रय विलेख रजिस्ट्रीकृत होने पर, विक्रय मूल्य के आंशिक संदाय पर भी, स्वामित्व अंतरीति को मिल जाता है।" न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन |
स्रोत: उच्चतम न्यायालय
चर्चा में क्यों?
उच्चतम न्यायालय की एक पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन शामिल थे, ने रजिया बेगम और अन्य बनाम नफीसा बेगम अब्दुल हामिद और अन्य (2026) के मामले में निर्णय दिया कि विक्रय को पूरा करने के लिये निष्पादन के समय पूरी विक्रय राशि का वास्तविक संदाय आवश्यक नहीं है, और शेष राशि का संदाय न करने से रजिस्ट्रीकृत विक्रय विलेख अमान्य नहीं होता है।
- न्यायालय ने यह माना कि शेष राशि का संदाय न होने पर अंतरणकर्त्ता के पास उपलब्ध उपचार धन की वसूली के लिये वाद करना है, न कि विक्रय विलेख को रद्द करना।
- तदनुसार, न्यायालय ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ द्वारा द्वितीय अपील में पारित उस निर्णय को अपास्त कर दिया, जिसमें विचारण न्यायालय और प्रथम अपील न्यायालय के विक्रय विलेख को बरकरार रखने वाले सर्वसम्मत निष्कर्षों में हस्तक्षेप किया गया था।
रजिया बेगम और अन्य बनाम नफीसा बेगम अब्दुल हामिद और अन्य (2026) के मामले की पृष्ठभूमि क्या थी?
- मूल वादियों ने मूल प्रतिवादी के पक्ष में दो विक्रय विलेख निष्पादित किये, जिनमें से प्रत्येक में कुल विक्रय मूल्य 7,000 रुपए निर्धारित किया गया था।
- निष्पादन के समय, प्रत्येक संपत्ति के लिए 2,500 रुपए का संदाय किया गया था, जबकि प्रतिवादी ने विभिन्न वित्तीय संस्थानों और सरकारी विभागों को वादी के बकाया ऋणों को चुकाने के लिये प्रत्येक संपत्ति के लिये 4,500 रुपए अपने पास रख लिये थे।
- वादी पक्ष ने विक्रय विलेखों को शून्य और अप्रभावी घोषित करने, विलेखों को रद्द करने, स्वामित्व की घोषणा करने और प्रतिवादी के विरुद्ध स्थायी व्यादेश जारी करने की मांग करते हुए वाद दायर किया।
- विचारण न्यायालय ने वाद को खारिज कर दिया, और इस निर्णय को प्रथम अपील न्यायालय ने बरकरार रखा।
- इससे असंतुष्ट होकर, वादियों ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के समक्ष द्वितीय अपील दायर की, जिसने विचारण न्यायालय और प्रथम अपील न्यायालय के एक समान निष्कर्षों को पलट दिया।
- इसके बाद प्रतिवादियों ने उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील की।
न्यायालय की क्या टिप्पणियां थीं?
- रजिस्ट्रीकरण पर स्वामित्व का अंतरण : न्यायालय ने माना कि एक बार विक्रय विलेख रजिस्ट्रीकृत हो जाने के बाद, विक्रय मूल्य के आंशिक संदाय पर भी स्वामित्व अंतरीति को मिल जाता है, और विक्रय मूल्य के शेष भाग का संदाय न करने से विक्रय विलेख अमान्य नहीं होता है।
- संदाय न होने पर उचित उपचार के संबंध में: न्यायालय ने माना कि विक्रय राशि के बकाया संदाय न होने पर उपलब्ध उपचार विक्रय विलेख को रद्द करने की मांग करने के बजाय बकाया राशि की वसूली के लिये वाद दायर करना है।
- आंशिक प्रतिफल की जानकारी के साथ निष्पादन पर: न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि विक्रय विलेख को इस पूर्ण ज्ञान के साथ निष्पादित किया गया है कि केवल आंशिक प्रतिफल का संदाय किया गया है, तो उसे केवल इसलिये शून्य या अप्रभावी नहीं माना जा सकता है क्योंकि शेष प्रतिफल, जिसका संदाय करने का वचन किया गया था और विलेख में शामिल किया गया था, का संदाय नहीं किया गया है।
- वादी पक्ष के अधिकार के संबंध में: न्यायालय ने माना कि वादी पक्ष का अधिकार केवल शेष विक्रय राशि की वसूली के लिये वाद दायर करने तक सीमित था, और विक्रय विलेखों को अकृत और शून्य घोषित करने की मांग करने तक विस्तारित नहीं था।
- प्रतिवादियों को दिये गए अनुतोष के संबंध में: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्त्ता-प्रतिवादी ब्याज सहित शेष विक्रय राशि का संदाय करने के लिये उत्तरदायी होंगे, और यदि वे चाहें तो संपत्ति का कब्जा प्राप्त करने का अनुरोध कर सकते हैं।
- कब्जे के संबंध में: न्यायालय ने विचारण न्यायालय और प्रथम अपील न्यायालय के उस निर्णय में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया, जिसमें प्रतिवादी-वादी के कब्जे को नहीं बदला गया था।
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 54 क्या है?
परिभाषा:
- विक्रय स्वामित्व का अंतरण है जो संदाय किये गए, वचन किये गए या आंशिक रूप से संदाय किये गए और आंशिक रूप से वचन किये गए कीमत के बदले में होता है।
अंतरण की रीति :
- 100 रुपए या उससे अधिक मूल्य की मूर्त अचल संपत्ति, या कोई प्रतिफल/अमूर्त वस्तु: केवल रजिस्ट्रीकृत विलेख द्वारा ही अंतरणीय है।
- 100 रुपए से कम मूल्य की मूर्त अचल संपत्ति: रजिस्ट्रीकृत विलेख द्वारा या कब्जे के अंतरण द्वारा अंतरित किया जा सकता है।
- संपत्ति का अंतरण तब होता है जब विक्रेता क्रेता (या क्रेता द्वारा निर्देशित किसी व्यक्ति) को संपत्ति का कब्ज़ा सौंप देता है।
विक्रय की संविदा:
- एक ऐसा करार जिसके अधीन पक्षकारों के बीच तय शर्तों पर विक्रय होगा।
- इससे स्वतः ही संपत्ति में कोई हित या भार उत्पन्न नहीं होता है।
विक्रय बनाम विक्रय के लिये संविदा:
|
विक्रय |
विक्रय के लिये संविदा |
|
स्वामित्व का अंतरण |
मात्र करार |
|
क्रेता को पूर्ण स्वत्व/हित प्रदान करता है। |
ऐसा कोई स्वत्व या हित सृजित नहीं करता। |
|
सर्वबंधी अधिकार (Right in rem) प्रदान करता है। |
व्यक्तिगत अधिकार (Right in personam) प्रदान करता है। |
|
रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज द्वारा अभिप्रमाणित होना आवश्यक है। |
रजिस्ट्रीकरण आवश्यक नहीं है। |
वैध विक्रय के लिये आवश्यक तत्त्व:
- पक्षकार: कम से कम दो – अंतरणकर्त्ता/विक्रेता/क्रेता और अंतरीति/क्रेता/ग्राहक।
- योग्यता: विक्रेता के पास स्वामित्व और विधिक अधिकार होना चाहिये, और वह अवयस्क, विकृत चित्त या विधिक रूप से अयोग्य नहीं होना चाहिये; क्रेता विधिक रूप से सक्षम होना चाहिये और अचल संपत्ति खरीदने के लिये अयोग्य नहीं होना चाहिये।
- विषयवस्तु: अचल संपत्ति, मूर्त (जैसे, भूमि, मकान, पेड़, पृथ्वी से जुड़ी वस्तुएं) या अमूर्त (जैसे, नौका विहार का अधिकार, बंधक, मत्स्य पालन)।
- मूल्य/प्रतिफल: संविदा के समय निर्धारित किया जाना चाहिये; विक्रय के समय, उससे पहले या बाद में देय, और एकमुश्त या किश्तों में।
- संपत्ति अंतरण : यह या तो कब्जे की सुपुर्दगी या विक्रय विलेख के रजिस्ट्रीकरण द्वारा संपन्न होता है।